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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Apr 02, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

जमीयत पहले ही घोषणा कर चुकी है कि… वक्फ संशोधन बिल पर मौलाना अरशद मदनी ने दी बड़ी प्रतिक्रिया

Published: Wed, 02 Apr 2025 06:59 PM (IST)

मोदी सरकार ने संसद में वक्फ संशोधन बिल पेश किया है जिसका मुस्लिम संगठनों और विपक्ष ने भारी विरोध किया ...और पढ़ें

जमीयत उलेमा ए हिंद ने सरकार के इस बिल को बहुसंख्यकवादी मानसिकता और अलोकतांत्रिक व असंवैधानिक करार दिया है।
जमीयत उलेमा ए हिंद ने सरकार के इस बिल को बहुसंख्यकवादी मानसिकता और अलोकतांत्रिक व असंवैधानिक करार दिया है।

HighLights

  1. पार्टियों के लिए यह परीक्षा की घड़ी: मौलाना अरशद मदनी
  2. हम इस बिल को पूरी तरह खारिज करते हैं: महमूद मदनी

जागरण संवाददाता, सहारनपुर। मुस्लिम संगठनों और विपक्ष के भारी विरोध के बीच बुधवार को मोदी सरकार ने संसद में वक्फ संशोधन बिल पेश कर दिया है। अब इस बिल पर चर्चा हो रही है, जिसके बाद इसका अंतिम रूप सामने आएगा। इसी बीच, जमीयत उलेमा ए हिंद ने सरकार के इस बिल को बहुसंख्यकवादी मानसिकता और अलोकतांत्रिक व असंवैधानिक करार दिया है।

संसद में सरकार द्वारा बिल पेश किए जाने पर देश में मुसलमानों के सबसे बड़े संगठन जमीयत उलेमा ए हिंद के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना अरशद मदनी ने कहा कि यह बिल पेश कर सरकार तो पूरी तरह बेनकाब हो ही चुकी है, साथ ही खुद को धर्मनिरपेक्ष कहने वाली पार्टियों के लिए भी परीक्षा की घड़ी आ गई है। उन्हें तय करना होगा कि वे देश के संविधान और धर्मनिरपेक्षता के साथ खड़े हैं या उन लोगों के साथ जो इसे खत्म करने पर तुले हुए हैं। 

मदनी ने कहा कि जमीयत पहले ही घोषणा कर चुकी है कि अगर इस विधेयक को रोकने के लोकतांत्रिक प्रयास विफल हो गए तो वे इसके खिलाफ कानूनी संघर्ष शुरू करेंगे। 

बिल पूरी तरह असंवैधानिक: महमूद मदनी

जमीयत के दूसरे गुट के अध्यक्ष एवं पूर्व सांसद मौलाना महमूद मदनी ने प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि वक्फ से संबंधित यह बिल पूरी तरह असंवैधानिक है और मूल अधिकारों का उल्लंघन करता है। सरकार अपनी संख्यात्मक बहुमत के बल पर इसे पारित कराने की कोशिश कर रही है। 

यह रवैया बहुसंख्यकवादी मानसिकता पर आधारित है और लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। इस बिल को जबरन संसद में लाया गया है, जिसका उद्देश्य अल्पसंख्यकों के अधिकारों को छीनना है, जो किसी भी हाल में स्वीकार्य नहीं है। 

धार्मिक स्वतंत्रता और कानूनी हकों पर सीधा हमला

प्रसिद्ध आलिम ए दीन कारी इसहाक गोरा ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह बिल मुसलमानों के धार्मिक स्वतंत्रता और कानूनी हकों पर सीधा हमला है। सरकार ने ऐसा बिल पेश किया है, जिससे मुसलमानों के वक्फ इदारों पर सरकारी नियंत्रण कायम हो जाएगा और उनकी स्वतंत्रता पर खतरा मंडराने लगेगा। 

उन्होंने मुसलमानों से अपील की कि वे अपने धार्मिक और कानूनी अधिकारों की रक्षा के लिए जागरूक रहें और इस बिल के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीकों से अपनी आवाज उठाएं ।

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