होली से पहले तीन गुणा तक बढ़ी दूध की खपत, जमकर हो रही मिलावटखोरी; घर पर इस तरह करें नकली दुग्ध-खोया की पहचान
How To Check Purity Of Milk त्योहारों पर दूध की मांग बढ़ने से मिलावट का खतरा भी बढ़ जाता है। मिलावटी दूध सेहत के लिए हानिकारक होता है। होली के त्योहार के पहले ही तीन गुणा तक दूध की खपत बढ़ गई है। साथ ही खोया की भी भारी डिमांड है। जानिए कैसे करें मिलावटी दूध की पहचान और कैसे बचें मिलावट से।

जागरण संवाददाता, उन्नाव। त्योहारों पर परंपरागत व्यंजन हमारी पहचान है। जब बात व्यंजन की होती है, तो दूध का उपयोग स्वाभाविक है। यानी मांग बढ़ जाती है। यदि यह त्योहार सहालग के समय हो तो मांग और भी अधिक होती है। जैसा कि इन दिनों है भी। सीमित उत्पादन और दो से तीन गुणा अधिक होने पर दूध की उपलब्धता कहीं न कहीं कुछ गड़बड़ होने के संकेत देता है।
सहालग चल रही है, साथ में होली की तैयारी भी शुरू हो गई है। इसी मांग को देखते हुए मिलावट खोर भी सक्रिय हैं। दूध में पानी की मिलावट तो आम बात है, इसके अलावा बाजार में पहुंचने वाला दूध यूरिया, डिटर्जेंट, सोडा और स्टार्च का प्रयोग करके तैयार किया जा रहा है। जिसकी पहचान कर पाना सामान्य व्यक्ति के लिए आसान नहीं है। ऐसे में सावधानी के साथ जानकारी होना भी जरूरी है।
त्योहार और सहालग के कारण इन दिनों भी दूध की मांग उत्पाद से तीन गुणा तक बढ़ गई है। जबकि, उत्पादन सीमित है। जिससे उत्पादक सबसे पहले अपने नियमित खरीदार को संतुष्ट करता है। जो बचता है उसे बाजार पहुंचाता है।
बाजार और घरेलू आपूर्ति वाले दूध में मिलावट अधिक
नतीजा प्रतिदिन जो दूध सामान्य दिनों में आता था वहीं उपलब्ध है। इसके बाद भी जितनी आवश्यकता हो उतना दूध उपलब्ध होता है। जो बिना मिलावटी दूध के संभव नहीं है। इस बात का अंदाजा लगाना फिलहाल मुश्किल नहीं है। मांग बढ़ने से कीमत भी बढ़ रही हैं। दूसरी तरफ दूध खरीदने वाली निजी कंपनी जांच के बाद ही दूध खरीदती हैं इससे उसमें मिलावटी दूध खपाना मुश्किल है।

यानी बात साफ है कि बाजार और घरों में ही इसे खपाया जाना संभव व आसान है। ऐसे में स्वयं जागरूक होने पर ही बचाव संभव है। जिसके लिए खरीदारी करने से पहले सामान को अच्छी तरह से जांचना परखना होगा। लेकिन होली से पहले बाजार में सजी मुनाफा खोरा का सिंडीकेट को तोड़ पाना फिलहाल किसी चुनौती से कम नहीं है। मिलावटी खाद्य सामग्री का सेवन सेहत पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।
1.35 लाख लीटर उत्पादन तीन लाख से अधिक की खपत
जिले में यदि दुग्ध उत्पादन के आंकड़ों पर यदि गौर किया जाए तो डेरी, पशुपालकों आदि के माध्यम से जिले में करीब 1.35 लाख लीटर दूध का प्रतिदिन उत्पादन होता है। इसमें से सहकारी संघ पराग करीब 11 हजार लीटर दूध खरीदता है। इसके अलावा कई निजी कंपनियां बड़े पैमाने पर यहां से करीब 80 हजार लीटर से अधिक दूध खरीदते हैं। शेष लगभग 45 हजार लीटर दूध पशुपालक स्वयं या दूधियों के माध्यम से बाजार पहुंचाते हैं। जिससे घरेलू उपयोग के अलावा पनीर, छेना, खोवा, दही आदि में खपत किया जाता है।
इन दिनों सहालग के साथ होली के कारण इसकी मांग तीन गुना तक बढ़ गई है। यानी करीब तीन लाख लीटर से अधिक दूध की प्रतिदिन आवश्यकता है। जबकि उत्पादन सीमित है। ऐसे में मिलावट से कैसे इन्कार किया जा सकता है।
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी, शैलेंद्र कुमार दीक्षित ने बताया
त्योहार को देखते हुए मिलावट की संभावना अधिक रहती है। इस लिए हम लोग इस बार पांच दिवसीय अभियान चला कर मिलावट वाले श्रोत का पता लगा रहे हैं। ताकि इसपर प्रभावी अंकुश लगाया जा सके। बाजारों में सैंपलिंग की प्रक्रिया भी लगातार जारी है।
जिले में प्रतिदिन औसतन दुग्ध उत्पादन व खपत
दुग्ध उत्पादन - 1.35 लाख लीटर
दुग्ध कंपनी व समितियां क्रय करती हैं - 90 हजार लीटर
फुटकर दुग्ध की घरेलू आपूर्ति - 25 हजार लीटर
पनीर, खोवा, छेना आदि में खपत - 15 हजार लीटर
दही व अन्य में खपत - 5 हजार लीटर
यह जानना है जरूरी
शुद्ध दूध में वसा और एसएनएफ (सोलिड नाट फैट)
भैंस के दूध में 6 प्रतिशत वसा, 8.5 प्रतिशत एसएनएफ होता है।
गाय के दूध में 3 प्रतिशत वसा, 8 प्रतिशत एसएनएफ होता है।
मिश्रित दूध में 4.5 प्रतिशत वसा, 8.5 प्रतिशत एसएनएफ होता है।
सपरेटा में 0 प्रतिशत वसा, 8 प्रतिशत एसएनएफ होता है।
मिलावटी व नकली दूध की कैसे करें जांच
यूरिया परीक्षण : परखनली में 5 एमएल दूध में 5 एमएल पैराडाई मिथाइल एंनो वेंजल्डिहाइड घोल डाल कर हिलाने पर पीला रंग होता है, तो दूध में यूरिया है।
डिटर्जेंट का परीक्षण : परखनली में 5 एमएल दूध में दो बूंद ब्रोमोक्रिसाल पर्पल का घोल डाल कर हिलाने पर दूध का रंग हल्का नीला हो जाए तो इसमें डिटर्जेंट है।
सोडा परीक्षण : परखनली में 5 एमएल दूध में 5 एमएल अल्कोहल मिलाने के बाद घोल में 2 से 5 बूंद रोजिक एसिड के घोल को डाल कर हिलाने पर गुलाबी रंग आता है तो उसमें सोडा है।
स्टार्च परीक्षण : एक परखनली में 5 एमएल दूध उबाल कर ठंडा होने के बाद 5 बूंद आयोडीन डाल कर हिलाएं नीला रंग हो जाने पर स्टार्च की पुष्टि होती है।
घर पर कैसे करें पहचान
दूध को सतह पर डाला जाए, यदि उसमें पानी मिला होगा तो तेजी के साथ बहता हुआ जायेगा। यदि मिलावट नहीं की गई है, तो सतह पर धीरे-धीरे बहेगा और सतह पर सफेद लकीर बनती जायेग
दूध को हिला कर देखें यदि उसमें डिटर्जेंट मिलाया गया है तो झाग बनेगा और पानी छोड़ देगा।
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