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    धारा-497 समाप्त करने का निर्णय समाज विरोधी : गठवाला खाप

    By JagranEdited By:
    Updated: Fri, 05 Oct 2018 09:47 PM (IST)

    जासं, शामली: गठवाला खाप ने विवाहेत्तर संबंधों से जुड़ी आइपीसी की धारा-497 को समाप्त करने क ...और पढ़ें

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    धारा-497 समाप्त करने का निर्णय समाज विरोधी : गठवाला खाप

    जासं, शामली: गठवाला खाप ने विवाहेत्तर संबंधों से जुड़ी आइपीसी की धारा-497 को समाप्त करने का निर्णय समाज विरोधी बताया है। नगर पालिका में प्रेसवार्ता कर चौधरी राजेंद्र ¨सह ने अपने पिता एवं गठवाला खाप के चौधरी बाबा हरिकिशन की ओर से बयान जारी किया। उन्होंने कहा कि बाबा हरिकिशन का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट का इस धारा को असंवैधानिक घोषित करने का फैसला ¨हदू, मुस्लिम एवं सभी समाजों की मान्यता के विपरीत है। इस निर्णय पर पुनर्विचार करने की जरूरत है।

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    चौधरी राजेंद्र ¨सह ने कहा कि खाप परिवारों को जोड़ने का कार्य करती हैं। संबंध विच्छेदन की कगार पर पहुंचे दंपतियों का समझौता कराया जाता है। ये निर्णय सामाजिक मान्यताओं पर कुठाराघात है। खाप की ओर से जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा, जिससे परिवार बिखरे नहीं। सेवानिवृत डीएफओ ओमप्रकाश मलिक ने कहा कि इस निर्णय से समाज में व्याभिचार बढ़ेगा। अगर महिलाओं को समानता का अधिकार देने की बात है तो कोई भी महिला अतिरिक्त वैवाहिक संबंध बनाने वाले पति के खिलाफ याचिका दायर कर सकती है। हरबीर ¨सह मलिक फुगाना ने कहा कि पति-पत्नी के बीच में किसी तीसरे का स्थान नहीं है। धारा-497 को समाप्त करने से पति-पत्नी का संबंध तो प्रभावित होगा ही, साथ घर का माहौल भी दूषित होगा। देशपाल मलिक ने कहा कि युवा पीढ़ी पर भी इस फैसले का कुप्रभाव पड़ेगा। संस्कार और नैतिकता समाप्त हो जाएगी। सर्वखाप स्वरूप समिति के महासचिव बाबूराम पंवार, चौधरी उदयवीर ¨सह भैंसवाल, राजवीर ¨सह, सभासद राजीव मलिक आदि मौजूद रहे।

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    क्या है धारा 497

    सुप्रीम कोर्ट ने 158 साल पुरानी व्यभिचार की धारा 497 को गत 27 सितंबर को रद कर दिया है। अपने फैसले में कोर्ट ने कहा है कि किसी पुरुष द्वारा विवाहित महिला से शारीरिक संबंध बनाना अपराध नहीं है। कोर्ट ने कहा था कि यह कानून महिलाओं के साथ प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से भेदभाव पूर्ण है। हालांकि, कोर्ट ने यह भी कहा कि व्यभिचार अपराध नहीं है। लेकिन, यह तलाक का आधार हो सकता है। और यदि व्यभिचार की वजह से एक जीवनसाथी खुदकशी कर लेता है और यह बात अदालत में साबित हो जाए तो आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा चलेगा।