Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck

    वाराणसी में सपाई को छुड़ाने के लिए भाजपा के पदाधिकारियों ने थाने पर दे दिया धरना, जान लें पूरा प्रकरण

    By Abhishek sharmaEdited By: Abhishek sharma
    Updated: Sun, 04 Jan 2026 01:45 PM (IST)

    वाराणसी के कोरौता गांव में सरकारी जमीन पर बुद्ध बिहार पार्क बनाने को लेकर विवाद हुआ। ग्राम प्रधान दिनेश पटेल (सपा) को पुलिस ने मिट्टी गिराने से रोकने ...और पढ़ें

    जागरण संवाददाता, वाराणसी (लोहता)। थाना क्षेत्र के कोरौता गांव में एक सरकारी जमीन पर ग्राम प्रधान द्वारा जबरन बुद्ध बिहार पार्क बनाने के लिए मिट्टी गिराने का प्रयास किया गया। जब पुलिस ने इस कार्य को रोकने का प्रयास किया, तो ग्राम प्रधान ने उनकी बात नहीं मानी, जिसके परिणामस्वरूप पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया।

    इस घटना की सूचना मिलते ही गांव के भाजपा पदाधिकारी, जिनमें ब्लाक प्रमुख प्रतिनिधि प्रवेश पटेल, भानुशंकर पटेल, प्रमोद पटेल, सर्वेश पटेल, आनंद पटेल, अभय पटेल, धीरज साहू आदि शामिल थे, लोहता थाने पर पहुंच गए और धरना प्रदर्शन करने लगे।

    ग्राम प्रधान दिनेश पटेल समाजवादी पार्टी (सपा) से जुड़े हुए बताए जाते हैं। धरने के दौरान भाजपा के कार्यकर्ताओं ने चक्का जाम कर दिया, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई। जाम की सूचना पाकर एसपी रोहनिया राजीव शर्मा मौके पर पहुंचे और स्थिति को सामान्य करने का प्रयास किया। काफी समझाने के बाद और प्रधान को निजी मुचलके पर छोड़ने के बाद जाम समाप्त हुआ। यह धरना लगभग दो घंटे तक चला।

    sp1

    पुलिस ने पहले से ही प्रधान सहित कई लोगों को पाबंद किया था, ताकि स्थिति को नियंत्रण में रखा जा सके। इस दौरान एसीपी रोहनिया संजीव शर्मा, रोहनिया थाना प्रभारी राजू सिंह, लोहता थाना प्रभारी राजबहादुर मौर्य समेत भारी संख्या में पुलिस बल मौजूद रहा।

    ग्राम प्रधान द्वारा सरकारी जमीन पर पार्क बनाने का प्रयास न केवल कानून का उल्लंघन है, बल्कि यह स्थानीय प्रशासन के आदेशों की अवहेलना भी है। पुलिस ने इस मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रधान को हिरासत में लिया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि प्रशासन इस प्रकार के अवैध निर्माण को बर्दाश्त नहीं करेगा।

    भाजपा के पदाधिकारियों का सपाई के ल‍ि‍ए धरना इस बात का संकेत है कि राजनीतिक दलों के बीच स्‍थानीय मुद्दे को लेकर कोई गहरी खाई नहीं है। भाजपा के कार्यकर्ताओं ने प्रधान को छुड़ाने के लिए जो धरना दिया, वह इस बात का प्रमाण है कि राजनीतिक समर्थन अपनी जगह और स्‍थानीय मामले अपनी जगह।

    sp2

    स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी जमीन पर इस प्रकार का निर्माण और पुल‍िस का दखल होना सि‍यासी रूप ले रहा था। लोगों ने प्रशासन से मांग क‍िया क‍ि व‍िकास कार्यों को लेकर उसे खुद पहल करनी चाह‍िए। 

    इस घटना ने यह भी साबित क‍िया है कि राजनीतिक दलों के बीच की प्रतिस्पर्धा कभी-कभी स्थानीय मुद्दों पर एक भी कर देती है। ग्राम प्रधान का सपा से जुड़ाव और भाजपा का विरोध इस बात का संकेत है कि राजनीति में स्थानीय मुद्दों का कितना महत्व है।

    इस घटना के बाद, यह स्पष्ट भी हुआ है क‍ि दलगत राजनीत‍ि की जगह आपसी समन्वय की आवश्यकता है, ताकि इस प्रकार की समस्याओं का समाधान किया जा सके। बुद्ध बिहार पार्क के निर्माण का मामला न केवल एक स्थानीय मुद्दा है, बल्कि यह राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के बीच एक साथ होने का भी प्रतीक है।