वाराणसी, [देवव्रत त्रिवेदी]।  बनारस रेल खंड को जल्द ही मालगाडिय़ों से निजात मिल सकती है। रेल मंत्रालय ने एक अहम फैसले में कैंट स्टेशन से गुजरने वाली मालगाडिय़ों के लिए विशेष रूट बनाने का फैसला किया है। इस रूट से गुड्स ट्रेनों  को काशी होकर इलाहाबाद से गुजर रहे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर रूट में मिला दिया जाएगा। इसके लिए डीएफसी रूट का विस्तार कर कैंट स्टेशन से जोड़ा जाएगा। डीएफसी के इन निर्माण कार्यों को उत्तर रेलवे व पूर्व मध्य रेलवे द्वारा किया जाएगा। इस योजना को पांच साल में पूरा करने की योजना है। उत्तर रेलवे मंडल के 12.48 किलोमीटर के हिस्से में दोहरी लाइन बिछाई जाएगी। इसी के साथ ही गंगा नदी पर कुल 1700 मीटर का पुल बनाया जाएगा। दो रेल लाइन वाला ये पुल मालवीय ब्रिज के समानांतर बनेगा।

डेडिकेटेड रूट में शामिल होने के बाद काशी स्टेशन को फीडर स्टेशन के तौर पर विकसित किया जाएगा। गंगा नदी के किनारे बने स्टेशन पर यात्री सुविधाओं के विस्तार के अलावा यार्ड री-मॉडलिंग भी की जाएगी। अभी तक कैंट स्टेशन से  मालगाडिय़ों की संख्या :: 40 अप व 40 डाउन रूट।

ये रहेगा मालगाडिय़ों का रूट

कैंट से इलाहाबाद वाया डेडिकेटेड फ्रेट रूट जाने के लिए ट्रेनें काशी स्टेशन, बाबा भगवान राम हॉल्ट, व्यासनगर, ब्लाक हट-बी से जीवनाथपुर होते हुए चुनार जंक्शन से होकर दादरी-डांकुनी फ्रेट रूट में मिल जाएंगी।

जीवनाथपुर से रामनगर तक बनेगी 16 किलोमीटर लंबी रेल लाइन : फ्रेट रूट को भविष्य में मल्टी मॉडल टर्मिनल से जोडऩे की योजना है। दोनों प्वाइंट को जोडऩे के लिए 16 किलोमीटर लंबी रेल लाइन बिछाई जाएगी। इस रेलखंड पर रामनगर टर्मिनल पर जलमार्ग से आने वाले फ्रेट को मालगाड़ी से आगे ले जाया जाएगा।

कैंट स्टेशन (वाराणसी रेल खंड)  को डेडिकेटेड को इलाहाबाद के मुख्य फ्रेट रूट से जोडऩे की योजना बन चुकी है। नई रेल लाइन व पुल का डिजाइन मुख्यालय में तैयार किया जा रहा है।

 -अजीत मिश्रा, मुख्य परियोजना प्रबंधक, डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर काउंसिल ।

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