आराध्य के प्रति बढ़ी आस्था, तीर्थाटन की लागी लगन; अयोध्या, काशी, मथुरा में उमड़े करोड़ों श्रद्धालु
उत्तर प्रदेश में काशी, अयोध्या और विंध्यधाम जैसे तीर्थ स्थलों के नव्य-भव्य रूप तथा प्रयागराज महाकुंभ जैसे आयोजनों से धार्मिक पर्यटन में भारी वृद्धि हु ...और पढ़ें

जागरण टीम, लखनऊ। काशी, अयोध्या, विंध्यधाम जैसे तीर्थ स्थलों के नव्य-भव्य रूप, प्रयागराज महाकुंभ के ऐतिहासिक आयोजन से बनी आभा, मथुरा-वृंदावन तक अच्छी सड़क और इन स्थलों पर पर्यटन जनित सुविधाओं के विस्तार से पर्यटक अब तीर्थाटक के रूप में उमड़ रहे हैं।
वैसे भी कोरोनाकाल के बाद लोगों में अध्यात्म के प्रति रुझान बढ़ा है और संयोग से प्रदेश में इसके बाद ही अयोध्या-काशी-विंध्यधाम जैसे आध्यात्मिक प्रकल्प नए रूप में विकसित हुए हैं। अयोध्या में मंदिर बनने के पहले साल भर में जहां 25-30 लाख पर्यटक आते थे।
वहीं, वर्ष 2025 में 29 करोड़, काशी में साढ़े 16 करोड़ और मथुरा-वृंदावन में करीब 10 करोड़ श्रद्धालु पहुंचे। इस बार नववर्ष की पूर्व संध्या और आगमन के प्रथम दिवस पर तीर्थस्थलों पर उमड़ी भीड़ ने और पुष्ट किया है कि आराध्य के प्रति बढ़ती आस्था से तीर्थाटन की लगन लगी है।
पर्यटकों के तीर्थाटकों में परिवर्तित होने की बात करें तो मथुरा-वृंदावन होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष महेंद्र प्रताप सिंह का आकलन है कि कोरोनाकाल के बाद से लगातार हर वर्ष श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ी है। मथुरा-वृंदावन में रहना-खाना भी दूसरी जगह की अपेक्षा सस्ती है।
पहले जो श्रद्धालु सिर्फ वृंदावन दर्शन करने आते थे अब वे श्रीकृष्ण जन्मभूमि, गोकुल, गोवर्धन और बरसाने में भी जाकर रुक रहे हैं। ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर के सेवायत दिनेश गोस्वामी कहते हैं कि ब्रज में श्रद्धालु अधिक आने के पीछे एक कारण है कि लोगों का धार्मिक झुकाव बढ़ा है।
श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर, बीएचयू के मानित प्रबंधक प्रो. ब्रजभूषण ओझा यह मानते हैं कि काशी में कोई एक तीर्थाटक आता है तो कम से कम सात परिवारों की आजीविका पोषित होती है, जिसमें रिक्शावाला, फूलवाला, होटल कारोबारी से लेकर बुनकर तक शामिल हैं।
कम बजट में पर्यटन की बात चित्रकूट पर भी लागू होती है। यहां एक सामान्य सैलानी परिवार (दंपती व दो बच्चे) लगभग पांच से दस हजार रुपये में यात्रा संपन्न कर सकते हैं। महाकुंभ के भव्य आयोजन के बाद भी लोगों का रुझान उत्तर प्रदेश की पवित्र भूमि के दर्शन के प्रति बढ़ा है।
अयोध्या में साल भर में बढ़ गए सात करोड़ दर्शनार्थी
अयोध्या में 2024 में लगभग 22 करोड़ श्रद्धालु आए थे। अबकी इनकी संख्या में सात करोड़ की वृद्धि दर्ज की गई है। वाराणसी में 2024 में पर्यटकों की संख्या बढ़कर 11 करोड़ हो गई, जिसमें लगभग 31 हजार विदेशी थे। इस वर्ष नवंबर तक 16.60 करोड़ से अधिक पर्यटक आ चुके हैं, जिनमें लगभग 30 हजार विदेशी हैं। मथुरा में भी दिसंबर 2025 तक श्रद्धालुओं की संख्या दस करोड़ होने का अनुमान है। यह पिछले साल की तुलना में एक करोड़ अधिक है।

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