यूपी में मौसम बदलते ही प्रदेश में बिजली की मांग ने किया 23 हजार मेगावाट का आंकड़ा पार
दिसंबर में कड़ाके की ठंड और शीतलहर के कारण उत्तर प्रदेश में बिजली की मांग में अप्रत्याशित वृद्धि हुई है। 31 दिसंबर को यह मांग 23070 मेगावाट तक पहुंच ग ...और पढ़ें

विद्युत उपकरणों के उपयोग में इजाफा होने से प्रदेश में बिजली की मांग में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई।
जागरण संवाददाता, ओबरा (सोनभद्र)। दिसम्बर माह के अंतिम दिनों में प्रदेश भर में पड़ी कड़ाके की ठंड और शीतलहर ने आम जनजीवन के साथ-साथ बिजली व्यवस्था पर भी गहरा असर डाला है। ठंड बढ़ते ही हीटर, ब्लोअर, गीजर सहित अन्य विद्युत उपकरणों के उपयोग में इजाफा होने से प्रदेश में बिजली की मांग में अप्रत्याशित वृद्धि दर्ज की गई।
यह वृद्धि इस सीजन की अब तक की अधिकतम मांग के रूप में सामने आई है। जिसने बिजली प्रबंधन की चुनौतियों को और बढ़ा दिया है। पिछले चार दिनों से प्रदेश में बिजली की मांग लगातार बढ़ रही थी, जो 31 दिसम्बर की देर शाम अपने चरम पर पहुंच गई। शाम सात बजकर 18 मिनट पर प्रदेश की कुल बिजली की मांग 23 हजार मेगावाट का आंकड़ा पार करते हुए 23070 मेगावाट दर्ज की गई। यह आंकड़ा इस शीतकालीन सीजन की अब तक की सर्वाधिक मांग माना जा रहा है।
जानकारों के अनुसार ठंड के मौसम में आमतौर पर बिजली की मांग में वृद्धि होती है, लेकिन इस बार मांग में आई तेज उछाल ने बिजली प्रबंधन को चौंका दिया। बिजली मांग में इस अप्रत्याशित बढ़ोतरी के दौरान प्रदेश की कई तापीय विद्युत इकाइयां वार्षिक अनुरक्षण कार्य और तकनीकी गड़बड़ियों के कारण फिलहाल बंद पड़ी हैं। जिससे उपलब्ध उत्पादन क्षमता प्रभावित हुई है। ऐसे में बढ़ती मांग और सीमित आपूर्ति के बीच संतुलन बनाए रखना बिजली प्रबंधन के लिए बड़ी चुनौती बनता जा रहा है।
ऐसे में प्रदेश सरकार और ऊर्जा विभाग द्वारा बंद पड़ी इकाइयों को जल्द से जल्द चालू करने पर जोर दिया जा रहा है। अनुरक्षण कार्य को शीघ्र पूरा कर तकनीकी खामियों को दूर करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि उत्पादन क्षमता बढ़ाई जा सके और बढ़ती मांग को सुचारु रूप से पूरा किया जा सके। इसके साथ ही अन्य राज्यों से बिजली की खरीद और लोड मैनेजमेंट जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा रहा है। साथ ही उपभोक्ताओं से भी अपील की जा रही है कि वे अनावश्यक बिजली खपत से बचें और ऊर्जा का विवेकपूर्ण उपयोग करें।

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