Magh Mela 2026 : रेलवे का क्यूआर कोड...'एक स्कैन' और सारी मुश्किलें आसान, यात्रियों को राह बताएगा, सूचनाएं देगा
Magh Mela 2026 प्रयागराज माघ मेला के लिए रेलवे ने एक विशेष क्यूआर कोड शुरू किया है, जो यात्रियों को ...और पढ़ें

Magh Mela 2026 प्रयागराज माघ मेला के लिए रेलवे की सुविधाओं को एक ही स्थान पर प्राप्त करने के लिए तैयार किया गया विशेष क्यूआर कोड। सौ. पीआरओ
HighLights
रेलवे स्टेशन से मेला क्षेत्र तक चस्पा होंगे क्यूआर कोड
डिजिट गाइड की तरह रेलवे श्रद्धालुओं की करेगा मदद
अमरीश मनीष शुक्ल, प्रयागराज। Magh Mela 2026 संगम की रेती पर माघ मेला में जुटने वाली आस्था की भारी भीड़ में अब न तो कोई रास्ता भटकेगा और न ही सूचनाओं के लिए किसी को प्लेटफार्म की पूछताछ खिड़की पर घंटों लाइन में खड़ा होना पड़ेगा।
Magh Mela 2026 उत्तर मध्य रेलवे (NCR) के प्रयागराज मंडल ने तकनीक का एक ऐसा जादुई द्वार खोला है, जो श्रद्धालुओं के सफर को बेहद सुगम बना देगा। रेलवे ने एक विशेष क्यूआर (क्विक रिस्पांस) कोड तैयार किया है, जिसे मोबाइल से स्कैन करते ही रेलवे की तमाम सुविधाओं का पिटारा आपके सामने खुल जाएगा।

Magh Mela 2026 यह तकनीक माघ मेले में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए किसी डिजिटल गाइड की तरह काम करेगी। अक्सर देखा जाता है कि मेले की गहमागहमी में यात्रियों को ट्रेन की सही लोकेशन, स्टेशन के रास्ते या मेले के विशेष स्थलों को खोजने में परेशानी होती है। अब यात्रियों को केवल अपने मोबाइल का गूगल लेंस खोलकर इस कोड को स्कैन करना होगा।
Magh Mela 2026 स्कैन करते ही स्क्रीन पर उन सभी जरूरी सेवाओं के लिंक उभर आएंगे, जिनकी तलाश एक यात्री को होती है। इसके जरिए न सिर्फ ट्रेनों और स्टेशन की सटीक जानकारी मिलेगी, बल्कि गूगल नेविगेशन की मदद से आप मेले के किसी भी खास स्थान तक आसानी से पहुंच सकेंगे।
रेलवे की यह पहल सुरक्षा और सहायता के लिहाज से भी काफी महत्वपूर्ण है। इस क्यूआर कोड के माध्यम से श्रद्धालु सीधे 'खोया-पाया केंद्र' से जुड़ सकेंगे और किसी भी आपात स्थिति में सीधे रेलवे कर्मचारियों से मदद की गुहार लगा सकेंगे।
प्रयागराज मंडल के पीआरओ अमित कुमार सिंह ने बताया कि इस सुविधा को और बेहतर बनाने के लिए मोबाइल एप को अपडेट किया जा रहा है, जो जल्द ही नए अवतार में प्ले स्टोर पर उपलब्ध होगा। फिलहाल अन्य सभी सेवाएं शुरू कर दी गई हैं ताकि यात्रियों का अनुभव यादगार और सुनहरा बने।
