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    संभल में बने 11000 मकान-दुकान पालिका के रिकॉर्ड से बाहर, सर्वे में सामने आया सच

    Updated: Sun, 04 Jan 2026 05:23 PM (IST)

    संभल पालिका के नए सर्वे में 13 साल में 8000 नए मकान और 3000 व्यावसायिक भवन सामने आए हैं, जो अभी तक कर दायरे से बाहर थे। पालिका इन्हें टैक्स नेटवर्क मे ...और पढ़ें

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    जागरण संवाददाता, संभल। हाल ही में पालिका ने शहर का एक सर्वे कराया था। जिसमें शुरुआती आंकड़े पालिका प्रशासन के लिए चौंकाने वाले हैं। आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2012 में जहां नगर पालिका रिकार्ड में महज 30 हजार मकान दर्ज थे, वहीं अब यह संख्या बढ़कर करीब 41 हजार तक पहुंच गई है।

    इनमें से लगभग 8000 मकान ऐसे हैं, जो नए बने हैं और अभी तक कर दायरे में पूरी तरह शामिल नहीं हो पाए थे। सर्वे के बाद इन सभी भवनों को टैक्स नेटवर्क में लाने की तैयारी की जा रही है।

    बढ़ा हुआ राजस्व सीधे तौर पर शहर की मूलभूत सुविधाओं पर खर्च किया जाएगा। इसमें साफ-सफाई व्यवस्था, पेयजल आपूर्ति, स्ट्रीट लाइट, सड़कों की मरम्मत, नालों की सफाई और अन्य नागरिक सुविधाएं शामिल हैं।

    दरअसल, नगर पालिका द्वारा लंबे अंतराल के बाद दुकानों और मकानों का नया सर्वेक्षण कराया गया है। इस सर्वे का मुख्य उद्देश्य टैक्स वसूली के आधार को व्यापक बनाना और राजस्व संग्रहण में बढ़ोतरी करना है। मई 2026 से से कर की दरों में संशोधन के साथ-साथ वसूली प्रक्रिया को भी और सख्त किया जाएगा।

    वर्तमान में नगर पालिका की ओर से मकान कर, व्यवसायिक कर और जलकर के माध्यम से लगभग छह करोड़ रुपये का राजस्व संग्रह किया जा रहा है। कर निर्धारण अधिकारी कार्तिक यादव का कहना है कि यदि वास्तविक आंकड़ों के आधार पर मकानों और दुकानों की सही गणना हो जाए तो यह राजस्व आसानी से दोगुना तक पहुंच सकता है।

    इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए इस बार सर्वेक्षण कार्य को पूरी गंभीरता और पारदर्शिता के साथ कराया गया है। नगर पालिका क्षेत्र का पिछला सर्वे वर्ष 2012 में हुआ था, जिसमें करीब 30 हजार मकान दर्ज थे। ताजा सर्वे में यह संख्या बढ़कर लगभग 41 हजार तक पहुंच गई है।

    पालिका की मानें तो 13 साल के भीतर करीब 8000 नए मकान और 3000 नए व्यवसायिक भवन बने हैं। तेजी से बढ़ती आबादी और व्यापारिक गतिविधियों के कारण नगर क्षेत्र का दायरा भी पहले की तुलना में दोगुना से अधिक हो चुका है।

    नए टैक्स निर्धारण में सड़कों की चौड़ाई और मकान व दुकानों के आकार को आधार बनाया जाएगा। मुख्य मार्गों और चौड़ी सड़कों पर स्थित व्यवसायिक प्रतिष्ठानों पर अपेक्षाकृत अधिक टैक्स लगेगा, जबकि संकरी गलियों और आवासीय इलाकों में स्थित मकानों पर कम कर निर्धारित किया जाएगा।

    जिन भवनों का अब तक कर निर्धारण नहीं हो सका था, उन्हें भी इस बार टैक्स दायरे में लाया जाएगा। मालूम हो कि एक अप्रैल 2025 से नगर पालिका क्षेत्र में टैक्स वृद्धि की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, हालांकि इसका प्रभाव अभी सीमित रूप में ही दिख रहा है।

    सर्वे पूरा होने और नए टैक्स स्लैब तय होने के बाद इसका असर आम नागरिकों पर स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। अनुमान है कि जिन मकानों पर अब तक करीब एक हजार रुपये टैक्स लगता था, वह नए निर्धारण में बढ़कर 1500 से 2000 रुपये तक हो सकता है।

    अधिशासी अधिकारी डा. मणिभूषण तिवारी ने कहा कि टैक्स बढ़ोतरी से नागरिकों को घबराने की जरूरत नहीं है। बढ़ा हुआ राजस्व शहर के विकास कार्यों पर ही खर्च किया जाएगा। इससे सड़कों, नालियों, स्ट्रीट लाइट और स्वच्छता व्यवस्था में सुधार किया जाएगा, जिससे शहर को बेहतर सुविधाएं मिल सकें।

    शहर में सर्वे का कार्य पूरा हो चुका है। जिसमें लगभग आठ हजार आवासीय व 3000 हजार नए व्यवसायिक भवन चिन्हित किए गए हैं। अप्रैल 2026 से कर में वृद्घि के साथ ही नए भवनाें पर भी टैक्स लगना शुरू हो जाएगा।

    कार्तिक यादव, कर निर्धारण अधिकारी, नगर पालिका परिषद, संभल।