वाराणसी में सावित्री बाई फुले की जयंती पर विचार गोष्ठी का सपा कार्यालय में हुआ आयोजन
समाजवादी पार्टी के वाराणसी जिला कार्यालय में सावित्रीबाई फुले की जयंती धूमधाम से मनाई गई। इस अवसर पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन हुआ, जिसमें उनके जीवन और ...और पढ़ें

जिला प्रवक्ता संतोष यादव बबलू ने सावित्रीबाई फुले को भारत की पहली महिला शिक्षिका और समाज सुधारक बताया।
जागरण संवाददाता, वाराणसी। समाजवादी पार्टी के जिला कार्यालय अर्दली बाजार में "भारत में महिला शिक्षा की ज्योति जला महिला सशक्तीकरण का मार्ग प्रशस्त करने वाली महान समाज सेविका, देश की प्रथम महिला शिक्षिका सावित्रीबाई फुले" की जयंती धूमधाम से मनायी गयी। इस अवसर पर उनके जीवन और उनके योगदान पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित पार्टी के नेताओं ने सावित्री बाई फुले के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए जिला प्रवक्ता संतोष यादव बबलू एडवोकेट ने कहा कि जिस समय महिलाओं की शिक्षा लगभग असंभव थी, उस समय सावित्रीबाई फुले ने न केवल महिलाओं को शिक्षा प्रदान की, बल्कि समाज में व्याप्त कुरीतियों के खिलाफ भी संघर्ष किया। सावित्रीबाई फुले भारत की पहली महिला शिक्षिका, समाज सुधारक और कवयित्री थीं, जिन्होंने 19वीं सदी में रूढ़िवादिता, जातिवाद और लिंगभेद के खिलाफ आवाज उठाई। उनके प्रयासों से न केवल लड़कियों की शिक्षा के द्वार खुले, बल्कि सामाजिक परिवर्तन की दिशा भी बदली।
सावित्रीबाई फुले का जीवन हमें यह सिखाता है कि शिक्षा ही सशक्तीकरण का आधार है। उनके द्वारा स्थापित शिक्षण संस्थाओं ने न केवल महिलाओं को शिक्षा दी, बल्कि समाज में जागरूकता भी फैलायी। इस प्रकार, सावित्रीबाई फुले का योगदान आज भी प्रासंगिक है और हमें उनके आदर्शों का अनुसरण करना चाहिए। इस कार्यक्रम के माध्यम से समाजवादी पार्टी ने सावित्रीबाई फुले के प्रति अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके विचारों को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।
कार्यक्रम का संचालन गोपाल पाण्डेय ने किया। इस अवसर पर प्रमुख रूप से उपस्थित व्यक्तियों में उमेश प्रधान, चंद्रशेखर सिंह, अखिलेश यादव, हीरू यादव, काली प्रसाद गौड़, रामकुमार यादव, धर्मवीर पटेल, राजेंद्र प्रसाद, सुशील विश्वकर्मा, अशोक यादव, विनोद सिंह, अयाज खान, योगेन्द्र कुमार, अमेरिका मास्टर, राजू यादव, विनोद शुक्ला आदि शामिल थे। सभी ने सावित्रीबाई फुले के योगदान पर अपने विचार व्यक्त किए और उनके कार्यों को सराहा।

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