UP News: अधिकारियों की आंखों में धूल झोंककर हड़पी 11 करोड़ की GST, सहायक आयुक्त पर हो गई बड़ी कार्रवाई
फर्म न व्यापार। अधिकारियों की आंखों में धूल झोंककर 10.71 करोड़ रुपये की जीएसटी हड़प ली। आरोपित दो माह फर्जीवाड़ा करता रहा मगर अधिकारी यह देखने तक नहीं पहुंचे कि फर्म है भी या नहीं। अधिकारी जब तक जागे देर हो चुकी थी। गुरुवार को शासन ने लापरवाह सहायक आयुक्त भावना चंद्रा को निलंबित कर दिया।

अंबुज मिश्र, शाहजहांपुर। फर्म न व्यापार। अधिकारियों की आंखों में धूल झोंककर 10.71 करोड़ रुपये की जीएसटी हड़प ली। आरोपित दो माह फर्जीवाड़ा करता रहा मगर, अधिकारी यह देखने तक नहीं पहुंचे कि फर्म है भी या नहीं। अधिकारी जब तक जागे, देर हो चुकी थी। गुरुवार को शासन ने लापरवाह सहायक आयुक्त भावना चंद्रा को निलंबित कर दिया। इस फर्जीवाड़ा में मददगार आजमगढ़ और मुजफ्फरनगर की 10 फर्मों को नोटिस भेजा गया है।
इस प्रकरण की जांच आर्थिक अपराध अनुसंधान शाखा से कराने की संस्तुति की जा रही। मार्च के पहले सप्ताह में इटावा के भरथाना स्थित नगला दुली निवासी मंदीप सिंह की ओर से सर्वश्री सिंह इंटरप्राइजेज फर्म पंजीकरण के लिए आनलाइन आवेदन किया था। उसने आवेदन में दर्शाया कि स्थानीय लोकविहार कालोनी में फर्म खोलकर काफी-चाय, आटा-चावल का व्यापार करेगा। उस समय प्रपत्र अपूर्ण होने पर आवेदन स्वयं वापस ले लिया। एक सप्ताह बाद प्रपत्र पूरे किए तो ऑनलाइन पंजीकरण होकर जीएसटी नंबर मिल गया।
नियमानुसार 30 दिन के अंदर राज्य कर अधिकारियों को फर्म का स्थलीय सत्यापन करना चाहिए मगर नहीं हुआ। मई में टीम पहुंची मगर वहां फर्म मिली न उसका मालिक। ऐसे में 17 मई को फर्म पंजीकरण निरस्त किया। 28 मई को संचालक मंदीप के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई गई।
जांच में पता चला कि मंदीप ने मार्च में ही साजिद इंटरप्राइजेज से 42.14 लाख के सामान की आपूर्ति दर्शायी। इस पर 7.08 लाख की जीएसटी बनी परंतु जमा नहीं की। अप्रैल में 45.41 करोड़ की खरीद दिखाई लेकिन, 10.71 करोड़ की जीएसटी जमा नहीं की। इसके बदले खरीदे गए माल की बिक्री सुषमा सेल्स कारपोरेशन व मां दुर्गा ट्रेडर्स को दर्शा दी। इसका ई-वे बिल जारी नहीं किया गया। उसने अप्रैल में ही 10.78 करोड़ का जीएसटी रिटर्न दाखिल किया।
यह आजमगढ़ और मुजफ्फरनगर के पते पर दर्ज फर्मों के खाते में होकर पंजाब की फर्म के नाम पहुंच गया। वहां से रुपये हड़प लिए। विभागीय अधिकारियों का मानना कि फर्जीवाड़ा में शामिल सभी नाम व पते भी कूटचरित होंगे। शातिर व्यक्ति ने उस समय आनलाइन आवेदन किया, जब भावना चंद्रा अवकाश पर थीं। विभागीय नियम है कि यदि कोई अधिकारी ऑनलाइन स्वीकृति नहीं देता तो आवेदन स्वत: पंजीकृत हो जाता है।
ऑनलाइन आवेदन के समय किरायनामा, बिजली का बिल की जरूरत होती है। इसके लिए मंदीप ने कुछ समय किराये का भवन ले लिया था। रोजा के थाना प्रभारी राजीव कुमार ने बताया कि यह प्रकरण 10 करोड़ से अधिक का होने के कारण आर्थिक अनुसंधान इकाई लखनऊ को स्थानांतरित किया जाएगा।
कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।