Sambhal Jama Masjid के सर्वे मामले में हाई कोर्ट का आदेश सुरक्षित, पोषणीयता को दी गई है चुनौती
Jama Masjid Harihar Mandir | इलाहाबाद हाई कोर्ट ने संभल जामा मस्जिद और हरिहर मंदिर विवाद से संबंधित पुनरीक्षण याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया है। जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी द्वारा दायर याचिका पर न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने यह आदेश दिया। याचिका में मस्जिद को मंदिर तोड़कर बनाने का दावा किया गया है और एएसआई सर्वेक्षण के आदेश को चुनौती दी गई है।

विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने संभल जामा मस्जिद और हरिहर मंदिर विवाद को लेकर दाखिल पुनरीक्षण याचिका पर आदेश सुरक्षित कर लिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने दिया है। जामा मस्जिद इंतजामिया कमेटी ने पुनरीक्षण याचिका दायर की है। मंगलवार को सुनवाई पूरी हो गई।
हरिशंकर जैन व सात अन्य ने सिविल जज सीनियर डिवीजन संभल की अदालत में मुकदमा किया है। इसमें दावा किया है कि संभल के कोट पूर्वी स्थित जामा मस्जिद एक मंदिर को ध्वस्त करने के बाद बनाई गई थी। वादी ने इसे हरिहर मंदिर बताते हुए प्रवेश के अधिकार की घोषणा की मांग की है।
दीवानी अदालत ने इस मामले में सुनवाई करते हुए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) को एडवोकेट कमिश्नर के साथ सर्वे का निर्देश दिया था और मुकदमे की पोषणीयता पर भी सवाल उठाया था। हाई कोर्ट ने संभल की दीवानी अदालत के समक्ष लंबित मूल मुकदमे की कार्यवाही पर रोक लगा दी थी।
मुकदमे की पोषणीयता को चुनौती दी गई
जामा मस्जिद इंतेजामिया कमेटी की पुनरीक्षण याचिका पर हाई कोर्ट ने एएसआइ को दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया था। कोई हलफनामा दाखिल नहीं होने पर कोर्ट ने आगे का समय दिया। यह पुनरीक्षण याचिका सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद की गई है, जिसमें संभल की दीवानी अदालत के समक्ष पूरी कार्यवाही के साथ मुकदमे की पोषणीयता को चुनौती दी गई है।
याचिका में कहा गया है कि सिविल जज कोर्ट में मुकदमा 19 नवंबर 2024 की दोपहर दाखिल किया गया था और कुछ ही घंटों के भीतर अदालत ने एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करते हुए उसे मस्जिद में प्रारंभिक सर्वेक्षण का निर्देश दिया, जो उसी दिन यानी 19 नवंबर को और फिर 24 नवंबर 2024 को किया गया था।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि सर्वेक्षण की रिपोर्ट 29 नवंबर तक दाखिल की जाए। दीवानी अदालत ने 19 नवंबर को ही हिंदू पक्ष के इस तर्क को स्वीकार कर लिया कि मस्जिद बाबर द्वारा 1526 में संभल में हरिहर मंदिर को ध्वस्त करने के बाद बनवाई गई थी। दूसरे दौर के सर्वे के दौरान हिंसा भी हुई थी।
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