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    हिंसा के बाद बुझने लगी संभल की आपराधिक 'आग', 39 चौकियों और 224 कैमरों से शहर की हो रही निगरानी

    Updated: Fri, 02 Jan 2026 07:35 PM (IST)

    संभल में जामा मस्जिद हिंसा के बाद पुलिस की सतर्कता और सुरक्षा उपायों से आपराधिक घटनाओं में कमी आई है। 2023 से 2025 तक नगर कोतवाली में अपराध का ग्राफ ग ...और पढ़ें

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    जागरण संवाददाता, संभल। जामा मस्जिद बनाम हरिहर मंदिर के सर्वे विरोध में हुई हिंसा के बाद पुलिस की सतर्कता से अपराधिक आंकड़ों में बदलाव नजर आया है।

    दंगों के दाग से कलंकित हुए शहर को अब अपराधियों से भी मुक्ति मिलने लगी है। क्योंकि 2023 से लेकर 2025 दिसंबर तक के आंकड़ों पर बात करें तो नगर कोतवाली में अपराध का ग्राफ साल-दर-साल कम हुआ है।हालांकि नखासा में स्थिति अभी संतोषजनक नहीं है। वहां पर शहर कोतवाली से अधिक मुकदमे दर्ज किए जा चुके हैं।

    दरअसल, संभल न सिर्फ दंगों के लिए बदनाम रहा बल्कि यहां के लोग अपराधिक घटनाओं में भी संलिप्त रहते हैं। आतंकी कनेक्शन भी यहां के लोगों का सामने आ चुका है। आजादी से लेकर अब तक 16 बार संभल शहर दंगों की आग में झुलसा है। समय-समय पर यहां पर खाकी को पीटने की भी घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

    चोरी के वाहन काटने, गोकुशी और जुआं आदि के बड़े धंधे इस शहर में पनपते थे। फिर 24 नवंबर 2024 को जामा मस्जिद सर्वे के विरोध में हिंसा हुई और उसमें चार लोगों की हत्या भी कर दी गई थी। इस घटना का मास्टरमाइंड अंतरराष्ट्रीय वाहन चाेर शारिक साठा निकला है। हिंसा के बाद संभल पुलिस ने शहर की सुरक्षा के लिए एक बड़ा चक्रव्यूह तैयार किया।

    जोे, न सिर्फ शहर की सुरक्षा में उपयोग रहा बल्कि अपराधियों के मंसूबों पर भी पानी फेरते हुए नजर आ रहा है। आरआरएफ और पीएसी की नियमित तैनानी के साथ-साथ यहां पर 39 पुलिस चौकियां भी बनी हैं। जामा मस्जिद के सामने सत्यव्रत पुलिस चौकी की स्थापना पर भी हिंसा के बाद हुई।

    इसके साथ ही शहर में नजर रखने के लिए 224 कैमरे भी लगवाए गए हैं। जिनका कंट्रोल सत्यव्रत पुलिस चौकी में बना हुआ है। इन सभी उपयोगों का फर्क 2025 में देखने को मिला है। बता दें कि संभल कोतवाली क्षेत्र में वर्ष 2023 में 538 आपराधिक मामले दर्ज हुए थे।

    वहीं वर्ष 2024 में इनकी संख्या घटकर 360 रह गई और हिंसा के बाद पुलिस की निरंतर कार्रवाई, निगरानी और दबिशों के चलते वर्ष 2025 में यह आंकड़ा और घटकर 290 पर आ गया।

    हालांकि शहर के ही नखासा थाने में 2023 में 449 मुकदमे दर्ज हुए थे, फिर अगले साल 2024 में घटकर 326 पर पहुंचे और अब 2025 में 332 मामले दर्ज किए गए हैं। हालांकि रायसत्ती थाने में मात्र 86 केस दर्ज हुए हैं।क्योंकि इस थाने की स्थापना भी पांच-छह महीने पहले ही हुई है।

    डकैती से राहत और हत्याओं में कमी

    यदि पूरे जनपद के तीन वर्षों 2023, 2024 और 2025 के आपराधिक आंकड़ों का तुलनात्मक विश्लेषण किया जाए तो वर्ष 2025 में अपराध में गिरावट दिखाई देती है।

    जिले में वर्ष 2023 में जनपद में डकैती की एक, लूट की 15, हत्या की 33, बलवा की 12 और चोरी की 54 घटनाएं दर्ज हुई थीं और कुल घटनाओं की संख्या 115 रही थी, जबकि वर्ष 2024 में डकैती की एक, लूट की 14, हत्या की 33, बलवा की 16 और चोरी की 64 घटनाएं दर्ज होने से कुल आंकड़ा बढ़कर 128 पर पहुंच गया था।

    हालांकि वर्ष 2025 में डकैती की कोई भी घटना दर्ज नहीं हुई, लूट के मामले घटकर 12 रह गए, हत्या के मामलों में कमी के साथ संख्या 28 पर आ गई। बलवा की 13 घटनाएं दर्ज हुईं और चोरी के मामलों में भी गिरावट के साथ आंकड़ा 58 रहा। इस प्रकार वर्ष 2025 में कुल 111 आपराधिक घटनाएं सामने आईं जो वर्ष 2024 की तुलना में कमी आई है।

    संभल शहर सहित जिले में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए पुलिस लगातार कार्य कर रही है। प्रयास है कि जिले के दामन से अपराधिक कलंक हटाया जाएं। हिंसा के बाद से पुलिस पूरी तरह अलर्ट है। कैमरे लगवाए गए हैं और संभल में आरआरएफ के साथ पीएसी की तैनाती नियमित है।

    केके बिश्नोई, एसपी, संभल।