वाराणसी में कोटे की दुकान से लाकर गायों को ओढ़ाना था बोरा, आदेश को दरकिनार करते-करते बिता दी आधी सर्दी
वाराणसी के जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने बंदेपुर गांव स्थित गोवंश आश्रय स्थल का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने ठंड से बचाव के लिए गोवंश को बोरा न ओढ़ाने ...और पढ़ें

जिलाधिकारी के निरीक्षण के बाद आनन-फानन में बोरे को गोवंश आश्रय स्थल पर पहुंचाया गया।
जागरण संवाददाता, वाराणसी (काशी विद्यापीठ ब्लाक)। जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने गुरूवार देर रात बंदेपुर गांव स्थित वृहद गोवंश आश्रय स्थल का औचक निरीक्षण किया। इस निरीक्षण के दौरान गोवंश को ठंड से बचाने के लिए बोरा न ओढ़ाए जाने पर उन्होंने नाराजगी व्यक्त की।
उन्होंने कहा कि जिला आपूर्ति अधिकारी को निर्देश दिया गया था कि कोटे की दुकान से बोरे को गोवंश आश्रय भेजा जाए, ताकि पशुओं को ठंड से बचाया जा सके। जिलाधिकारी के निरीक्षण के बाद आनन-फानन में बोरे को गोवंश आश्रय स्थल पर पहुंचाया गया।
जिलाधिकारी ने गोवंश आश्रय स्थल में अलाव जलाने के लिए भी निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान 194 गोवंश पशु वहां मौजूद थे। इनमें से एक पशु बीमार अवस्था में पाया गया, जिस पर उन्होंने पशु चिकित्सक से स्पष्टीकरण मांगा।
इसके अलावा, गोवंश आश्रय स्थल की साफ-सफाई पर भी उन्होंने नाराजगी जताते हुए सुधार लाने का निर्देश दिया। बीडीओ राजेश यादव को रात्रि में गोवंश आश्रय स्थल की नियमित निगरानी रखने और वीडियोग्राफी बनाकर प्रेषित करने के लिए भी कहा गया।
जिलाधिकारी ने भूंसा, पेयजल और अन्य संसाधनों की भी जांच की। इस निरीक्षण में सीडीओ प्रखर सिंह, एडीओ (ग्राम विकास) त्रिवेणी उपाध्याय, क्षेत्रीय पशु चिकित्साधिकारी डा. लवलेश सिंह, ग्राम सचिव विजय कुमार आदि उपस्थित थे।
जिलाधिकारी ने कहा कि गोवंश की देखभाल और उनके स्वास्थ्य के प्रति गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे सुनिश्चित करें कि सभी आवश्यक संसाधन उपलब्ध हों और गोवंश की स्थिति में सुधार लाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएं।
इस निरीक्षण से यह स्पष्ट होता है कि प्रशासन गोवंश के कल्याण के प्रति गंभीर है और किसी भी प्रकार की लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे अपनी जिम्मेदारियों को समझें और गोवंश की देखभाल में कोई कमी न रखें।
इस प्रकार, जिलाधिकारी का यह औचक निरीक्षण गोवंश आश्रय स्थल की स्थिति को सुधारने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। प्रशासन की इस पहल से उम्मीद की जा रही है कि भविष्य में गोवंश की देखभाल और उनके स्वास्थ्य में सुधार होगा।

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