संवाद सहयोगी, गोपेश्वर: चमोली जिले में मानसून की बारिश ने गांवों में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। ग्रामीण क्षेत्रों को जाने वाले 200 से अधिक पैदल मार्ग भी बारिश में तहस नहस हो गए हैं। निर्माण विभागों की ओर से कागजी कार्रवाई की जा रही है। लेकिन, हकीकत यह है कि अधिकतर पैदल मार्गों को ग्रामीण श्रमदान के जरिये खुद ही खोलकर आवाजाही कर रहे हैं।

चमोली जिले में 80 प्रतिशत के करीब भूभाग ग्रामीण बाहुल्य है। गांवों तक आवाजाही के लिए संपर्क सड़कें बारिश के कारण बंद हैं। सड़कों से गांवों तक जाने के लिए एकल पैदल मार्ग आवाजाही का साधन रहते हैं, लेकिन बारिश ने पैदल मार्गों को भी तहस-नहस कर दिया है। गांव से सड़क तक पहुंचने में ग्रामीणों को जान जोखिम में डालनी पड़ रही है। जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकतर पैदल मार्ग जिला पंचायत, लोक निर्माण विभाग और विकासखंड के हैं। विभाग अभी क्षतिग्रस्त पैदल मार्गों की सूची बनाकर कागजी कार्रवाई में ही जुटा है। ऐसे में कब पैदल मार्ग दुरुस्त होंगे, कहा नहीं जा सकता। कई गांवों में खड़ी चट्टानों को काटकर पैदल मार्ग बनाए गए हैं। यहां बोल्डर टूटने से ग्रामीण गांवों में ही फंसे हुए हैं, जबकि कई गांवों के लोग श्रमदान से क्षतिग्रस्त पैदल मार्गों को आवाजाही लायक बना रहे हैं। भारत-चीन तिब्बत सीमा से लगे द्रोणागिरी गांव को जाने वाला एकमात्र पैदल मार्ग भी बारिश से क्षतिग्रस्त बना है। प्रधान रुद्र सिंह का कहना है कि यह पैदल मार्ग खड़ी चट्टान से होकर गुजरता है। लोक निर्माण विभाग को सूचना दी गई है, परंतु पैदल मार्ग की मरम्मत को लेकर विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है। स्थानीय निवासी धर्मेद्र पाल का कहना है कि जल्द पैदल मार्गों को खोलने की कार्रवाई नहीं की गई तो गांवों में रसद समेत अन्य संकट गहरा सकता है।

नाला उफान पर, हाईवे पर आया मलबा

जोशीमठ: बीती रात तेज बारिश के बाद अतिवृष्टि के कारण एटी नाला और गौर सिंह नाला उफान पर आ गया। परसारी के निकट मलारी हाईवे पर भी भारी मात्रा में मलबा आ गया। इसके कारण ग्रामीणों ने जागकर रात काटी। नायब तहसीलदार प्रदीप नेगी ने बताया कि प्रशासन की टीम ने तत्काल मौके पर पहुंचकर रात को ही दोनों स्थानों से मलबा हटा दिया। दूसरी ओर नगर पालिका अध्यक्ष शैलेंद्र पंवार के नेतृत्व में पालिका की टीम ने औली पहुंचकर दोनों नालों से हुए नुकसान का स्थलीय निरीक्षण किया। पालिकाध्यक्ष ने कहा कि औली में अतिवृष्टि से काफी नुकसान हुआ है। बताया कि औली से आने वाले तीनों नालों से भारी कटाव के चलते जोशीमठ को खतरा बढ़ गया है। बताया कि कई घरों में दरार आई हैं। कृषि भूमि भी बर्बाद हुई है।

Edited By: Jagran