VIDEO : वाराणसी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर अंकिता खुद फोन छीनने वाले के घर आधी रात जा पहुंचीं, पुलिस की भूमिका पर उठे गंभीर सवाल
सॉफ्टवेयर इंजीनियर अंकिता गुप्ता ने वाराणसी में अपना चोरी हुआ आईफोन खुद ट्रेस कर चोर के घर तक पहुंचीं। पुलिस की निष्क्रियता के बावजूद, उन्होंने अस्सी ...और पढ़ें
जागरण संवाददाता, वाराणसी। बनारस ठगों के लिए फेमस था लेकिन पर्यटकों की बाढ़ आने के बाद अब उचक्कों और चोरों की पौ बारह है। साथ ही लचर पुलिसिंंग से पर्यटकों के साथ दुर्घटना के बाद उनका अहयोगात्मक रवैया भी काफी चर्चा में है। कुछ ऐसा ही मामला बीते दिनों सामने आया सॉफ्टवेयर इंजीनियर अंकिता के साथ, जिन्होंने वाराणसी पुलिस को आईना दिखाया और अस्सी घाट पर मोबाइल चोर गिरोह को बिना पुलिस के सहयोग के ही बेनकाब किया।
अस्सी घाट से दो लाख रुपये कीमत का आई फोन छीने जाने के बाद वह खुद तकनीक के सहारे आधी रात चोर के घर जा पहुंचीं। हालांकि पुलिस ने रात में औपचारिकता भर का काम किया तो चोर के पास 20 कीमती फोन बरामद हुए।
दरअसल काशी की पहचान केवल आध्यात्मिक शहर के तौर पर ही नहीं बल्कि देश विदेश के सात करोड़ से अधिक पर्यटक प्रति वर्ष अब आ रहे हैं। इस बार नववर्ष और छुट्टियों के दौरान अस्सी घाट पर हुई एक घटना ने पर्यटन सुरक्षा और पुलिसिंग के दावों की कलई खोल दी। इस बार मोबाइल चोरों के एक संगठित गिरोह का पर्दाफाश किसी विशेष पुलिस के कार्यशैली से नहीं बल्कि सॉफ्टवेयर इंजीनियर पर्यटक अंकिता गुप्ता के प्रयासों से संभव हो सका।
दरअसल, मुंबई के घाटकोपर निवासी उमेश गुप्ता की पुत्री अंकिता गुप्ता पेशे से सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं। वह नया साल मनाने के लिए बनारस भ्रमण पर आई हुईं थीं। बीते सोमवार की शाम को अस्सी घाट क्षेत्र में भीड़ का फायदा उठाकर एक चोर उनका करीब दो लाख रुपये कीमत का आई फोन मोबाइल छीनकर फरार हो गया। इस समय घाट पर पर्यटकों की संख्या काफी होने की वजह से वह उचक्का तो फरार होने में सफल रहा और सुरक्षा के नाम में नरमी का उसे पूरा फायदा मिला।
घटना के तुरंत बाद अंकिता ने भेलूपुर थाने को इस घटना की सूचना दी। अपनी पुरातन कार्यशैली के मुताबिक ही पुलिस ने फोन को छिनैती में न दर्ज कर गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कर ली, लेकिन इसके बाद जांच की गति वहीं थम गई। हालांकि पीड़िता ने मोबाइल का बिल, दस्तावेज, आईएमईआई नंबर और अन्य जरूरी जानकारी पुलिस को सौंप दी, बावजूद इसके पुलिस ने लोकेशन ट्रेस करना तो दूर कोई भी सक्रियता दिखाने की जहमत तक नहीं उठाई। पुलिस को अत्याधुनिक तकनीक और संसाधन उपलब्ध कराने के दावों की कलई खुलते देख सॉफ्टवेयर इंजीनियर ने खुद मोर्चा संभाला।
पुलिस की उदासीनता से निराश अंकिता ने मोबाइल के आईएमईआई नंबर को एक एप के जरिए ट्रेस किया। मोबाइल की लोकेशन लगातार एक ही स्थान पर दिखाई देती रही। फोन की तलाश करते-करते रात करीब दो बजे अंकिता खुद ही उस लोकेशन पर पहुंच गईं और अकेले ही वहीं डटी रहीं। हस्तक्षेप के बाद पुलिस काफी देर से मौके पर पहुंची, लेकिन वहां भी पुलिस ने मात्र कोरमबाजी ही की।
अंकिता के अनुसार मोबाइल की लोकेशन रातभर उसी स्थान पर जस की तस बनी रही। मंगलवार सुबह करीब पांच बजे अंकिता दोबारा उसी जगह पर पहुंच गईं। इस बार आसपास के लोग भी वहां पर अंकिता के साहस को देखकर जुट गए। स्थानीय लोगों ने बताया कि संदिग्ध युवक चांदपुर चौराहा, जीटी रोड स्थित मकान मालिक राजेंद्र पटेल के यहां किराये पर कुछ समय से रह रहा था।
जब मकान मालिक ने कमरे का ताला खुलवाया तो चोर मौके से फरार हो चुका था, लेकिन कमरे के अंदर का नजारा चौंकाने वाला था, वहां 15 से 20 महंगे मोबाइल फोन पड़े हुए थे। अंकिता ने मौके पर ही अपने आई फोन की पहचान कर ली और लाक खोलकर फोन की पुष्टि की।
अब पुलिस को सूचना दी गई तो वह मौके पर पहुंची और सभी मोबाइल फोन को कब्जे में लिया। यदि पुलिस रात को कार्रवाई करती तो पर्यटक को आधी रात को परेशान न होना पड़ता और पुलिस को भी चोर मौके पर मिल जाता। स्थानीय लोगों के अनुसार अस्सी घाट, दशाश्वमेध और आसपास के इलाकों में मोबाइल चोरी की घटनाएं कोई नई बात नहीं हैं। रोजाना यहां पर मोबाइल फोन चोरी आम हो चुकी है, लेकिन पुलिस की हीलाहवाली से उचक्कों के हौसले बुलंद हैं।
अंकिता गुप्ता के साहस की वजह से एक मोबाइल चोर गिरोह का पर्दाफाश हुआ लेकिन बनारस की पुलिस की कार्यशैली ने एक बार फिर से पुलिसिया ढंग पर सवाल खड़ा किया है। एक नागरिक को खुद ही पहल करके अपने लिए इंसाफ पाने की कोशिश ने जताया है कि आम नागरिक को खुद पर अधिक भरोसा करना चाहिए क्योंकि पुलिस अपनी पुलिसिंंग भूल चुकी है। अंकिता गुप्ता ने अपने प्रयास से यह साबित किया है कि पुलिस पर भरोसे से पहले खुद पर भरोसा कहीं अधिक जरूरी है।

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