नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर 'अव्यवस्थाओं' का जाम, अफसरों की खराब इंजीनियरिंग का खामियाजा भुगत रहे वाहन चालक
Noida Greater Noida Expressway पर खराब इंजीनियरिंग और अव्यवस्थाओं के कारण चालकों को जाम और सुरक्षा संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। दैनिक जाग ...और पढ़ें

नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर गलत लेन में चलती बस और ट्रक। जागरण
सुमित सिसोदिया, नोएडा। सुगम एवं सुरक्षित और बिना घबराहट व आनंददायक सफर के लिए बना नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेस-वे (Noida Greater Noida Expressway) वाहन चालकों के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की अव्यवस्थाओं के जाम का कारण बना हुआ है। खराब इंजीनियरिंग से चालक और यात्रियों की सुरक्षा भी रामभरोसे है।
पहले भी एक्सप्रेसवे की खामियों को अधिकारियों के सामने उठाया गया तो जिम्मेदारों ने सर्वे कराकर जल्द समाधान की बात कहकर अपना पलड़ा झाड़ दिया। हकीकत यह है कि वर्षों बीतने के बावजूद आज तक एक्सप्रेसवे पर चालकों की सुरक्षा के लिए कोई प्रयास हुए और न ही अव्यवस्थाओं से सबक लेकर उन्हें ठीक कराया गया।
एक्सप्रेसवे पर प्रतिदिन एक से सवा लाख वाहन गुजरते हैं। चालकों की सुरक्षा का पैमाना और नियमों की सच्चाई जानने के लिए दैनिक जागरण ने पड़ताल की तो तमाम प्वाइंट पर खामियां देखने को मिलीं।
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नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर सेक्टर-82 के पास बने कट के पास साइन बोर्ड पर नहीं लगे है, विज्ञापन का बोर्ड लगा है। जागरण
अंडरपास में वाहनों का दबाव
सेक्टर-98 पुलिस चौकी के पास हाजीपुर अंडरपास बना है। यहां सेक्टर-44, 45, 46, 47, 48, 96, 97, 98, 99, 124, 125, 126, 127, 128, 129, 130, 131, 132, 133, 134, 135 व 136 समेत आसपास के सेक्टर एक्सप्रेसवे से जुड़े हैं। इनके वाहनों का दबाव अंडरपास में पड़ता है।
इलाके और औद्योगिक क्षेत्रों में कनेक्टिविटी बेहतर करने के बजाय अंडरपास मौजूदा समय में छोटा होने से यातायात दबाव नहीं झेल पाता है। यहां चार लेन का एक चौड़ा अंडरपास बनाना चाहिए, ताकि वाहनों का दबाव और बढ़ती आबादी के कारण लगने वाले जाम से राहत मिल सके।
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वहीं, सेक्टर-142-168 को जोड़ने के लिए एडवांट के सामने अंडरपास बना है। यहां एक्सप्रेसवे पर ऊपरी हिस्सा दुघर्टना प्रभावित क्षेत्र है। क्योंकि सड़क किनारे दीवारे छोटी हैं, जिनसे वाहन टकराने पर नीचे गिर सकती हैं, जाे कभी भी अंडरपास में बड़े हादसे को अंजाम दे सकती है। तीसरा अंडरपास सफीपुर और सेक्टर-150 को जोड़ता है।
दो अंडरपास बनाने का प्रस्ताव
एक्सप्रेसवे पर सेक्टर-128 सुल्तानपुर और सेक्टर-155 के सामने अंडरपास बनने हैं। सुल्तानपुर के सामने सेक्टर-128, 129, 132 और सेक्टर-108 के बीच इसे बनाया जाना है। दूसरा, अंडरपास सेक्टर-145, 146, 155, 159 और 168 के बीच बनाया जाना है। इनकी अनुमानित लागत 139 करोड़ रुपये रखी गई है।
एक्सप्रेसवे पर 11 सेक्टर व सोसायटी व 30 गांवों जोड़ने के लिए छोटे वाहन या पशुओं के निकलने के लिए अंडरपास बने हैं। मगर अब यहां से वाहन चालक भी निकलने का प्रयास करते हैं जिससे वाहनों की लंबी कतार लगी रहती है। इसके अलावा मानसून और सीवर ओवरफ्लो के कारण छोटे अंडरपास में जलभराव हो जाता है।
एक्सप्रेसवे पर इन-आउट का रास्ता भी छोटा
एक्सप्रेसवे पर हाजीपुर और विभिन्न सेक्टरों में जाने के लिए इन व आउट के रास्ते बने हैं लेकिन मानक के अनुसार, इनकी चौड़ाई काफी छोटी है। एक्सप्रेसवे पर वाहन चालक करीब 100 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से फर्राटा भरते हैं लेकिन, चालकों को एक्सप्रेसवे से सेक्टर में आने या बाहर निकलने के लिए वाहनों की गति धीमी करनी पड़ती है। कई बार इन रास्तों पर सामने से वाहनों के आने से दुघर्टना की आशंका बनी रहती है। सेक्टर-82 और सेक्टर-93 में पंचशील के पास भी इन प्वाइंट की यही स्थिति है।
इन-आउट रास्तों के पास लगे दिशासूचक बोर्ड
जिम्मेदारों की लापरवाही देखे तो उन्होंने एक्सप्रेसवे से सेक्टर में आने या यहां से एक्सप्रेसवे पर पहुंचने वाले रास्तों पर जो दिशा-सूचक बोर्ड लगाए हैं, वह प्वाइंट के बिल्कुल किनारे पर लगे हैं। इससे वाहन चालकों को दिक्कत होती है। कई बार चालक तेज गति में इन रास्तों से आगे निकल जाते हैं।
समाजसेवी एसके माहेश्वरी ने नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों से इन और आउट वाले प्वाइंटों पर सभी दिशासूचक बोर्ड को एक किलोमीटर या 500 मीटर पहले लगाने की मांग की थी जिससे चालकों को एक्सप्रेसवे पर चढ़ने या उतरने में किसी तरह की दिक्कत न हो।
एक्सप्रेसवे पर पेड़ों से ढक गए दिशासूचक बोर्ड
पड़ताल में देखा कि एक्सप्रेसवे पर सड़क किनारे या सेंट्रल वर्ज में दिशासूचक या चेतावनी वाले जितने भी बोर्ड लगाए गए हैं। उनमें से अधिकांश बोर्ड पेड़ों के ढक गए हैं। इससे फर्राटा भरते वाहन चालकों को दिशा का पता नहीं चलता है।
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हैरत की बात है कि एक्सप्रेसवे पर ट्रक, बस और अन्य मालवाहक वाहनों के चालक धड़ल्ले से नियमों का उल्लंघन कर लेन बदल कर फर्राटा भरते हैं। उन पर लगाम लगाने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों की तरफ से कठोर कार्रवाई नहीं की जाती है।
एफओबी और सार्वजनिक शौचालयों के पास नहीं है यात्रियों के लिए जगह
एक्सप्रेसवे पर सेक्टर-14ए, दलित प्रेरणा स्थल सेक्टर-16, महामाया, सेक्टर 126, 127, 128, 93, 142, 144, 145, 146, 147, शहीद भगत सिंह एफओबी, सेक्टर -148 में एक्सप्रेसवे पार करने के लिए एफओबी बनाए गए हैं। इनके अलावा सार्वजनिक शौचालयों के पास यात्रियों के बस या गाड़ी से उतरने के लिए स्टैंड नहीं बनाए गए हैं। इससे यात्रियों के साथ दुघर्टना या हादसा होने का खतरा बना रहता है।
महामाया से परी चौक तक नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे की दोनों ओर से लंबाई 49.12 किलोमीटर है। यहां 15 से ज्यादा आइटीएमएस और यूनिपोल क्रैश बैरियर के अंदर हैं। एक्सप्रेसवे पर 25 से अधिक स्थानों पर साइन बोर्ड पेड़ों से ढके हैं। तमाम यूनिपोल के बनाए गए हैं वो बाहर लगने से हादसे का कारण बने हैं।
नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर जितने प्वाइंट पर जाम की स्थिति रहती है। एंट्री व एग्जिट प्वाइंट को चौड़ा करने, दिशासूचक बोर्ड को ठीक करने समेत अन्य प्वाइंटों पर प्राधिकरण के अधिकारियों को बैठक में बता दिया गया है। अधिकारियों ने एक एजेंसी से सर्व कराकर समाधान कराने की बात कही है।
प्रवीण रंजन सिंह- डीसीपी यातायात
एक्सप्रेसवे पर जितने भी एंट्री और एग्जिट प्वाइंट व अंडरपास समेत अन्य प्वाइंट पर जाम की स्थिति होती है। वहां समाधान के लिए एक एजेंसी सर्वे करा रहे हैं। रिपोर्ट आने पर आगे कार्रवाई की जाएगी।
एसपी सिंह- महाप्रबंधक, नोएडा प्राधिकरण

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