122 वर्ष बाद इस बार पितृपक्ष में लगेंगे दो ग्रहण, खोलेंगे भारत की उन्नति के द्वार, क्या कहते हैं प्रयागराज के ज्योतिर्विद
इस वर्ष पितृपक्ष की शुरुआत और अंत दोनों ही ग्रहण के साए में होगी। सात सितंबर को चंद्रग्रहण से पितृपक्ष का आरम्भ होगा जबकि पितृ विसर्जन के दिन 21 सितंबर को सूर्य ग्रहण लगेगा। ज्योतिषियों के अनुसार ग्रहण का पितृपक्ष पर कोई विशेष प्रभाव नहीं पड़ेगा परंतु विश्व में अशांति बढ़ सकती है। भारत में आर्थिक और राजनीतिक स्थिति मजबूत होने की संभावना है।

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। 122 वर्ष बाद पितरों का स्मृति पर्व पितृपक्ष का शुभारंभ व विसर्जन ग्रहण पर होगा। पितृपक्ष का आरंभ सात सितंबर को चंद्रग्रहण और विसर्जन 21 सितंबर को सूर्य ग्रहण पर होगा। हालांकि सूर्यग्रहण का प्रभाव भारत में नहीं रहेगा।
ग्रहण से पितृपक्ष पर नहीं पड़ेगा कोई प्रभाव
सनातन धर्म के मर्मज्ञों का मत है कि ग्रहण से पितृपक्ष पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा, बल्कि भारत के लिए शुभ होगा। इससे विश्व में उथल-पुथल बढ़ेगा, लेकिन भारत में सार्थक परिणाम देखने को मिलेंगे, क्योंकि सूर्यग्रहण का असर यहां नहीं होगा।
विश्व में अशांति होना तय, आंतरिक राजनीति में आएगी कटुता
बीएचयू में ज्योतिष विभाग के पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो. गिरिजाशंकर शास्त्री के अनुसार पितरों का लोक चंद्रमा के ऊपरी भाग में है। पितृपक्ष के आरंभ और विसर्जन पर ग्रहण पड़ने से विश्व में अशांति होना तय है, लेकिन भारत में उसका प्रभाव नहीं पड़ेगा, क्योंकि यहां सूर्यग्रहण का प्रभाव नहीं है। भारत आर्थिक, राजनीति, वैज्ञानिक और सैन्य क्षेत्र में भारत की स्थिति मजबूत होगी, लेकिन आंतरिक राजनीति में कटुता बढ़ेगी। सत्ता पक्ष व विपक्ष में सामंजस्य का अभाव रहेगा।
इसके पहले वर्ष 1903 में पितृपक्ष में दो ग्रहण का बना था संयोग
ज्योतिर्विद आचार्य देवेंद्र प्रसाद त्रिपाठी के अनुसार वर्ष 1903 में पितृपक्ष में दो ग्रहण का संयोग बना था। तब चंद्र ग्रहण भारत में दृश्य नहीं था, सूर्यग्रहण का प्रभाव देखने को मिला था। अबकी भारत में सूर्यग्रहण का प्रभाव नहीं रहेगा।
यह ग्रहण शतभिज्ञा नक्षत्र व कुंभ राशि पर होगा
सात सितंबर को चंद्र ग्रहण का आरंभ रात 8.58 बजे और मोक्ष (समापन) 2.25 बजे होगा। ग्रहण का स्पर्श, मध्य, मोक्ष संपूर्ण भारत में दृश्य होगा। यह ग्रहण शतभिषा नक्षत्र तथा कुंभ राशि पर होगा। भारत के अतिरिक्त इसे पश्चिमी प्रशांत महासागर, हिंद महासागर, पूर्वी अटलांटिक महासागर, अंटार्कटिका, एशिया, आस्ट्रेलिया, यूरोप आदि में देखा जा सकेगा।
ग्रहण के सूतक काल में क्या करें और क्या न करें
पाराशर ज्योतिष संस्थान के निदेशक आचार्य विद्याकांत पांडेय के अनुसार शास्त्रों में कहा गया है कि चंद्रग्रहण में ग्रहण से पूर्व नौ घंटे व सूर्यग्रहण में 12 घंटे पहले सूतक लग जाता है। सूतक काल में बाल, वृद्ध, रोगी को छोड़ कर अन्य के लिए खानपान वर्जित बताया गया है। ग्रहण काल में शास्त्रीय वचन अनुसार भोजन निवृत्ति के साथ धार्मिक कृत्य श्राद्ध, दान आदि करना चाहिए।
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