गोपेश्‍वर, चमोली [देवेंद्र रावत]: पांचवीं तक शिक्षा और ठेठ गंवई लहजा, लेकिन जीवटता ऐसी कि कोई भी कायल हुए बिना न रहे। यही है उत्तराखंड के चमोली जिले के घाट विकासखंड स्थित चाका मोठा गांव निवासी 57-वर्षीय गोविंद सिंह मेहर की पहचान। जो उन्होंने गांव में ही रहकर चौलाई के लड्डू व मंडुवा के बिस्कुट बनाकर कायम की। आज उन्हीं के प्रयासों से चौलाई के लड्डू प्रसाद के रूप में बदरीनाथ धाम समेत अन्य मंदिरों की खास पहचान बन गए हैं।

गोविंद सिंह ने चौलाई के लड्डू व मंडुवा के बिस्कुट बनाने की शुरुआत 1998 में की। शुगर-फ्री होने के कारण इन उत्पादों को लोगों ने हाथोंहाथ लिया। इससे प्रेरित होकर उन्होंने चौलाई के लड्डू को मंदिरों में प्रसाद के रूप में स्थापित कर स्थानीय लोगों को रोजगार से जोड़ने की ठानी। 2006 में उन्होंने हैस्को संस्था की मदद से बदरीनाथ धाम में चौलाई के लड्डू का प्रसाद चढ़ाने की पहल की। साथ ही बतौर मास्टर ट्रेनर जोशीमठ, मेरग, गणेशपुर, बामणी, पैनी आदि गांवों की 150 से अधिक महिलाओं को चौलाई के लड्डू व मंडुवे के बिस्कुट बनाने का प्रशिक्षण भी देने लगे। 

बदरीनाथ में लड्डू प्रसाद का अहम हिस्सा 

पहले मंदिरों में चौलाई, मंडुवा व गेहूं के आटे से बना प्रसाद ही चढ़ता था। लेकिन, कालांतर में इसकी जगह मिठाई आदि ने ले ली। बदरीनाथ मंदिर में भी प्रसाद के रूप में चने की दाल, मिश्री, काजू, किसमिस आदि ले जाया जाने लगा। लेकिन, गोविंद सिंह की पहल पर एक बार फिर चौलाई के लड्डू प्रसाद का खास हिस्सा बन गए हैं।

एक वर्ष में 19 लाख की आमदनी 

गोविंद सिंह ने जिन महिलाओं को प्रशिक्षित किया, बीते वर्ष उन्होंने चौलाई के लड्डू और मंडुवे के बिस्कुट बेचकर 19 लाख की आमदनी की। वर्तमान में प्रति महिला दस हजार रुपये से अधिक की आय हो रही है। उत्पादों की मांग बढ़ने से क्षेत्र में लोग अब चौलाई व मंडुवे की खेती पर खास ध्यान दे रहे हैं। 

शुगर-फ्री है लड्डू प्रसाद 

गोविंद सिंह बताते हैं कि लड्डू का प्रसाद 51 और 101 रुपये के पैकेट में उपलब्ध है। इन पैकेट पर बदरी-केदार की फोटो भी छपी है। वर्तमान में बदरीनाथ के अलावा मनसा देवी, हरकी पैड़ी व चंडी देवी मंदिर (हरिद्वार), पूर्णागिरी मंदिर (टनकपुर) और गोलू देवता मंदिर (अल्मोड़ा) में चौलाई का लड्डू प्रसाद श्रद्धालुओं को दिया जा रहा है। शुगर-फ्री होने से इस प्रसाद की खूब मांग है। 

पीएम को भी भाया  

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात में कपकोट ब्लॉक के मुनारगांव (बागेश्वर) में मंडुवे के बिस्कुट बनाने वाली महिलाओं की प्रशंसा की थी। उन्होंने इसे स्वास्थ्य की दृष्टि से लाभदायक बताया था। नतीजा, यह बिस्कुट राष्ट्रीय परिदृश्य पर छा गया। मुनारगांव में भी 965 महिलाओं को 2017 में तीन माह तक गोविंद सिंह ने ही मंडुवा समेत अन्य स्थानीय उत्पादों से बिस्कुट बनाने का प्रशिक्षण दिया था। 

मनसा देवी के श्रद्धालुओं को भी पसंद 

हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर में भी चौलाई, कुट्टू, घी और मेव से तैयार प्रसाद श्रद्धालुओं की पसंद बन गया है। वर्तमान में स्वयं सहायता समूह से जुड़ी बहादराबाद के रुहालकी गांव की दस महिलाएं मंदिर के लिए चौलाई का प्रसाद तैयार कर रही हैं। इससे वह रोजाना 500 रुपये तक कमा लेती हैं। 

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Posted By: Sunil Negi