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    टैगोर जलयान 25 टन यूरिया लेकर वाराणसी से कोलकाता रवाना, पटना में भी अपलोड होगा सामान

    By Saurabh ChakravartyEdited By:
    Updated: Tue, 29 Dec 2020 07:59 PM (IST)

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ड्रीम प्रोजेक्ट गंगा में जल परिवहन गति पकड़ने लगा है । दो साल पूर्व संचालित रवींद्र नाथ टैगोर जलयान सोमवार को वाराणसी से ...और पढ़ें

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    रवींद्र नाथ टैगोर जलयान वाराणसी से कोलकाता 25 टन यूरिया खाद लेकर रवाना हुआ।

    वाराणसी, जेएनएन। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वर्णिम परियोजना में शामिल राल्हूपुर स्थित बंदरगाह से एक बार फिर इफ्को की लगभग 25 टन यूरिया खाद कोलकाता भेजी गयी। रवींद्र नाथ टैगोर जलयान से इफ्को की यह दूसरी खेप है। इसके अलावा कुछ माल पटना से भी लोड किया जायेगा। बताते चलें कि रवींद्र नाथ टैगोर से ही पिछले साल पेप्सिको व डाबर का भी माल कोलकाता से यहां मंगाया गया था।

    भारतीय अंतर्देशीय जलमार्ग प्राधिकरण के अधिकारी रुची दिखाएं तो इस बंदरगाह से कार्गो लाने ले जाने में और तेजी आये। बड़े व्यापारी भी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करते। जिससे सैकड़ों लोगों को रोजगार मिलेगा।अधिकारियों की उदासीनता की देन है कि इतनी बड़ी परियोजना के लोकार्पण के लगभग दो वर्ष बाद भी व्यापारी नहीं जुड़ सके हैं। मालूम हो कि रविंद्र नाथ टैगोर अगस्त माह में ही कोलकाता से यहां खाली आया था। पांच माह के इंतजार के बाद यूरिया की खेप प्रयागराज के फूलपुर से यहां आया। तत्पश्चात क्रेन के माध्यम से कंटेनर को जहाज पर लोड किया गया।अधिकारियों की मानें तो जहाज की लोकेशन के लिए यहां रिवर इनफार्मेशन सिस्टम भी इंस्टॉल किया गया है।इसके बाद यह पहली जहाज है जो कार्गो लेकर रवाना हुआ है।हालांकि पिछले लगभग एक साल से किसी भी तरह का कार्गो यहां नहीं आया था। बंदरगाह चालू होने के बाद हजारों लोगों को जहां प्रत्यक्ष रुप से रोजगार मिलने की संभावना है वहीं हजारों लोग अप्रत्यक्ष रूप से भी रोजगार से जुडेंगे। सड़कों पर बढ़ रही दुर्घटना व दबाव को कम करने के उद्देश्य से सरकार जलमार्ग  से व्यापार को बढ़ाने को लेकर काफी प्रयासरत हैं।

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वर्णिम परियोजनाओं में शामिल बंदरगाह का नवंबर 2018 में पीएम नरेंद्र मोदी ने ही लोकार्पण किया गया था। उसके बाद कई बार जहाज कार्गो लेकर यहां आ चुका है। हालांकि पिछले लगभग एक साल से किसी भी तरह का कार्गो यहां नहीं आया था। बंदरगाह चालू होने के बाद हजारों लोगों को जहां प्रत्यक्ष तौर से रोजगार मिलने की संभावना है वहीं हजारों लोग अप्रत्यक्ष रूप से भी रोजगार से जुडेंगे। सड़कों पर बढ़ रही दुर्घटना व दबाव को कम करने के उद्देश्य से सरकार जलमार्ग  से व्यापार को बढ़ाने को लेकर काफी प्रयासरत हैं।

    अंतर्देशीय जलमार्ग से जुड़ जाने से आंतरिक इलाकों से सीधे बांग्‍लादेश तक और बांग्‍लादेश से आंतरिक इलाकों तक तथा बंगाल की खाड़ी से होते हुए शेष विश्‍व तक कार्गो आवाजाही की जाएगी। 12 नवंबर, 2018 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वाराणसी में गंगा नदी (राष्‍ट्रीय जलमार्ग-1) पर भारत का पहला नदी तट मल्‍टीमॉडल टर्मिनल राष्‍ट्र को समर्पित किया था। उन्‍होंने उसी दिन गंगा नदी (राष्‍ट्रीय जलमार्ग-1) पर कोलकाता से वाराणसी जाने वाले देश के पहले कंटेनर कार्गो को भी रिसीव किया। भारत में अंतर्देशीय जल परिवहन (अजप) के विकास में न केवल ऐतिहासिक साबित हुई बल्कि ये राष्‍ट्रीय जलमार्ग-1 पर व्‍यापारिक गतिविधियों में भी तेजी से उछाल का कारण बनी।

    फ्रेट विलेज की जमीन के लिए चल रही वार्ता

    नोडल अधिकारी ने बताया कि राल्हूपुर के पास 100 एकड़ में फ्रेट विलेज के लिए वाराणसी, चंदौली और मीरजापुर के जिलाधिकारी सहित अन्य अधिकारियों से बातचीत चल रही है। इन जिलों में किसानों से भी कई बार वार्ता हो चुकी है। फिलहाल करीब 20 एकड़ जमीन ही उपलब्ध हो पाई है।

    वाराणसी से कोलकाता के लिए रूट

    बनारस से गाजीपुर, बक्सर, पटना, बाढ़, मोकामा, मुंगेर, भागलपुर, साहेबगंज, फरक्का, बंगाल, बेहरमपुर, कल्यानी होते कोलकाता।