Magh Mela 2026 प्रयागराज माघ मेला में सुगम यातायात व्यवस्था को पुलिस की व्यापक योजना, जिले की सीमाओं पर डायवर्जन प्लान लागू होगा
Magh Mela 2026 प्रयागराज में माघ मेला 2024 के लिए यातायात और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। एडीजी यातायात ने पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक में यातायात प्रबंधन, पार्किंग और डायवर्जन प्लान पर चर्चा की। पुलिसकर्मियों को कंटिंजेंसी प्लान की जानकारी देने और घाटों को गूगल से जोड़ने का निर्णय लिया गया, ताकि श्रद्धालुओं को सुविधा हो और सुरक्षा बनी रहे।

Magh Mela 2026 प्रयागराज मेंआयोजित बैठक में शामिल एडीजी यातायात ए. सतीश गणेश, अपर पुलिस महानिदेशक प्रयागराज जोन डा. संजीव गुप्ता, मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल, पुलिस कमिश्नर जोगेंद्र कुमार। सौ. सूचना विभाग
जागरण संवाददाता, प्रयागराज। Magh Mela 2026 माघ मेला में आने वाले श्रद्धालुओं के आवागमन को सुगम एवं सुरक्षित बनाने की तैयारी है। इसके लिए शनिवार को अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजी) यातायात ए. सतीश गणेश ने पुलिस-प्रशासन के अधिकारियों के साथ मेला प्राधिकरण कार्यालय स्थित आइसीसीसी सभागार में बैठक की। इसमें माघ मेले की यातायात प्रबंधन योजना, पार्किंग व्यवस्था, साइनेज व्यवस्था व अन्य कांटिजेंसी योजनाओं से संबंधित बिंदुओं पर चर्चा की गई।
सातों मुख्य मार्गों पर पार्किंग स्थल
Magh Mela 2026 यातायात प्रबंधन एवं कंटेंजेंसी योजनाओं के बारे में जानकारी दी गई। पुलिस अधिकारियों ने मेला अवधि में सीमावर्ती जनपदों से मेला क्षेत्र की ओर आने वाली भीड़ को आवश्यकतानुसार रोकने व डाइवर्ट करने के लिए बनाए गए डायवर्जन प्लान के बारे में बताया। सातों मुख्य मार्गों पर चिह्नित पार्किंग स्थलों की अपेक्षित क्षमता और उनमें की जा रही व्यवस्थाओं के बारे में बताया गया।
कंटिंजेंसी प्लान की जानकारी पुलिसकर्मियों को भी हो
एडीजी यातायात ने स्पष्ट रूप से निर्देश दिया कि कौन सी कंटिंजेंसी प्लान कब लगाना है। उसकी चेन आफ कमांड क्या होगी, उसके बारे में बैरिकेडिंग पर लगे पुलिसकर्मियों को भी जानकारी होना बेहद जरूरी है। उन्होंने अंतर जनपदीय एवं अंतर राज्यीय सीमाओं पर कौन सा डायवर्जन प्लान कब लगाने की आवश्यकता है, उसका निर्णय सभी जनपदीय अधिकारियों से समन्वय स्थापित करते हुए एडीजी जोन को लेने की जिम्मेदारी दी। यातायात प्रबंधन को और प्रभावी बनाने के दृष्टिगत उन्होंने पहले से ही माक ड्रिल एवं पुलिसकर्मियों का प्रशिक्षण करा लेने के भी निर्देश दिए।
टैक्सी यूनियन आदि से समन्वय स्थापित हो
Magh Mela 2026 उन्होंने सीमावर्ती जनपदों के स्टेकहोल्डर्स, जिसके अंतर्गत टैक्सी आपरेटर, टैक्सी यूनियन आते हैं, उनसे समन्वय स्थापित करते हुए डाइवर्जन प्लान साझा करने का भी सुझाव दिया। साइनेज की क्वालिटी व संख्या बढ़ाने के दृष्टिगत उन्होंने उनकी संख्या, लोकेशन और उनमें क्या मैसेज प्रदर्शित होना है, इस पर निर्णय लेने के लिए यातायात, परिवहन, आरटीओ एवं प्रशासनिक अधिकारियों को साथ मिलकर कार्य करने को कहा।
पार्किंग स्थल सभी सेक्टरों में भी विभाजित हो
Magh Mela 2026 एडीजी जोन प्रयागराज डा. संजीव गुप्ता ने ई-रिक्शा के मूवमेंट प्लान, टू व्हीलर्स के रूट प्लान व पार्किंग स्थलों की कैपेसिटी का सही आकलन करते वहां अपेक्षित व्यवस्थाएं समय पर करने के निर्देश देते हुए पार्किंग स्थलों को सभी सेक्टरों में भी विभाजित करने को कहा, जिससे श्रद्धालुओं को वाहन पार्क करने एवं निकालने में भी आसानी हो। आइसीसीसी से निगरानी करने वाले अधिकारियों की सूची बनाकर उनकी भी चेन आफ कमांड तय करने के निर्देश दिए गए।
मंडलायुक्त ने शटल बस निर्धारित रूट पर चलाने को कहा
मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल ने मेले अवधि में वीआइपी मूवमेंट के लिए बेटर प्लानिंग करने, शटल बस को निर्धारित रूट पर चलाने की बात कही, ताकि सभी सड़कों पर अनावश्यक जाम न लगे। पुलिस आयुक्त जोगेंद्र कुमार ने शटल सर्विस के लिए बसों के अलावा छोटे वाहनों जैसे मिनी बस का प्रयोग नियमानुसार कराने पर जोर दिया। इसमें यातायात नियम का पालने कराने का सुझाव दिया। बैठक में आइजी अजय कुमार मिश्र, एडिशनल कमिश्नर पुलिस डा. अजय पाल, मेला अधिकारी ऋषिराज, नगर आयुक्त साई तेजा, अपर मेला अधिकारी दयानंद प्रसाद आदि रहे।
घाटों को गूगल से इंटीग्रेट कराने पर बनी सहमति
मकर संक्रांति (15 जनवरी) एवं मौनी अमावस्या (18 जनवरी) को है। इस बीच सिर्फ तीन दिन का अंतर है। इस कारण मकर संक्रांति को आने वाली भीड़ मौनी अमावस्या तक रुक सकती है। श्रद्धालु सात मार्गों से प्रयागराज आते हैं। इसमें जौनपुर, वाराणसी, रीवा, मीरजापुर, कानपुर, लखनऊ एवं अयोध्या मुख्य हैं। इस बार स्नानार्थियों की सुरक्षा के दृष्टिगत सभी घाटों पर नंबरिंग करते हुए उनके मैप को गूगल से इंटीग्रेट कराने पर भी सहमति बनी है जिसके लिए मेला प्रशासन अब गूगल से अधिकारियों के साथ बातचीत कर रहा है। साथ ही स्नानघाटों एवं अन्य मुख्य स्थलों के चिह्नांकन के लिए गुब्बारों का भी प्रयोग किया जाएगा।

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