Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck

    प्रतापगढ़ के किसानों को आंवले का उचित दाम नहीं मिल पा रहा, मेहनत पर पानी फिरता देख परेशान हैं

    By Jagran News Edited By: Brijesh Srivastava
    Updated: Mon, 05 Jan 2026 06:18 PM (IST)

    प्रतापगढ़ के किसान आंवले की उचित कीमत न मिलने से परेशान हैं। लगभग 7 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में 86 हजार मीट्रिक टन आंवला का उत्पादन होता है, लेकिन किसान ...और पढ़ें

    News Article Hero Image

    प्रतापगढ़ में किसान इसलिए परेशान हैं, क्योंकि उन्हें आंवला का उचित दाम नहीं मिल पा रहा है। 

    संसू, जागरण, प्रतापगढ़। जनपद की पहचान आंवले से है। यहां के आंवले को अमृत फल के रूप में जाना जाता है। किसानों ने मेहनत करके आंवले की बाग तैयार किया। दवाओं का छिड़काव कराते हैं। साल भर की मेहनत के बाद पेड़ में आंवला तैयार होता है। उन्हें उसका उचित दाम नहीं मिल पाता। व्यापारी और कंपनी के लोगों को कम दाम में आंवला देना विवशता है।

    जनपद में तीन हजार 417 से अधिक किसानों के पास आंवले के बाग है। सात हजार 83 हेक्टेयर में फैले बाग में हर साल लगभग 86 हजार मीट्रिक टन आंवले का उत्पादन होता है। इसमें बनारसी, चकैया, कंचन, कृष्णा, फ्रांसिसी, नरेंद्र समेत दर्जन भर किस्म के आंवले की पैदावार होती है। सरकार ने एक जनपद-एक उत्पाद योजना में जिले से आंवले का चयन किया है। आंवले को वन उपज से मुक्त कर कृषि उपज की श्रेणी में रखा गया है।

    महुली मंडी से देश के विभिन्न इलाकों में आंवला की सप्लाई जा रही है। प्रतिदिन 70-80 ट्रक आंवला दूसरे राज्यों में भेजा जा रहा है। इसमें कारोबारी अपने हिसाब से आंवले का रेट निर्धारित कर खरीदारी कर रहे हैं। आठ से नौ रुपये किलो के हिसाब से आंवला खरीदा जा रहा है, जबकि इसकी बिक्री 16 से 20 रुपये किलो हो रही है।

    इससे कम दाम में आंवला खरीदकर उसे मनमाने दाम में बेचने से किसानों को नुकसान पहुंच रहा है। आंवले से कैंडी, मुरब्बा, अचार, बर्फी, लड्डू, चूरन आदि उत्पाद तैयार होता है। देश-विदेश तक इसकी मांग है।