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    हाई कोर्ट ने अविवाहित बेटी की फैमिली पेंशन रोकने का आदेश किया रद, BSA फर्रुखाबाद को दिए ये निर्देश

    Updated: Sun, 04 Jan 2026 02:39 AM (IST)

    इलाहाबाद हाई कोर्ट ने फर्रुखाबाद के जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी द्वारा 25 वर्ष से अधिक आयु की अविवाहित बेटी की पारिवारिक पेंशन का दावा खारिज करने का आदे ...और पढ़ें

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    विधि संवाददाता, प्रयागराज। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी फर्रुखाबाद द्वारा 25 वर्ष आयु से अधिक अविवाहित बेटी की पारिवारिक पेंशन के दावे को निरस्त करने संबंधी आदेश रद कर दिया है। कोर्ट ने बाद के शासनादेशों के आलोक में पुनर्विचार कर दो माह में नए सिरे से आदेश पारित करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति प्रकाश पाडिया ने अनुराधा अहिरवार की याचिका स्वीकार करते हुए दिया है।

    बीएसए ने 1989 के पुराने शासनादेश का हवाला देते हुए याची को पारिवारिक पेंशन देने से इन्कार कर दिया था, जबकि इसके बाद दो शासनादेश जारी किए गए हैं। याची के वकील केके केसरवानी ने तर्क दिया कि सरकार ने बाद में आठ दिसंबर 2008 और तीन दिसंबर 2012 को नए शासनादेश जारी किए थे। इसके तहत याची पेंशन की हकदार है।

    विभाग द्वारा प्रस्तुत निर्देशों में इन नए आदेशों का कोई जिक्र नहीं था। कोर्ट ने कहा, ‘विभाग ने याचिका में दिए गए तथ्यों को पढ़े बिना ही दिशा निर्देश तैयार कर दिए, जो कि दुर्भाग्यपूर्ण है।’ विभाग की ओर से पेश वकील ने भी स्वीकार किया कि पिछला आदेश रद कर नया आदेश पारित करने की अनुमति दी जाए।

    अदालत ने 21 जुलाई 2025 के विवादित आदेश को रद करते हुए जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, फर्रुखाबाद को निर्देशित किया है कि वे याची को सुनवाई का अवसर प्रदान करें। साथ ही अगले दो महीने के भीतर कानून और कुमारी हसीन बी केस में स्थापित विधि के अनुसार नया आदेश पारित करें।