17 वर्षीय देव ने तालाबों को पुनर्जीवित करने की छेड़ी मुहिम, गांववासियों को मिल रहा सिंचाई के लिए पानी
12वीं कक्षा के छात्र देव करण ने दो जिलों के तालाबों को पुनर्जीवित करने का बीड़ा उठाया है। उन्होंने एक IoT-आधारित किट विकसित की है जो पानी की गुणवत्ता ...और पढ़ें
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तालाब किनारे बैठे देव करन पैरामीटर्स को मापते हुए सौ.स्वजन
चेतना राठौर, नोएडा। दो जिले के तालाबों को पुनर्जीवितकरने के लिए 12वीं कक्षा के छात्र देव करन ने एक मुहिम छेड़ी है। हजारों की आबादी को पानी देकर जीवन देने वाले तालाब सांसें खो चुके हैं। ऐसे तालाबों को चिन्हित कर उन्हें जीवंत कर रहे हैं।
17 साल की उम्र में देव ने शिक्षकों की मदद से आइओटी बेस्ड डिवाइस तैयार की है। जो एक लो-कास्ट वाटर-क्वालिटी मॉनिटरिंग किट है। किट को तालाब में डालकर पानी के पैरामीटर्स को मापा जाता है। किट की मदद से पैरामीटर्स को मोबाइल/लाग में देखा जाता है।
तालाब में कचरा, नाले का पानी, गाद, रनआफ,पीएच,टीडीएस,बीडीओक्लोरीन, डिसाल्व आक्सीजन का स्तर बढ़ना या घटना पैरामीटर में अचानक बदलाव पर सुधार करने के लिए सफाई की जाती है। बता दें कि दादरी क्षेत्र के बंबावड़ गांव में बिस्लेरी कंपनी ने मदद की। उसके सीएसआर फंड से तालाब को जीवंत किया।
ग्रामीण अब तालाब के पानी का उपयोग सिंचाई और अन्य कार्यों में कर रहे हैं। साथ ही गौतमबुद्ध नगर और गाजियाबाद के 2 गांवों में 10 तालाब को नियमित देखरेख कर उन्हें साफ कर चुके हैं। उनके आसपास के क्षेत्रों का साफ कर पानी को स्वच्छ करने के लिए कार्य भी कर रहे हैं।
देव और उनकी टीम ने उत्तर प्रदेश के दर्जनों विलुप्त हो चुके तालाबों को फिर से जीवंत कर दिया है। उन्होंने गांवों में ‘तालाब एंबेस्डर’ बनाए। बच्चे जो पहले तालाब के पास से नाक बंद कर निकल जाते थे, आज खुद कचरा निकालते हैं, डाटा लेते हैं और तालाबों को जीवंत कर गर्व महसूस करते हैं।
सेक्टर-130 स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल नोएडा के 12वीं के छात्र देव करण बताते हैं कि दो साल पहले स्कूल ट्रिप पर एक मरता हुआ तालाब देखा। जो कचरे से पटा, बदबूदार, नाममात्र का पानी जिसे देख मिशन ‘पोंडोर’ शुरू किया। देव को अपने कार्य को सफल बनाने यूथ एक्टिविस्ट समिट (संयुक्त राष्ट्र, जिनेवा) से ग्रांट मिली है। जिससे वे तालाबों को स्वच्छ बनाने के लिए कई पैरामीटरर्स पर कार्य कर रहे हैं। इस ग्रांट से वर्ष 2026 में कई तालाबों को स्वचछ करना है।
तालाब जीने का सहारा
तालाब भारत का सेफ्टी नेट रहे हैं। सूखे के दौरान तालाब पीने के पानी के लिए इस्तेमाल होते हैं, वे बाढ़ रोकने में मदद करते हैं, ग्राउंडवाटर को पोषण देते हैं, बायोडायवर्सिटी को सहयोग करते हैं और कार्बन सीक्वेस्ट्रेशन में भी मदद करते हैं। वे दिखने में छोटे क्लाइमेट वारियर्स हैं। फिर भी वे तेज़ी से गायब हो रहे हैं।
ग्राम पंचायतें कर रही मदद
गांव के तालाबों को स्वच्छ करने के लिए ग्राम पंचायत और स्थानीय प्रशासन की मदद से कार्य कर रहे हैं। साथ ही सीएसआर,शासकीय विभागों के साथ मिलकर कार्य करने के लिए बात चल रही है।

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