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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 27, 2022 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Varanasi News महाशिवरात्रि पर वारणसी में शिव-पार्वती विवाह उत्सव, काशी विश्वनाथ की रजत प्रतिमा का हुआ तिलक

By Saurabh ChakravartyEdited By:
Published: Sun, 27 Feb 2022 08:21 PM (IST)

Shiv-Parvati marriage festival महाशिवरात्रि पर शिव-पार्वती विवाह के उत्सव का क्रम रविवार से विश्वनाथ मंदिर के महंत आवास पर भी ...और पढ़ें

वाराणसी में महंत आवास पर बाबा के रजत विग्रह का प्रतीक आगमन हुआ। संध्याबेला में शिव को हल्दी लगाई गई।
वाराणसी में महंत आवास पर बाबा के रजत विग्रह का प्रतीक आगमन हुआ। संध्याबेला में शिव को हल्दी लगाई गई।

वाराणसी, जागरण संवाददता। महाशिवरात्रि पर शिव-पार्वती विवाह के उत्सव का क्रम रविवार से विश्वनाथ मंदिर के महंत आवास पर भी आरंभ हो गया। टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास पर बाबा के रजत विग्रह का प्रतीक आगमन हुआ। संध्याबेला में शिव को हल्दी लगाई गई। बाबा को ठंडई, पान और मेवे का भोग लगाया गया।

इसके पूर्व बसंत पंचमी पर बाबा श्री काशी विश्वनाथ की प्रतिमा  तिलकोत्सव हुआ था। हल्दी की रस्म के लिए गवनहिरयों की टोली संध्या बेला में महंत आवास पहुंची।सायंकाल बाबा का संजीव रत्न मिश्र ने विशेष राजसी-स्वरूप में श्रृंगार कर आरती व भोग लगाया एक तरफ मंगल गीतों का गान हो रहा था दूसरी तरफ बाबा को हल्दी लगाई जा रही थी। बाबा के तेल-हल्दी की रस्म महंत डा. कुलपति तिवारी के सानिध्य में हुई। मांगलिक गीतों से महंत आवास गुंजायमान हो रहा था। ढोलक की थाप और मंजीरे की खनक के बीच शिव-पार्वती के मंगल दाम्पत्य की कामना पर आधारित गीत गाए गए।

'पहिरे ला मुंडन क माला मगर दुल्हा लजाला...’, ‘दुल्हा के देहीं से भस्मी छोड़ावा सखी हरदी लगावा ना...’,'शिव दुल्हा के माथे पर सोहे चनरमा...’,‘ अड़भंगी क चोला उतार शिव दुल्हा बना जिम्मेदार’, और भोले के हरदी लगावा देहिया सुंदर बनावा सखी...’ आदि हल्दी के पारंपरिक शिवगीतों में दुल्हे की खूबियों का बखान किया गया। साथ ही दूल्हन का ख्याल रखने की ताकीद भी की जा रही थी। मंगल गीतों में यह चर्चा भी की गई कि विवाह के लिए तैयारियां कैसे की जा रही हैं। नंदी, सृंगी, भृंगी आदि गण नाच नाच कर सारा काम कर रहे हैं। शिव का सेहरा और पार्वती की मौरी कैसे तैयार की जा रही है। हल्दी की रस्म के बाद नजर उतारने के लिए ‘साठी क चाऊर चूमिय चूमिय..’ गीत गाकर महिलाओं ने भगवान शिव की रजत मूर्ति को चावल से चूमा। इसके उपरांत शिवांजलि के अंतर्गत पुनीत पागल, सजय दूबे, प्रियंका पांडेय और रीता शर्मा ने शिव भजनों की प्रस्तुति की।