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    काशी की गंगा में क्रूज, डबल टेकर, मोटर बोट के लिए कोई नियम-कानून नहीं; जिम्मेदार बेपरवाह

    Updated: Sun, 04 Jan 2026 08:57 AM (IST)

    काशी की गंगा में क्रूज, मोटर बोट और नावों के संचालन के लिए कोई नियम-कानून नहीं हैं, जिससे पर्यटकों की सुरक्षा खतरे में है। नगर निगम ने लाइसेंस देना बं ...और पढ़ें

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    पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर शासन-प्रशासन संग खुफिया एजेंसी अलर्ट, रूट निर्धारण नहीं। जागरण

    जेपी पांडेय, वाराणसी। धर्म व अध्यात्म की नगरी काशी में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई हजार करोड़ की योजनाएं धरातल पर आ चुकी हैं। कई करोड़ की योजनाएं जल्द आने वाली हैं। पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर शासन-प्रशासन संग खुफिया एजेंसी को अलर्ट रहने का आदेश है लेकिन जिम्मेदारों की लापरवाही व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

    यह हम नहीं कह रहे हैं, गंगा में दो हजार से अधिक चल रहे क्रूज, डबल टेकर, मोटर बोट और चप्पू को चलने के लिए कोई नियम-कानून नहीं है। उनके लिए कोई रूट निर्धारित नहीं किए गए हैं, जिसको जिधर से मन किया चल दिया। जिम्मेदारों की लापरवाही और नाविकों की मनमानी के चलते गंगा में आए दिन हादसे होते रहते हैं।

    क्रूूज, डबल टेकर और मोटर बोट से छोटे नाव टकराते रहते हैं। पर्यटकों को चोट आने के साथ हो-हल्ला होता है। नाव पलटने पर आनन-फानन में राहत कार्य पहुंचाया जाता है। हादसे के चलते कई पर्यटकों की जान तक जा चुकी है।

    कुछ दिनों तक जल पुलिस चेकिंग करने के साथ कार्रवाई करती है लेकिन उसे रूटीन में बनाए रखने के लिए कोई अधिकार नहीं है। जल पुलिस सिर्फ नावों पर क्षमता से ज्यादा पर्यटक बैठने या लाइफ जैकेट नहीं पहनने पर कार्रवाई करती है।

    गंगा में कितने लाइसेंसी नाव मालूम नहीं
    गंगा में संचालित छोटे-बड़े नावों को नगर निगम एक निर्धारित शुल्क देकर लाइसेंस देता था लेकिन शासन स्तर पर व्यवस्था में होने वाले बदलाव को लेकर मार्च-2024 से लाइसेंस देना बंद कर दिया। उनके लाइसेंस का नवीकरण भी बंद कर दिया है।

    ऐसे में कह सकते हैं कि गंगा में मनमाने तरीके से चलने वाले नावों पर किसी विभाग का नियंत्रण ही नहीं रहा। नगर निगम के पूर्व आंकड़ों पर नजर डाले तो करीब 1150 छोटे-बड़े नावों को लाइसेंस दिया था, कई नावों के लाइसेंस की वैधता खत्म हो गई है। कोई यह बताने वाला नहीं है कि गंगा में कितने नावों का लाइसेंस है।

    नाविक मांगते हैं मनमाना किराया
    संत रविदास पार्क से नमो घाट तक ज्यादातर क्रूज, डबल टेकर, मोटर बोट और नावें चलती है। क्रूज को छोड़ दिया जाए तो अन्य डबल टेकर, मोटर बोट और नाव का कोई किराया तय नहीं है। नाविक में मन में जो आया वह किराया बोल दिया। हालत यह है कि एक नाविक जो किराया बोलेगा दूसरा भी वहीं बोलता है।

    विशेष अवसरों पर किराया हजारों में पहुंच जाता है। बजड़े पांच लाख रुपये तक बुक होते हैं। दशाश्वमेध घाट पर नाविक प्रति यात्री से 300 से 500 रुपये किराया वसूलते हैं। यह किराया एक घंटे तक नौका विहार कराने का होता है। पर्यटकों को देखकरर नाविक दो से चार हजार रुपये तक भी किराया मांगते हैं।

    नावों में नहीं लगे हैं रिफ्लेक्टर टेप
    छोटे-बड़े सभी नावों पर रिफ्लेक्टर टेप लगाना जरूरी होता है जिससे शाम होने पर रोशनी पड़ने पर दिखाई दे। क्योंकि गंगा में नाव अंधेरा होने तक रात आठ बजे तक चलती है। साथ ही उसमें सवार सभी यात्री लाइफ जैकेज पहने रहे लेकिन ज्यादातर नावों पर लाइफ जैकेट नहीं है।यदि है तो फटे या खराब है जो पर्यटकों के बचाने में काम नहीं आएगा। इसको लेकर जल पुलिस कई बार कार्रवाई भी कर चुकी है। चेतावनी देने के साथ मुकदमा भी दर्ज कराई लेकिन नाविकों के सेहत पर कोई फर्क नहीं पड़ता है।

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    गंगा में संचालित होने वाले नावों के पंजीयन को लेकर परिवहन विभाग को जिम्मेदारी देने की बात है लेकिन शासन स्तर पर बायलाज बनाया जा रहा है। आदेश मिलने के साथ परिवहन विभाग नाव संचालन को लेकर कार्रवाई शुरू कर देगा लेकिन अभी हम कुछ भी नहीं कर सकते हैं। क्या अधिकार मिलेगा, यह बायलाज आने पर ही मालूम चलेगा। -मनोज वर्मा, आरटीओ (प्रवर्तन)।

    पर्यटकों को लाइफ जैकेट पहनाए बिना नाव पर नहीं बैठाने का आदेश नाविकों को दिया गया है। पर्यटक बिना लाइफ जैकेट के मिलने पर नाविक को चेतावनी नोटिस जारी किया जाता है। दोबारा मिलने पर नाविक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाता है। पर्यटकों को कोई दिक्कत होने पर गंगा में पेट्रोलिंग कर रही टीम तत्काल मौके पर पहुंचती है। पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर जल पुलिस में एक प्रभारी निरीक्षक, तीन उप निरीक्षक, दीवान और पुलिस कर्मी मिलाकर कुल 26 लोग है। पेट्रोलिंग के लिए चार स्टीमर है। गंगा में नाव के लिए रूट निर्धारण नहीं है। -राजकिशोर पांडेय, प्रभारी, जल पुलिस।


    पर्यटकों की सुरक्षा को लेकर नाविकों को लाइफ जैकेट पहनाने के लिए कहा गया है। समय-समय पर कार्यशाला कर नाविकों को जागरूक किया जाता है। पर्यटकों को आने वाली समस्या को संबंधित विभाग को पत्राचार कर अवगत करा दिया जाता है। नावों के संचालन को लेकर परिवहन विभाग को अधिकार देने की बात चल रही है।

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    -दिनेश कुमार, संयुक्त पर्यटन निदेशक