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    जेल में दोस्ती और फिर चार राज्यों से 1200 वाहन किए चोरी, आठ हजार में बाइक व 25 हजार में बेचते थे कार, तीन गिरफ्तार

    By Abhishek Kaushik Edited By: Praveen Vashishtha
    Updated: Fri, 02 Jan 2026 06:50 AM (IST)

    Shamli News: शामली में पुलिस ने एक अंतरराज्यीय वाहन चोर गिरोह का भंडाफोड़ किया है। अलवर जेल में दोस्ती के बाद तीन आरोपितों ने पांच साल में 1200 से अधि ...और पढ़ें

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    पुलि‍स गिरफ्त में आरोपि‍त

    जागरण संवाददाता, शामली। छह साल पहले राजस्थान के अलवर में जेल में हुई दोस्ती के बाद दो आरोपितों ने एक अन्य साथी के साथ मिलकर पांच सालों में 1200 से अधिक वाहनों को चोरी कर बेच दिया।

    वारदात को अंजाम देने के लिए उन्होंने बाइक और गाड़ी की अलग-अलग मास्टर चाबी बनवा रखी थी। झिंझाना पुलिस और एसओजी टीम ने तीनों को गिरफ्तार कर लिया। उन्होंने लखनऊ, पश्चिम उत्तर प्रदेश, राजस्थान, दिल्ली, उत्तराखंड और देहरादून में चोरी की घटनाओं को स्वीकार किया। पुलिस ने उनसे 17 बाइक और एक कार बरामद की है।

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    गुरुवार को पुलिस लाइन में आयोजित प्रेसवार्ता में एएसपी सुमित शुक्ला ने बताया कि एसओजी व झिंझाना पुलिस ने झिंझाना रोड पर चेकिंग के दौरान बाइक सवार तीन लोगों को गिरफ्तार कर अंतरराज्यीय वाहन चोर गिरोह का राजफाश किया।

    आरोपितों ने अपने नाम विजय पाल पुत्र यशवंत सिंह मूल निवासी अलवर राजस्थान, हाल निवासी वैशाली कालोनी काशीपुर जनपद उधम सिंह नगर उत्तराखंड, हेम सिंह पुत्र रामफल निवासी गांव बाला डेहरा थाना विजय मंदिर अलवर राजस्थान व बाइक मिस्त्री दानिश पुत्र नईम निवासी खानपुर लख्खी तहसील ठाकुरद्वारा थाना मूडा पांडे जनपद मुरादाबाद बताया।

    पुलिस ने उनकी निशानदेही पर झिंझाना जाने वाले रास्ते पर स्थित एक खंडहरनुमा स्कूल से चोरी की 16 बाइकों के अलावा दो मास्टर चाबी, एक नैनो कार, तीन मोबाइल फोन व चाकू बरामद किया।

    एएसपी ने बताया कि मुख्य आरोपित विजय पाल छह साल पहले बाइक चोरी के मामले में जेल में गया था, जहां उसकी मुलाकात दुष्कर्म के आरोप में जेल में बंद हेम सिंह से हुई थी। तब उस पर कर्ज था, इसलिए वाहन चोरी की योजना बनाई थी।

    अब कर्ज उतर चुका है। सिर्फ शौक पूरे करने के लिए वारदात करते थे। थाना प्रभारी वीरेंद्र कसाना ने बताया कि आरोपितों ने पांच सालों में एक हजार बाइक और 200 से अधिक गाड़ी चोरी कर बेची हैं। आरोपित सात से आठ हजार रुपये में बाइक और 25 से 30 हजार में गाड़ी बेच दिया करते थे। सबसे अधिक गाड़ी दिल्ली और लखनऊ से चोरी की थी। दानिश वाहनों के पार्ट्स निकालकर बेचने का कार्य करता है।