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    महाकुंभ में कैसे होगी भीड़ कंट्रोल? IAS विजय किरन बोले- स्नान के बाद हर 10 मिनट में होगी भक्‍तों की वापसी

    Updated: Sat, 04 Jan 2025 04:14 PM (IST)

    Mahakumbh 2025 13 जनवरी से महाकुंभ मेले की शुरूआत होने जा रही है। महाकुंभ का वैभव अभी से ही दिखाई देने लगा है। अखाड़ों की धर्म ध्वजाएं फहरा रही हैं। साधु-संतों के शिविर लगभग लग गए हैं जिनके नहीं लगे हैं उनके अंतिम चरण में हैं। संगम की रेती पर यह अलौकिक और अद्वितीय महाकुंभ मेला ठीक 45 दिन तक चलेगा।

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    महाकुंभ मेले की तैयारी को लेकर IAS व‍िजय क‍िरन से खास बातचीत।

    जागरण संवाददाता, प्रयागराज। विश्व के सबसे बड़े आध्यात्मिक जनसमागम महाकुंभ का वैभव अभी से ही दिखाई देने लगा है। इसका श्रीगणेश 13 जनवरी को पौष पूर्णिमा के शुभ अवसर पर होने जा रहा है। अखाड़ों की धर्म ध्वजाएं फहरा रही हैं। उनका छावनी प्रवेश हो रहा है। साधु-संतों के शिविर लगभग लग गए हैं, जिनके नहीं लगे हैं, उनके अंतिम चरण में हैं। संगम की रेती पर यह अलौकिक और अद्वितीय महाकुंभ मेला ठीक 45 दिन तक चलेगा।

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    तीर्थराज में इसकी तैयारी लगभग पूरी कर ली गई है। इस महायोजन को निर्बाधित ढंग से पूर्ण करवाने की जिम्मेदारी आइएएस विजय किरन आनंद को सौंपी गई है। पिछला कुंभ 2019 भी उनके नेतृत्व में हुआ था। चार पुराने कुंभों के अच्छे-बुरे पहलुओं का अध्ययन करते हुए वह लगातार दो साल से इसकी तैयारी में जुटे हैं। वह मानते हैं कि महाकुंभ मेला स्थल प्रबंधन के साथ-साथ भीड़ प्रबंधन (क्राउड मैनेजमेंट) सबसे बड़ी चुनौती है।

    60 हजार लोगों के रुकने को बना होल्डिंग एरिया

    इसके लिए वर्ष 2013 में रेलवे स्टेशन पर हुए भगदड़ से सबक लेकर 60 हजार लोगों को रोकने के लिए होल्डिंग एरिया बनाया गया है। सुरक्षा प्रबंधन के दृष्टिगत एडवांस्ड एआइ ड्रिवन डाटा एनालिटिक्स साल्यूशन सिस्टम को लागू किया गया है। वर्ष 2009 बैच के आइएएस अधिकारी विजय किरन आनंद का जन्मस्थान बंगलुरु है। बतौर चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) वह 'आंकड़ों' को बेहतर ढंग से संभालना जानते हैं।

    वहीं, यूपी सरकार में स्कूल शिक्षा के महानिदेशक, बेसिक शिक्षा के विशेष सचिव और मिड-डे मील योजना के निदेशक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रहते हुए उन्होंने बेहतर प्रबंधन (मैनेजमेंट) के कई उदाहरण पेश किए हैं। उनमें से खास है परिषदीय स्कूलों में व्यापक बदलाव। उन बदलावों से न सिर्फ स्कूलों की स्थिति बदली, बल्कि बच्चों में बेहतर शिक्षा का संचार भी होने लगा है।

    महाकुंभ मेला अधिकारी व‍िजय क‍िरन से बातचीत

    बड़े फलक पर योजनाबद्ध तरीके से काम कर बेहतर परिणाम देने में अब तक सफल रहे महाकुंभ मेला अधिकारी विजय किरन आनंद से दैनिक जागरण के मुख्य संवाददाता ज्ञानेंद्र सिंह ने भीड़ प्रबंधन व आने वाले श्रद्धालुओं के लिए जरूरी सलाह जैसे मुद्दों को लेकर बातचीत की। प्रस्तुत हैं बातचीत के प्रमुख अंश...

    प्रश्‍न: महाकुंभ में लगभग 45 करोड़ श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है। यह हमारे पड़ोसी देश सहित दुनिया के कई देशों की कुल आबादी इससे कहीं ज्यादा है। इस महाआयोजन में क्राउड मैनेजमेंट की क्या योजना है?

    उत्‍तर: महाकुंभ में भीड़ प्रबंधन सबसे महत्वपूर्ण है। विशेष तौर पर अमृत स्नान पर्वों, मकर संक्रांति, मौनी अमावस्या व वसंत पंचमी पर अत्यधिक भीड़ आने की उम्मीद पर प्रबंधन की विशेष योजना बनाई गई है। योजना में मेला प्रशासन के साथ ही प्रयागराज जिला प्रशासन, मेला व जिला पुलिस, रेलवे, परिवहन निगम को भी शामिल किया गया है। योजना के तहत आने वाली भीड़ को स्नान के बाद फौरन वापसी कराना मुख्य उद्देश्य रहेगा। शहर और मेला क्षेत्र की सड़कें चौड़ी करा दी गई हैं। आने-जाने के अलग मार्ग निर्धारित कर दिए गए हैं। संगम तट के सामने झूंसी की ओर एरावत संगम घाट तैयार करा दिया गया है। पुलिस के साथ पीएसी और अर्द्धसैनिक बलों व घुड़सवार पुलिस भी लगाई गई है। कुल 12 किमी लंबाई में स्नान घाट बनाए गए हैं, जहां पुलिस, जल पुलिस के साथ ही गोताखोरों को भी लगाया गया है।

    प्रश्‍न: कहा जा रहा है, इस बार एआइ व अन्य उन्नत तकनीक का बड़े पैमाने पर प्रयोग किया जा रहा है। कौन-कौन सी तकनीक नवाचारों का उपयोग किया जा रहा है?

    उत्‍तर: महाकुंभ भारत का बड़ा और ऐतिहासिक आयोजन है। इसमें करोड़ों लोग शामिल होंगे। डिजिटल युग ने महाकुंभ को और विशाल व भव्य बना दिया है। यह महाकुंभ अत्याधुनिक तकनीक और आस्था का संगम माना जा रहा है। सरकार तकनीक का ज्यादा प्रयोग कर रही है। इससे श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव मिल सके, साथ ही सुरक्षा व्यवस्था भी बेहतर रहे। श्रद्धालुओं के रहने से लेकर उनके सुरक्षा तक के लिए तकनीक का उपयोग किया गया है। महाकुंभ में सुरक्षा प्रबंधन के दृष्टिगत एडवांस्ड एआइ ड्रिवन डाटा एनालिटिक्स साल्यूशन सिस्टम को लागू किया गया है। इस सिस्टम को लागू करने से महाकुंभ पुलिस का सर्विलांस कई गुना अधिक प्रभावी और मजबूत हो जाएगा। इससे सुरक्षा प्रबंधन के दृष्टिगत भीड़ प्रबंधन समेत विभिन्न पहलुओं की विवेचना करते हुए घटनास्थल व चिह्नित क्षेत्रों के रियल टाइम डाटा को एनालाइज कर प्रभावी स्ट्रैटेजी बनाने में मदद मिलेगी। इस सिस्टम और सर्विलांस के लिए विशिष्ट टीम गठित की गई है।

    प्रश्‍न: आप सीए भी हैं। क्या 'आंकड़ों' को मैनेज करने का जो प्रशिक्षण बतौर सीए आपको मिला, क्या इस प्लानिंग में भी वह उपयोगी है, यानी कोई मदद मिल रही है क्या?

    उत्‍तर: देखिए, यह धर्म धरा है। यहां धर्म, अध्यात्म के साथ तकनीक का भी संगम हो रहा है। पवित्र त्रिवेणी के तट पर बसाए गए महाकुंभ नगर अस्थायी जनपद में आंकड़े उतने ही महत्वपूर्ण हैं, जितने अन्य जिलों में होते हैं। महाकुंभ जैसे आयोजन में आंकड़े तो अहम होते ही हैं, वह चाहे आने वाले श्रद्धालुओं का आंकड़ा हो या फिर जमीन व सुविधाओं से लेकर हर काम में आंकड़े अहम होते हैं। बतौर चार्टर्ड एकाउंटेंड आंकड़ों को समझने में आसानी हुई।

    प्रश्‍न: हाल ही में तेलुगू फिल्म स्टार अल्लू अर्जुन की फिल्म के दौरान भीड़ की वजह से एक की मौत हो गई। छोटे-छोटे मेलों में भी कई बार भगदड़ जैसी स्थिति बन जाती है। कहां चूक हो जाती है, जिससे इस तरह की घटनाएं होती हैं?

    उत्‍तर: महाकुंभ का क्षेत्रफल विशाल है। चौड़ी सड़कें हैं, स्नान घाटों का भी क्षेत्र बढ़ाया गया है। पांटून पुलों की संख्या बढ़ा दी गई है। भगदड़ जैसी स्थिति उत्पन्न ही न होने पाए, इसके लिए व्यापक प्रबंध किए गए हैं। पूरे प्रदेश से लगभग 20 हजार पुलिसकर्मी लगाए गए हैं। इसके अलावा अर्द्धसैनिक बलों, पीएसी के लगभग 20 हजार जवान तैनात किए गए हैं, जो भीड़ न इकट्ठा होने पाए, इस पर नजर रखेंगे और कार्रवाई करेंगे। भीड़ पर नजर रखने के लिए शहर से लेकर महाकुंभ मेला क्षेत्र में उच्च क्षमता के 2850 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनका डिस्प्ले प्रयागराज पुलिस लाइन के साथ ही महाकुंभ मेला में इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर में होगा, जिसमें एडीएम व एएसपी रैंक के अफसरों की ड्यूटी लगाई गई है। उनके साथ विशेषज्ञ स्टाफ की तैनाती की गई है, जिनकी पैनी नजर होगी और जहां भी भीड़ बढ़ेगी, वहां तैनात अधिकारियों को फौरन सूचना दी जाएगी।

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    प्रश्‍न: महाकुंभ में ऐसी चूक से बचने के लिए क्या तैयारियां की गई हैं?

    उत्‍तर: महाकुंभ में इस तरह की चूक से बचने के लिए फुलप्रूफ प्लानिंग की गई है। सबसे महत्वपूर्ण योजना यह है कि महाकुंभ मेला के आसपास के रेलवे स्टेशनों के बाहर होल्डिंग एरिया विकसित किए गए हैं, जिनमें 60 हजार से ज्यादा यात्रियों को एक साथ रोका जा सकेगा। इसी तरह पार्किंग स्थलों पर चार से पांच लाख लोगों को रोका जा सकेगा। वर्ष 2001, 2007, 2013 व 2019 के कुंभ के आयोजनों का अध्ययन कराया गया है।

    प्रश्‍न: क्या तैयारियों के लिए पुराने कितने कुंभ आयोजनों का अध्ययन किया, क्या कोई विशेष आयोजन, जिस पर आपने सबसे ज्यादा फोकस किया?

    उत्‍तर: वर्ष 2013 में प्रयागराज रेलवे स्टेशन पर भगदड़ की घटना हुई थी, उसकी पुनरावृत्ति न हो, इसके लिए स्टेशन में प्रवेश और निकास के अलग मार्ग दिए गए हैं। सबसे ज्यादा फोकस अमृत (शाही) स्नान पर्वों पर है, जिस दिन पूरी सतर्कता रहेगी।

    प्रश्‍न: आप कितने दिन से इसकी तैयारी कर रहे हैं। भारी भीड़ को नियंत्रित करने और ट्रैफिक प्रबंधन के लिए क्या विशेष योजनाएं बनाई गई हैं। क्या कोई डेडिकेटेड टीम बनाई गई है। क्या टीम को कोई खास तरह का प्रशिक्षण दिया गया है?

    उत्‍तर: लगभग दो वर्षों से महाकुंभ की तैयारियां चल रही हैं। प्रयागराज शहर और आसपास के क्षेत्रों में बुनियादी ढांचा से लेकर सौंदर्यीकरण और चौराहों व सड़कों का चौड़ीकरण, रेलवे ओवर ब्रिज, फ्लाईओवर, हाईवे को फोरलेन व सिक्सलेन कराया गया। रेलवे स्टेशनों के साथ बस अड्डों का विस्तार कराया गया है। भीड़ प्रबंधन और यातायात प्रबंधन के लिए प्रशिक्षित डेडिकेटेड टीम भी लगाई गई है। खासतौर पर संगम व इसके आसपास के घाटों पर आइएएस, आइपीएस अफसरों के साथ एडीएम व एसडीएम लगाए गए हैं। अन्य स्नान घाटों पर एडीएम व एसडीएम स्तर के अधिकारियों के साथ फोर्स तैनात रहेगा।

    प्रश्‍न: पिछली बार भी कुंभ की जिम्मेदारी आपके पास थी। इस बार आपको फिर यह जिम्मेदारी दी गई है। उस समय क्राउड मैनेजमेंट के लिए क्या किया था। उज्जैन और सिंहस्थ और नासिक में होने वाले कुंभ से कोई खास प्रयोग, जिसका उपयोग इस बार के महाकुंभ में किया जा रहा है?

    उत्‍तर: कुंभ 2019 में सबसे ज्यादा भीड़ मौनी अमावस्या पर हुई थी। एरावत स्नान घाट पर काफी भीड़ हुई थी। प्रयाग जंक्शन समेत प्रयागराज जंक्शन पर भी भीड़ काफी ज्यादा हो गई थी। तब की स्थितियों को देखते हुए इस बार और बेहतर योजनाएं बनाई गई हैं। भीड़ प्रबंधन को लेकर सबसे अहम यह तैयारी की गई है कि स्नान के बाद स्टेशनों पर हर समय 200 से ज्यादा ट्रेनें खड़ी रहेंगी, जिनसे फौरन स्नानार्थियों को वापस भेजने की तैयारी रहेगी। इसी तरह हर 10 मिनट पर 600 से ज्यादा बसों से वापसी की तैयारी की गई है।

    प्रश्‍न: क्राउड मैनेजमेंट के क्षेत्र में क्या भारत अब दुनिया को प्रशिक्षित करने के लिए तैयार है। कोई बड़ी योजना बताएं?

    उत्‍तर: भीड़ प्रबंधन के क्षेत्र में भारत पहले भी दुनिया में सबसे आगे रहा। यहां कुंभ और महाकुंभ में सबसे ज्यादा भीड़ एक दिन में इकट्ठा होती है। सनातन धर्म के साथ ही भारतीय संस्कृति, सभ्यता और परंपरा को ऊंचाई देने वाले महाकुंभ की आभा से पूरी दुनिया आह्लादित होगी।

    प्रश्‍न: मेला की तैयारियों के दौरान सबसे खास अनुभव क्या है ?

    उत्‍तर: तय समय पर मेला कार्य का काम का पूरा होना। यही सबसे खास बात है। मेले के नियोजन से लेकर क्रियान्वयन में पूरी मेला टीम का योगदान है।

    प्रश्‍न: मेला को लेकर कोई और व्यवस्था जो आप साझा करना चाहें?

    उत्‍तर: इस महाकुंभ में कई ऐसे आकर्षण हैं, जो श्रद्धालुओं के साथ पर्यटकों को भी अपनी ओर खींचा। पूरे मेला क्षेत्र में 68 हजार एलईडी से दूधिया रोशनी की व्यवस्था की गई है। रात में मेला क्षेत्र ऐसे दिखाई दे रहा है जैसे तारे जमीन पर उतर आए हों। खासतौर पर संगम क्षेत्र तो विहंगम दिखाई देता है। नए यमुना पुल, शास्त्री ब्रिज, किला समेत कुल 11 स्थानों पर फसाड लाइटिंग (कुछ खास रंगों की रोशनी में जगमगाती बड़ी या ऊंची इमारतें) कराई गई है। पुराने यमुना पुल पर भी आकर्षण लाइटिंग रेलवे की ओर से कराई गई है। किले की दीवार पर लेजर शो, हवाई संगम दर्शन, बेसेल व मिनी क्रूज भी पर्यटकों को आकर्षित करेंगे। शहर के चौराहों का सौंदर्यीकरण कराया गया। प्रमुख सड़कें भी चौड़ी कराई गई हैं।

    प्रश्‍न: भविष्य के महाकुंभों को और बेहतर बनाने के लिए आपकी दृष्टि क्या है?

    उत्‍तर: आने वाले महाकुंभों के लिए और भी प्रबंध की आवश्यकता है। तब तक और भी तकनीक विकसित हो जाएगी। वर्ष 2025 के कुंभ का अनुभव भी सबके सामने होगा। इन सभी के मद्देनजर उस समय और बेहतर व्यवस्थाएं होंगी।

    प्रश्‍न: महाकुंभ में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए क्या सलाह है?

    उत्‍तर: महाकुंभ में आने वाले सनातनी धर्मावलंबियों से सिर्फ इतना कहना है कि वे सुरक्षित आएं और उसी तरह वापस हों। इसके लिए वे सतर्कता अवश्य बरतते रहें। मेला क्षेत्र में प्रशासन और पुलिस सदैव मदद के लिए तैयार है।

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