संवाद सहयोगी, गोपेश्वर: चारधाम यात्रा को अब समय कम रहा गया है। मंदिर समिति व प्रशासन यात्रा तैयारियों में जुटा हुआ है, परंतु बारिश के बाद जिस प्रकार स्लाइड जोनों पर मलबा व बोल्डर सड़क पर आ रहे हैं। उससे साफ है कि इस बार भी जिले में स्थित भूस्खलन जोन यात्रियों की परीक्षा लेंगे। हालांकि प्रशासन का दावा है कि सुरक्षित यात्रा के लिए हरसंभव कदम उठाए जा रहे हैं।

चमोली जिले में दर्जनभर भूस्खलन जोन प्रत्येक वर्ष यात्रियों की राह का रोड़ा बनते रहे हैं। नंदप्रयाग का परथाडीप, मैठाणा, लामबगड़, छिनका, पातालगंगा, हेलंग, हाथीपहाड़ के अलावा कई ऐसे भूस्खलन जोन हैं, जहां पर प्रत्येक वर्ष यात्रा के दौरान मलबा, बोल्डर सड़क पर आने से घंटों यात्रियों को इंतजार करना पड़ता है। मैठाणा, परथाडीप में तो इस बार विदेशी तकनीक से भूस्खलन को रोकने का कार्य किया गया। मगर नंदप्रयाग परथाडीप में किया गया कार्य का एक हिस्सा एक माह पूर्व क्षतिग्रस्त हो गया था। जिससे इस तकनीकी से हो रहे कार्य पर भी सवाल उठाए गए। चमोली जिले का लामबगड़ भूस्खलन जोन इस बार सबसे अधिक सक्रिय है। हालांकि ऑफ सीजन में यहां पर निर्माण कार्य किया और वर्तमान समय में भी किया जा रहा है। मगर जिस प्रकार बारिश के बाद लामबगड़ में लगातार मलबा, बोल्डर सड़क पर आ रहे हैं उससे यात्रा सीजन के दौरान भी यह दिक्कत सामने आ सकती है। इंकार नहीं किया जा सकता। हालांकि जिला प्रशासन सुरक्षित यात्रा के दावे कर रहा है। जिलाधिकारी स्वाति एस भदौरिया का कहना है कि लामबगड़ में पिछले वर्ष भूस्खलन के चलते दिक्कत हुई थी। इस बार ऐसा न हो इसके लिए लामबगड़ के दोनों छोरों पर पोकलैंड मशीनें तैनात की जाएंगी। भूस्खलन की स्थिति में लामबगड़ में यात्री सुविधाओं के लिए टिन शैड भी तैयार किया जा रहा है।

Posted By: Jagran

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