ISRO के वैज्ञानिक ने गंगा को अर्पित किया 'चंद्रयान 3' का मॉडल, मिशन की सफलता के लिए मांगा आशीर्वाद
डॉ. विनोद अग्रवाल चंद्रयान मिशन के कंट्रोल सिस्टम के प्रमुख थे। 23 अगस्त 2023 को चंद्रयान मिशन की सफलता का अनुष्ठान गंगा में डुबकी लगाकर किया और चंद्रयान का मॉडल समर्पित किया। उन्होंने गंगाजी के तट पर वेदमंत्रों का जाप किया और आगे के मिशनों के लिए आशीर्वाद मांगा। डॉ. विनोद का मानना है कि विज्ञान भी परमसत्ता से ऊर्जा प्राप्त करती है जो सृष्टि की वास्तविक संचालक शक्ति है।

संतोष शुक्ल, महाकुंभनगर। पुण्यदायिनी गंगा में स्नान के दौरान श्रद्धालु सूरज देवता को जल अर्पित करते हैं, लेकिन इसरो के एक वैज्ञानिक वेदमंत्रों का जाप कर एक छोटा सा यंत्र गंगाजी को समर्पित करते हुए डुबकी लगा रहे हैं।
यह कुछ और नहीं, बल्कि 23 अगस्त 2023 को चंद्रयान मिशन की सफलता का अनुष्ठान है। वैज्ञानिक ने गंगाजी की गोद में चंद्रयान का एक मॉडल अर्पित कर आगे के मिशनों के लिए भी आशीर्वाद मांगा। ये वैज्ञानिक हैं डॉ. विनोद अग्रवाल।
डॉ. विनोद चंद्रयान मिशन का कंट्रोल सिस्टम संभाल रहे थे। विनोद कहते हैं- "विज्ञान भी परमसत्ता से ऊर्जा लेती है। यही सृष्टि की वास्तविक संचालक शक्ति है।"
IIT कानपुर से पीजी, यहीं से बने गंगा भक्त
मध्य प्रदेश में भिंड निवासी डॉ. विनोद अग्रवाल ने 1976 में आइआइटी कानपुर से इलेक्ट्रॉनिक्स में एमटेक की डिग्री की। इसी बीच गंगा नदी के महात्म्य से जुड़े और दक्षिण भारत में रहने के बावजूद दैवीय जलधारा को नमन करते रहे। इसके बाद उन्होंने बेंगलुरु के आइएससी से कंप्यूटर विज्ञान में पीजी करते हुए 1978 में वैज्ञानिक के रूप में इसरो ज्वॉइन किया।
डॉ. विनोद अपने घर और शोध कक्ष में हमेशा गंगाजल रखते हैं। कई बार यात्राओं में भी इस शुभ जल को भी ले जाते हैं। वो स्मरण करते हैं कि जब टीम के साथ चंद्रयान-3 मिशन में जुटे तो मां गंगा से सफलता का आशीर्वाद मांगा। एक संकल्प लिया कि मिशन पूरा हुआ तो 144 साल बाद प्रयागराज में उदित महाकुंभ में चंद्रयान को सांकेतिक रूप से गंगा मां को अर्पित करेंगे।
सभी उपग्रहों के मिशन में रहे अग्रणी
गंगा स्नान के बाद सेक्टर 17 स्थित पायलट बाबा के आश्रम में पहुंचे डॉ. विनोद अग्रवाल ने बताया कि उन्होंने भास्कर, एप्पल, जिओ सिंक्रोनाइज और रिमोट सेंसिंग समेत कई उपग्रहों के कंट्रोल सिस्टम के लिए काम किया है। इसरो में रहते हुए चंद्रयान के सभी मिशनों में विशेष भूमिका मिली।
वो याद करते हैं- "चंद्रयान-2 अपने लक्ष्य के पास पहुंचकर संतुलन खो बैठा था, ऐसे में चंद्रयान-3 में सॉफ्ट लैंडिंग की तकनीक और कंट्रोल सिस्टम को और अपडेट करना पड़ा। लैंडर विक्रम और रोवर प्रज्ञान को बहुत सतर्क होकर अलग किया गया। वैज्ञानिक के रूप में करीब 35 साल कार्य करने के पश्चात सेवा निवृत्त हुए।
गंगा और शिव के परम भक्त हैं विनोद
इलेक्ट्रॉनिक्स और कंप्यूटर विज्ञान की विशेषज्ञता रखने वाले डॉ. विनोद भगवान शिव और मां गंगा के परम भक्त हैं। उन्हें शिव स्त्रोत और ऋग्वेद व रामचरितमानस में वर्णित गंगा की स्तुतियां याद हैं। वो कहते हैं कि गंगा भारत की स्पंदन हैं। वो दैवीय शक्तियां धारण करती हैं।
कई शोधों के आधार पर बताते हैं कि गंगा के जल के गुणधर्म के विश्लेषण में विज्ञान आश्चर्य में पड़ जाता है। वो कहते हैं "मैं प्रयाग के सभी कुंभ मेलों में स्नान कर चुका हूं, लेकिन इस बार श्रद्धा और संकल्प नए शिखर पर खड़ा था।" यहां से वह अयोध्या में रामलला और काशी में बाबा विश्वनाथ का दर्शन करने निकल गए।
बेंगलुरु के एक विश्वविद्यालय से भी उड़ा चुके हैं उपग्रह
इसरो से रिटायर होने के बाद डॉक्टर विनोद ने बेंगलुरु के पीएस विश्वविद्यालय में शोध और विकास विभाग का कार्यभार संभाला। यहां पर भी एक छात्र के साथ मिलकर 450 किमी ऊंचाई पर चक्कर काटने वाला उपग्रह छोड़ा, जो दिन में दो बार शहर की इमेज भेजता है।
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