वाराणसी, जेएनएन। कोरोना काल में ज्यादातर लोग अब जैविक और मोटे अनाज का प्रयोग करना शुरू कर दिए हैं। प्राकृतिक और मोटे अनाज पोषक तत्वों से भरपूर होने के साथ ही इम्युनिटी सिस्टम को भी बढ़ाते हैं। भूख को कम करने के लिए रागी यानी मडुवा में पाए जाने वाला ट्रिप्टोफनएमिनो एसिड की अहम भूमिका है। इससे भूख का अहसास नहीं हो पाता है। रागी को सुबह नाश्ते में खाना चाहिए। इसको खाने के बाद दिनभर भूख नहीं लगती क्योकि इसमें उच्च मात्रा में फाइबर एवं प्रोटीन होती हैं जो लम्बे समय तक हमारे पेट को भरा रखता है।

रागी लस मुक्त होने के अलावा, फाइबर युक्त है जो मधुमेह और दिल को स्वस्थ रखने के लिए अच्छा है। खास बात यह कि रागी का आटा गेहूं के आटे की तुलना में रक्त शर्कराके स्तर में बहुत कम वृद्धि करता है। रागी मैग्नीशियम से समृद्ध है जो इंसुलिन प्रतिक्रिया को बेहतर बनाता है। आज जीवनशैली ऐसी हो चली है कि हम जाने अनजाने में कई प्रकार की बीमारियों से घिर गए हैं। जैविक खान-पान को अपनाकर हम बहुत सी बीमारियों से बच सकते हैं। रागी को खाने के कई उपाय है जैसे रागी का आटा, साबुत रागी, अन्य अनाजों के आटे के साथ मिश्रण कर भी इसका सेवन किया जाता है।

रागी में प्रोटीन और फाइबर के अलावा कई प्रकार के लाभदायक पोषक तत्व हैं। इसमें प्रोटीन, फाइबर, फॉस्टोरस, मैग्नीशियम और लौह तत्व भी उच्च मात्रा में पाया जाता है। भारतीय राष्ट्रीय पोषण संस्थान के अनुसार, 100 ग्राम रागी में लगभग 345 मिलीग्राम तक का कैल्शियम पाया जाता है। इसमें वसा न के बरारबर होती है। रागी में करीब 335 कैलोरी ऊर्जा होती है। इसके अलावा 5 से 8 प्रतिशत तक प्रोटीन करीब 2 प्रतिशत ईथर के अर्क तथा 64 से 75 प्रतिशत तक कार्बोहाइड्रेट, 14 से 20 प्रतिशत तक फाइबर और 2.4 से 3.5 प्रतिशत तक खनिज पाये जाते हैं। रागी भोजन के पचने की गति को कम करता है जिससे शूगर की मात्रा नियंत्रित रहती है। रागी खाने से कोलेस्ट्रोल की मात्रा कम होती है। एमिनो एसिड लिवर से अतिरिक्त मात्रा में जमा वसा को निकाल देता है। आर्गेनिक हाट करौंदी में जैविक खाद्य पदार्थ के साथ ही रसायनमुक्त मोटे अनाज उपलब्ध हैं।

कैसे खाएं रागी

- रागी को भिगोकर अंकुरित कर खा सकते हैं। 

- रागी का दलिया या रोटी बनाकर भी प्रयोग कर सकते हैं।

- रागी के आटे का इडली व कुलचा में भी प्रयोग करें।

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