500 साल पहले अकबर के समय बंद हो गई परिक्रमा का जूना अखाड़ा करेगा आयोजन, 5-8 जनवरी को होगी परिक्रमा
पौष पूर्णिमा पर श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़ा के आचार्यमहामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरि महाराज वाराणसी पहुंचे। श्रीमृत्युंजय मठ में उनका स्वागत हुआ, जिस ...और पढ़ें

बैठक में धार्मिक परंपराओं और आगामी आयोजनों पर चर्चा हुई, जिसमें 500 साल पुरानी प्रयागराज परिक्रमा को पुनः शुरू करने की योजना बनी।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। पौष पूर्णिमा के अवसर पर काशी में श्रीपंचदशनाम जूना अखाड़ा के आचार्यपीठ “श्रीमृत्युंजय मठ” पर आचार्यमहामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानन्द गिरि महाराज का आगमन हुआ। उनके काशी पहुंचते ही साधु-संतों और श्रद्धालुओं में उत्साह का वातावरण देखने को मिला। हनुमानघाट स्थित श्रीमृत्युंजय मठ में साधक-समूह द्वारा विधिवत स्वागत एवं अभिनंदन किया गया।
पूर्णिमा की पूर्व संध्या पर श्रीमृत्युंजय मठ में भगवान मृत्युञ्जय की विशेष उपासना एवं आराधना की गई। इस दौरान बड़ी संख्या में नागा संन्यासी और साधु-संत काशी पहुंचे, जिससे आध्यात्मिक वातावरण और भी दिव्य हो गया। स्वामी अवधेशानन्द गिरि ने काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचकर बाबा विश्वनाथ के दर्शन-पूजन किए तथा संकटमोचन हनुमान मंदिर में भी मत्था टेककर लोककल्याण और राष्ट्र की सुख-समृद्धि की कामना की।

इसके पश्चात जूना अखाड़े के मुख्यालय बड़ा हनुमान घाट पर अखाड़े की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित हुई, जिसमें अखाड़े के वरिष्ठ साधु-संत एवं पदाधिकारी शामिल हुए। बैठक में धार्मिक परंपराओं, साधना पद्धतियों और आगामी आयोजनों पर चर्चा की गई। इस अवसर पर जूना अखाड़े के वरिष्ठ सभापति पूज्य महंत प्रेम गिरि महाराज सहित कई प्रमुख पदाधिकारी उपस्थित रहे।
अखाड़ा परिषद के महामंत्री एवं जूना अखाड़ा के संरक्षक पूज्य स्वामी हरिगिरि जी महाराज के निर्देशन में पश्चिम बंगाल से आई संत-मंडली के साथ शिष्टाचार भेंट एवं संवाद भी हुआ। संवाद में सनातन धर्म की परंपराओं, समाज में साधु-संतों की भूमिका और लोकहित के विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।

स्वामी अवधेशानन्द गिरि ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में काशी में श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन द्वारा व्यापक इंतजाम किए गए हैं। सुरक्षा, यातायात, स्वच्छता और दर्शन व्यवस्था को सुचारु बनाए जाने से देश-विदेश से आए श्रद्धालु शांतिपूर्वक दर्शन कर रहे हैं।
5-8 जनवरी को हरिगिरी महाराज प्रयागराज में परिक्रमा निकाले जाने की योजना है। यह परिक्रमा 500 साल पहले अकबर के समय बंद हो गई थी, जिसे जूना अखाड़ा पुनः शुरू कर रहा है। बैठक में चर्चा हुई कि इसे सफल बनाया जाएगा और बड़ी संख्या में नागा साधु संन्यासी शामिल होंगे। स्वामी अवधेशानन्द गिरि का काशी आगमन और जूना अखाड़े की गतिविधियाँ धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही हैं।

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