Mahakumbh 2025: सिद्ध-साध्य योग में लगेगी वासंतिक डुबकी, श्रद्धालुओं की सुरक्षा के इंतजाम पूरे
हर कोई तीसरे अमृत स्नान पर्व यानी कि वसंत पंचमी पर संगम में डुबकी लगाने को आतुर दिख रहा है। तीन फरवरी को पड़ने वाले वसंत पंचमी स्नान पर्व पर सिद्ध और साध्य योग का अद्भुत संयोग बन रहा है। पंचमी तिथि तीन फरवरी की सुबह 9.36 बजे तक है। सुबह 8.58 बजे तक सिद्ध योग रहेगा उसके बाद साध्य योग लग जाएगा।
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। जप-तप, यज्ञ-अनुष्ठान के महापर्व महाकुंभ में भक्ति और समर्पण का संगम है। संत और श्रद्धालु आराध्य की साधना में लीन हैं। हर कोई तीसरे अमृत स्नान पर्व यानी कि वसंत पंचमी पर संगम में डुबकी लगाने को आतुर दिख रहा है।
तीन फरवरी को पड़ने वाले वसंत पंचमी स्नान पर्व पर सिद्ध और साध्य योग का अद्भुत संयोग बन रहा है। पंचमी तिथि तीन फरवरी की सुबह 9.36 बजे तक है। सुबह 8.58 बजे तक सिद्ध योग रहेगा, उसके बाद साध्य योग लग जाएगा। मकर राशि में सूर्य और मीन राशि में चंद्रमा, शुक्र व राहु संचरण करेंगे। धर्माचार्य उसे उत्कृष्ट संयोग मान रहे हैं।
मौनी अमावस्या का स्नान संपन्न
वहीं अगाध भक्ति, हर्ष-उमंग और भावनाओं के उमड़े ज्वार के बीच अखाड़ों ने दूसरा अमृत स्नान मौनी अमावस्या पर किया। संतों के शंखनाद से समूची भावभूमि भक्ति में रम गई। सनातन के वैभव का गान करने वाले अखाड़ों में अद्भुत संयम, सहयोग और अद्वितीय अनुशासन दिखा।
अखाड़ों ने संभाली सुरक्षा की कमान
स्वयं की परंपरा से ऊपर उन्होंने सनातन धर्मावलंबियों की सुविधा की चिंता की। भगदड़ मचने के बाद उन्हें पहले स्नान कराया, उसके बाद त्रिविधि ताप-पाप नाशिनी त्रिवेणी (संगम) के पवित्र जल में गोता लगाया। ये पहला मौका रहा जब अखाड़ों ने श्रद्धालुओं की सुरक्षा, संरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए अपने स्नान के समय में बदलाव किया।
हर कोई दिखा मंत्रमुग्ध
तप-तपस्या, साध-साधना की धरा पर सुबह पांच बजे के बजाय 10 बजे के बाद स्नान किया। बैंडबाजा, घोड़ा, ऊंट के लंबे समूह के बजाय सादगी से स्नान करके समर्पित भाव से शिविर में लौटे। श्री महानिर्वाणी व अटल अखाड़ा के संत धर्मध्वजा के साथ संगम तट पर पहुंचे तो उनका दर्शन पाकर हर कोई मंत्रमुग्ध हुआ।
संगम तट पहुंचा संतों का समूह
आराध्य को स्नान कराने के बाद जल में नागा संन्यासियों के साथ निर्वाण पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी विशोकानंद भारती, अटल अखाड़ा के आचार्य स्वामी विश्व आत्मानंद सरस्वती, सचिव श्रीमहंत यमुना पुरी सहित सैकड़ों संताें ने सादगी से श्रद्धाभाव से ओतप्रोत होकर डुबकी लगाई। कुछ देर बाद श्री निरंजनी व आनंद अखाड़ा के संतों का समूह संगम तट पहुंचा।
नागा संतों व महामंडलेश्वरों ने किया स्नान
आराध्य की पालकी को स्नान कराने के बाद भाला, त्रिशूल, तलवार लेकर अठखेलियां करते नागा संन्यासियों का अलौकिक दृश्य हर किसी के लिए अविस्मरणीय बन गया। अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत रवींद्र पुरी के नेतृत्व में ध्वजाओं के साथ नागा संतों व महामंडलेश्वरों ने स्नान किया।
मां गंगा की भावपूर्ण स्तुति
श्री निरंजनी अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरि, आनंद अखाड़ा के आचार्य महामंडलेश्वर बालकानंद गिरि मां गंगा की भावपूर्ण स्तुति की। संतों का दर्शन पाकर आनंदित हृदय, मर्यादित भाव के साथ उनके प्रति शरणागत रहा जन-ज्वार...। जूना, अग्नि, आवाहन के साथ किन्नर अखाड़ा के संतों का समूह निकला तो श्रद्धालुओं की भावनाओं का समंदर उमड़ पड़ा।
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