यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 04, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
महाकुंभ 2025 में RSS की भी होगी अहम भूमिका, 1800 गंगा सेवा दूत रखेंगे स्वच्छता का ख्याल, बन सकता है वर्ल्ड रिकॉर्ड
Mahakumbh 2025 महाकुंभ को स्वच्छ बनाने के लिए Rashtriya Swayamsevak Sangh ने भी कमर कस ली है। 1800 गंगा सेवा ...और पढ़ें

जागरण संवाददाता, महाकुंभनगर। दिव्य, भव्य, नव्य महाकुंभ को स्वच्छ बनाने के लिए सरकार के साथ आरएसएस ने भी कमर कस ली है। 1800 गंगा सेवा दूत मोर्चा संभालने की तैयारी में जुट गए हैं। उन्हें 250-250 के समूह में बांटकर प्रशिक्षित किया जा रहा है। ये सभी मेला क्षेत्र में पालीथिन के प्रयोग को रोकने में सहयोग देंगे। विशेष तौर पर शौचालय, सड़कों की सफाई व्यवस्था, टेंट सिटी का निरीक्षण करेंगे।
अगर कहीं भी गंदगी व पालीथिन का प्रयोग होता मिलेगा तो इन्फार्मेशन, कम्युनिकेशन टेक्नोलाजी (आईसीटी) सिस्टम के माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकते हैं। जनमानस को पर्यावरण के प्रति सचेत भी करेंगे। शहर में सभी पालीथिन के थोक विक्रेताओं को हिदायत दी गई है कि वे पालीथिन की सप्लाई न करें। प्रमुख स्नान पर्व पर स्थानीय उद्योग अस्थायी रूप से बंद रखे जाएंगे जिससे गंगा घाटों की स्वच्छता एवं पवित्रता बनी रहे।
विभिन्न जगहों पर खड़े रहेंगे स्वयं सेवक
आरएसएस के पर्यावरण संरक्षण गतिविधियों के संयोजक डा. अमित पांडेय ने शुक्रवार को अनौपचारिक बातचीत में बताया कि संगठन की ओर से मेला क्षेत्र में सक्रिय स्वयंसेवक जगह जगह पर खड़े रहेंगे। श्रद्धालुओं और दुकानदारों से कहेंगे कि अपनी पालीथिन हमे दें और बदले में झोला ले लें। देशभर से थालियां और थैले एकत्र करने का अभियान चलाया जा रहा है। अब तक 15 लाख थालियां व थैले आ चुके हैं।
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लिमका बुक आफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में मिल सकती है जगह
इसमें से एक लाख 50 हजार का वितरण हो चुका है। कुल 21 लाख थालियां वितरित करने का लक्ष्य रखा गया है। इस अभियान को लिमका बुक आफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में भी शामिल किया जा सकता है। थैले एकत्र करने के साथ प्रदेश के 75 जिलों सहित बिहार, मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान, ओडिशा, झारखंड, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, कश्मीर, कन्याकुमारी और उत्तराखंड की महिलाओं को तमाम जगहों पर जिम्मेदारी दी गई है कि वे थैला बनाएं।
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इकोलाजी सिस्टम को बचाने पर जोर
इसके अतिरिक्त दोने-पत्तल, कुल्हड़ आदि भी बनवाए जा रहे हैं। इन्हें मेला क्षेत्र में बांटा जाएगा। संगठन ने तय किया है कि सनातनी संस्कारों की जड़ों को गहरा करने के साथ इकोलाजी सिस्टम के बचाने पर भी जोर दिया जा रहा है। इसी के जरिए हरितकुंभ की परिकल्पना को मूर्तरूप दिया जाएगा। अभियान को बल देने के लिए संगठन के अखिल भारतीय पर्यावरण संयोजक गोपाल आर्य, अजय व अन्य पदाधिकारियों ने शहर में डेरा डाल दिया है।
