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    Chamoli Accident: दूसरे प्लांट में भी एक माह पहले हुआ था धमाका, सावधान! चमोली के 13 एसटीपी में खतरे में जान

    By Jagran NewsEdited By: Nirmala Bohra
    Updated: Sat, 22 Jul 2023 11:00 AM (IST)

    Chamoli Accident चमोली कस्बे में हुए एसटीपी हादसे के बाद संज्ञान में आया है कि इस प्लांट से लगभग 200 मीटर दूर स्थित दूसरे प्लांट में भी एक माह पूर्व ...और पढ़ें

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    Chamoli Accident: चमोली जिले में 17 में से 13 एसटीपी का संचालन टिन शेड में हो रहा है।

    देवेंद्र सिंह रावत, गोपेश्वर: Chamoli Accident: चमोली कस्बे में हुए एसटीपी हादसे के बाद संज्ञान में आया है कि इस प्लांट से लगभग 200 मीटर दूर स्थित दूसरे प्लांट में भी एक माह पूर्व धमाका हुआ था। तब ऊर्जा निगम की ओर से प्लांट का कनेक्शन काट दिया गया था, जो अब तक जुड़ नहीं पाया है। लेकिन, बिजली के सुरक्षा मानकों की ओर ध्यान देना तब जरूरी नहीं समझा गया, अन्यथा ऐसी नौबत ही नहीं आती। चमोली कस्बे में एसटीपी का संचालन जयभूषण मलिक कांट्रेक्टर (पटियाला) और कांफिडेंट इंजीनियरिंग इंडिया प्रा.लि. (कोयंबटूर) संयुक्त रूप से करती हैं।

    बताया गया कि इस एसटीपी के पास ही स्थित दूसरे एसटीपी में भी तकनीकी गड़बड़ी थी, लेकिन संबंधित कंपनी सुरक्षा मानकों की अनदेखी कर इसका संचालन कर रही थीं। इसकी परिणति करीब एक माह पूर्व प्लांट में धमाके के रूप में हुई, जिससे प्लांट में पीटी पैनल के साथ इंटरनल केबल भी जल गई थी। इसके बाद ऊर्जा निगम के जेई कुंदन सिंह रावत ने प्लांट का कनेक्शन काट दिया, जो अब तक जुड़ नहीं पाया है। इस एसटीपी में 80 किलोवाट का कनेक्शन है, जबकि प्लांट की क्षमता 0.76 एमएलडी की है।

    प्लांट के अंदर कंपनी के ट्रांसफार्मर भी लगे हैं। हैरत देखिए कि प्लांट में विद्युत लाइन लोहे के सपोर्ट से बनाई गई रेलिंग के सहारे ऊपर पहुंचाई गई है। साथ ही नान टेक्निकल स्टाफ से प्लांट का संचालन कराया जा रहा है। यह भी पता चला है कि ऊर्जा निगम की ओर से प्लांट का कनेक्शन काटने के बाद स्पष्ट कर दिया गया था कि सुरक्षा मानक पूरे करने पर ही दोबारा कनेक्शन जोड़ा जाएगा। लेकिन, इससे पहले ऊर्जा निगम के अधिकारी प्लांट का निरीक्षण करेंगे। निगम के अधिशासी अभियंता अमित सक्सेना ने बताया कि प्लांट में खामियां मिलने के बाद ही क्षेत्रीय अवर अभियंता की मौजूदगी में विद्युत कनेक्शन काटा गया था। अभी तक प्लांट में खामियां दूर नहीं की गई हैं, लिहाजा विद्युत कनेक्शन बहाल नहीं किया गया।

    जिले में 17 में से 13 एसटीपी का संचालन टिन शेड में

    चमोली में बदरीनाथ हाईवे से लगे सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में करंट से 16 व्यक्तियों की मौत के बाद जिले में संचालित अन्य एसटीपी में सुरक्षा मानकों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। दैनिक जागरण ने अपनी पड़ताल में पाया कि चमोली जिले में 17 में से 13 एसटीपी का संचालन टिन शेड में हो रहा है। यहां टिन की दीवारों पर विद्युत उपकरण लगाने के साथ तारों को भी फिट किया गया है और धातु से होकर विद्युत का संचार अधिक तेजी से होता है। इसके चलते हादसे का खतरा और भी बढ़ जाता है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि, यदि इन एसटीपी में हादसा होता है तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा।

    चमोली जिले में नमामि गंगे योजना के तहत सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाकर उन्हें अलकनंदा नदी के किनारे बसे शहरों से जोड़ा गया है। जिले में संचालित 17 प्लांट में से बदरीनाथ और जोशीमठ में तो पक्का निर्माण है। लेकिन, गोपेश्वर, कर्णप्रयाग, नंदप्रयाग और चमोली में सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के कंट्रोल पैनल टिन शेड में बनाए हैं। दरअसल, सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के कलेक्शन टैंक के साथ कंट्रोल पैनल का निर्माण किया जाता है।

    कंट्रोल पैनल से जुड़ी मशीनें कलेक्शन टैंक से सीवर का मलबा साफ करने के बाद पानी की जांच कर साफ पानी को नदी या फिर नालों में डाल देती है। इससे शहर से लगी नदी सीवर की गंदगी से प्रदूषित नहीं होती। कर्णप्रयाग में ​िस्थत सीवरेज प्लांट का संचालन भी कान्फिडेंट इंजीनियरिंग लिमिटेड कोयंबटूर कंपनी ही करती है।

    लोहे के कंट्रोल पैनल के चलते तेजी से फैला करंट

    दरअसल, चमोली में जिस सीवर ट्रीटमेंट प्लांट में हादसा हुआ, उसका कंट्रोल पैनल लोहे का बना था। यह करंट से विस्फोटक स्थिति पैदा करने का प्रमुख कारण बना, जिसके चलते 16 लोग एक पल में ही जान गंवा बैठे।

    विशेषज्ञों की मानें तो, करंट फैलने से रोकने के लिए लोहे के कंट्रोल पैनल में प्लास्टिक की पाइप डाली जाती है। इसके बाद प्लास्टिक की पाइप के अंदर से विद्युत लाइन को गुजारा जाता है ताकि दुर्घटना की गुंजाइश न रहे। धातु को विद्युत का संवाहक माना जाता है। ऐसे में धातु के संपर्क में आते ही करंट का तंजी से संचार होता है।

    चमोली जिले में एसटीपी की स्थिति

    1. कर्णप्रयाग: सभी पांच सीवर ट्रीटमेंट प्लांट टिन शेड के कंट्रोल पैनल पर संचालित हो रहे हैं। क्षमता: 350 केएलडी
    2. गोपेश्वर: सभी तीन सीवर ट्रीटमेंट प्लांट का संचालन टिन शेड कंट्रोल पैनल पर किया जा रहा है क्षमता 3.56 एमएलडी
    3. चमोली: दो सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट का संचालन टिन शेड कंट्रोल पैनल पर किया जा रहा है क्षमता: 810 केएलडी
    4. नंदप्रयाग: दो सीवरट ट्रीटमेंट प्लांट का संचालन टिन शेड कंट्रोल पैनल पर किया जा रहा है क्षमता: 600 केएलडी
    5. जोशीमठ: दो सीवर ट्रीटमेंट प्लांट का आरसीसी कंट्रोल पैनल से संचालन क्षमता: 3.15 एमएलडी
    6. बदरीनाथ: तीन सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट में से एक का संचालन टिन शेड और दो का आरसीसी कंट्रोल पैनल पर संचालन किया जा रहा है, क्षमता: 1.27 एमएलडी