Lunar Eclipse 2025 : संगम नगरी में 7 सितंबर रात 11 बजे दिखेगा पूर्ण चंद्र ग्रहण, खगोल विज्ञानी ने बताई 'Blood Moon' की विशेषता
Lunar eclipse 2025 प्रयागराज में सात सितंबर को पूर्ण चंद्र ग्रहण लगेगा है। इस दौरान सूर्य पृथ्वी और चंद्रमा एक सीधी रेखा में होंगे। रात 11 बजे पूर्ण ग्रहण दिखाई देगा जिसमें चंद्रमा लाल रंग का हो जाएगा। ग्रहण काल पांच घंटे 27 मिनट का रहेगा। अगला पूर्ण चंद्र ग्रहण तीन मार्च 2026 को होगा।

जागरण संवाददाता, प्रयागराज। Lunar Eclipse 2025 पूर्ण चंद्र ग्रहण सात सितंबर को होने जा रहा है। इस दौरान पृथ्वी की छाया चंद्रमा को ढक लेगी। सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीधी में रहेंगे, जिससे पृथ्वी सूर्य से आने वाली रोशनी को रोककर चंद्रमा पर अपनी छाया डालेगी।
अगला पूर्ण चंद्र ग्रहण तीन मार्च 2026 को होगा
संगम नगरी में रात 8:58 बजे यह घटना शुरू होगी। 11 बजे पूर्ण ग्रहण दिखाई देगा। इसमें चंद्रमा लाल रंग का हो जाएगा। ग्रहण का समापन रात 2:25 बजे होगा। ग्रहण काल पांच घंटे 27 मिनट का रहेगा। अगला पूर्ण चंद्र ग्रहण तीन मार्च 2026 को होगा।
पूर्णिमा को ही क्यों होता है पूर्ण चंद्र ग्रहण
Lunar Eclipse 2025 यह एक खग्रास पूर्ण चंद्र ग्रहण है। इसके लिए सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा सीध में होना आवश्यक है। अन्यथा पृथ्वी चंद्रमा की सतह पर छाया नहीं डाल पाएगी। पूर्ण चंद्र ग्रहण तब होता है, जब पूर्णिमा हो। उसी समय चंद्रमा चंद्र नोड पर (उसके बहुत निकट) होता है।
कब होता है आंशिक चंद्र ग्रहण
जवाहर तारामंडल की विज्ञानी सुरूर फातिमा के अनुसार जब चंद्रमा आंशिक रूप से पृथ्वी की छाया से ढंक जाता है, तो आंशिक चंद्र ग्रहण होता है। यदि पृथ्वी की छाया का केवल बाहरी भाग चंद्रमा को ढंकता है, तो वह उपछाया चंद्र ग्रहण होता है। पृथ्वी की उप छाया चंद्रमा की कक्षा से कहीं आगे तक फैली होती है।
ग्रहण में चंद्रमा को नंगी आंखों से क्यों देख सकते हैं
Lunar Eclipse 2025 उन्होंने बताया कि इसका अर्थ यह कि चंद्रग्रहण में पृथ्वी की उप छाया की कोई भूमिका नहीं होती। पूर्ण चंद्र ग्रहण के दौरान पृथ्वी सूर्य के प्रकाश को चंद्रमा की सतह तक पहुंचने से रोकती है, फिर भी चंद्रमा नंगी आंखों से दिखाई देता है। ऐसा इसलिए कि पृथ्वी का वायुमंडल सूर्य के प्रकाश को मोड़कर अप्रत्यक्ष रूप से चंद्रमा की सतह को प्रकाशित करता है।
... इसलिए चंद्रमा लाल-नारंगी चमक से प्रकाशित होता है
सुरूर फातिमा ने बताया कि जब सूर्य का प्रकाश पृथ्वी के वायुमंडल से गुजरता है, तो वह सतह की ओर अपवर्तित हो जाता है। इससे कुछ भाग छोटी तरंगदैर्घ्य वाले रंग की किरण बिखरकर छन जाती है। नारंगी और लाल जैसे लंबी तरंगदैर्घ्य वाली किरणें वायुमंडल से होकर गुजरती हैं। यह प्रकाश एक बार फिर पूर्ण ग्रहणग्रस्त चंद्रमा की सतह की ओर अपवर्तित हो जाता है, जिससे वह लाल-नारंगी चमक से प्रकाशित होता है।
किस-किस देख के लोग देख सकेंगे चंद्र ग्रहण
उन्होंने बताया कि इस बार ग्रहण के पूर्ण होने पर चंद्रमा को लाल होते देख सकते हैं। इसी कारण ब्लड मून की संज्ञा दी गई है। ग्रहण को भारत, चीन, रूस, अरब देशों के साथ पश्चिमी आस्ट्रेलिया, पूर्वी अफ्रीका और यूरोप के कई देशों से देख सकते हैं।
अगस्त के बाद की पहली पूर्णिमा को ग्रीन कार्न मून भी कहते हैं
Lunar Eclipse 2025 जवाहर तारामंडल की विज्ञानी कहती हैं कि अगस्त के बाद की पहली पूर्णिमा को ग्रीन कार्न मून भी कहते हैं। चेरोकी, क्रीक जैसी अमेरिकी जनजाति के लोग इसी समय मकई की फसल की कटाई करते हैं। इस पूर्णिमा का सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व है, क्योंकि यह खाद्य पदार्थों की उपलब्धता और प्रकृति के चक्रों से जुड़ा है।
हार्वेस्ट मून और शरद विषुव
हार्वेस्ट मून इस बार अक्टूबर में होगा। इस समय शरद विषुव (सर्दी की शुरुआत अर्थात सूर्य भूमध्य रेखा के ठीक ऊपर होगा) के सबसे नज़दीक की पूर्णिमा को यह नाम दिया गया है। वजह यह कि प्राचीन समय में किसान फसलों की कटाई के लिए चंद्रमा की ज्यादा रोशनी का उपयोग करते थे। हार्वेस्ट मून के आस पास की कुछ रातों में चंद्रमा हर रात लगभग एक ही समय उदय होता है, जिससे किसानों को देर रात तक काम करने का मौका मिलता है। शरद विषुव प्राय: 22 सितंबर के आसपास होता है। जवाहर तारामंडल की विज्ञानी सुरूर फातिमा कहती हैं कि हर साल ऐसा होना आवश्यक नहीं है। 2025 में हार्वेस्ट मून पांच-छह अक्टूबर को है।
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