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    सारनाथ के नशा मुक्ति केंद्र संचालक सहित तीन गिरफ्तार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सि‍र में चोट लगने से मौत

    By Abhishek sharmaEdited By: Abhishek sharma
    Updated: Sat, 03 Jan 2026 05:45 PM (IST)

    सारनाथ के जन सुधार नशा मुक्ति केंद्र में बीएचयू छात्र आदित्य गोस्वामी की मौत का मामला सामने आया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मारपीट से सिर में चोट लगने ...और पढ़ें

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    पुल‍िस के अनुसार यह घटना नशा मुक्ति केंद्रों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाती है।

    जागरण संवाददाता, वाराणसी। सारनाथ बुद्धा सिटी कालोनी में स्थित जन सुधार नशा मुक्ति केंद्र में बीएचयू के छात्र की मौत का मामला सामने आया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार, छात्र की मौत मारपीट के कारण हुई है। इस मामले में सारनाथ पुलिस ने नशा मुक्ति केंद्र के संचालक सहित तीन लोगों को aगिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

    सहायक पुलिस आयुक्त विदुष सक्सेना ने बताया कि जन सुधार नशा मुक्ति केंद्र में नशे की लत से छुटकारा पाने के लिए जीजीआईसी सैयदराजा की प्रधानाचार्या प्रतिभा गोस्वामी ने अपने पुत्र आदित्य गोस्वामी, जो बीएचयू में मानव विज्ञान में एमए के छात्र थे, को 19 हजार रुपये प्रतिमाह के पैकेज पर 27 दिसंबर को भर्ती कराया था। स्वजन ने कई बार केंद्र पर मिलने का प्रयास किया, लेकिन उन्हें मिलने नहीं दिया गया।

    पुलिस की जांच में पता चला कि नशा मुक्ति केंद्र का संचालन युवराज सिंह कर रहे हैं, जो विशुनपुर कला थाना सकलडीहा, चंदौली के निवासी हैं। उनके साथ कुमार सौरभ और जितेंद्र गुप्ता भी इस केंद्र में काम कर रहे थे। जानकारी के अनुसार, केंद्र में भर्ती लोगों के साथ मारपीट की जाती थी। आदित्य की भर्ती के बाद उसे बहुत परेशान किया गया, जिसके परिणामस्वरूप उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी यह स्पष्ट किया गया है कि छात्र की मौत का कारण सिर में लगी चोट है।

    शनिवार को सहायक पुलिस आयुक्त विदुष सक्सेना और उनकी पुलिस टीम ने नशा मुक्ति केंद्र में पूछताछ के दौरान संचालक युवराज सिंह, कुमार सौरभ और जितेंद्र गुप्ता को गिरफ्तार किया। गिरफ्तार टीम में थाना प्रभारी पंकज त्रिपाठी, उपनिरिक्षक राहुल यादव और सौरभ शामिल थे।

    यह घटना नशा मुक्ति केंद्रों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाती है और यह दर्शाती है कि नशा मुक्ति के नाम पर किस प्रकार की अनियमितताएँ हो रही हैं। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए आगे की जांच शुरू कर दी है। इस घटना ने समाज में नशे की समस्या और नशा मुक्ति केंद्रों की विश्वसनीयता पर गंभीर चिंतन की आवश्यकता को उजागर किया है।