Noida News: खाकी के संरक्षण में महिला पुलिसकर्मी के पति ने लोगों से की करोड़ों की ठगी
Noida News 50 से अधिक लोगों से इंश्योरेंस पालिसी का बोनस देने के नाम पर ठगी हुई। इंश्योरेंस का बोनस देने के नाम पर लोगों को फंसाया जाता था। जानकारी के मुताबिक बीते दो साल से लगातार ठगी की घटना को अंजाम दिया जा रहा है।

ग्रेटर नोएडा, जागरण संवाददाता। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में खाकी के संरक्षण में महिला पुलिसकर्मी का पति अपने साथियों के साथ मिलकर करोड़ों की ठगी कर रहा है। नाम बदलकर कई घटनाओं को अंजाम दे चुका है। आरोपितों ने इंश्योरेंस कंपनी का डाटा चोरी कर उनके ग्राहकों को झांसा दिया कि वह उनके द्वारा करवाए गए इंश्योरेंस का बोनस देंगे।
बोनस देने के नाम पर आरोपितों ने पीड़ितों को जाल में फंसाया। पिछले दो साल से लगातार ठगी की घटना को अंजाम दिया जा रहा है। ठगी गई रकम की निकासी करने के लिए गरीब व्यक्ति को रुपये का लालच देकर बैंक में खाता खुलवाया गया। गरीब व्यक्ति के खाते में ठगी की रकम मंगवाने के बाद आरोपित उसे निकाल लेते हैं, ताकि पुलिस को उन पर शक ना हो।
मामले में साइबर सेल की भूमिका संदिग्ध
जब कार्रवाई हो तो गरीब व्यक्ति ही पकड़ा जाए। मुख्य आरोपित दीपक की पत्नी पुलिसकर्मी है और वर्तमान में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के शामली जिले में तैनात है। सूत्रों ने दावा किया है कि मुख्य आरोपित पूर्व में पुलिस के हत्थे चढ़ा, लेकिन उसे रिश्वत लेकर छोड़ दिया गया। मामले में ग्रेटर नोएडा जोन के साइबर सेल की भूमिका संदिग्ध है।
दरअसल, भेल (भारत हेवी इलेक्ट्रिकल लिमिटेड) हरिद्वार से सेवानिवृत्त अधिकारी 75 वर्षीय अशोक शर्मा से भी ठीक इसी तरह आरोपितों ने कुल 52 लाख की ठगी की। मामले की रिपोर्ट दादरी कोतवाली में दर्ज हुई है। अशोक शर्मा ग्रेटर नोएडा स्थित सोसायटी में रहते हैं। आरोपितों ने उनके जीवनभर की कमाई हड़प ली है।
पुलिस यदि इस मामले में गहराई तक जांच करती है तो कई चौंकाने वाले नामों का पर्दाफाश हो सकता है। सूत्रों ने दावा किया है कि जोन की साइबर सेल ने मामले में बड़ा खेल किया था। मुख्य आरोपित तक पूर्व में साइबर सेल पहुंच गई थी, लेकिन मोटे लेन-देन के बाद उसे छोड़ दिया गया।
रक्षाबंधन के दौरान हुई डील, अब मांग रहे थे आइफोन
सूत्रों ने दावा किया है कि जोन की साइबर सेल ने आरोपितों को रक्षाबंधन के दौरान गाजियाबाद में पकड़ लिया था। मौके से पांच लाख रुपये भी बरामद हुए थे। गाजियाबाद में आरोपित ठगी का काल सेंटर चला रहे थे। उस दौरान आरोपितों पर कार्रवाई करने के बजाय उन्हें मौके से छोड़ दिया गया। उस दौरान 25 लाख की डिमांड की गई।
मामला 10 लाख में तय हुआ। आठ लाख प्रभारी को मिले और शेष रकम टीम में बंटी। जिस पुलिसकर्मी द्वारा आरोपितों से रिश्वत की रकम ली गई थी, वह वर्तमान में भी आरोपितों से आइफोन की डिमांड कर रहे थे। सूत्रों ने दावा किया है कि गौतमबुद्ध नगर कमिश्नरेट पुलिस पूरे मामले के पर्दाफाश के करीब पहुंच गई है। जल्द ही मामले में गिरफ्तारी हो सकती है।
इस वजह से विश्वास कर लेते थे पीड़ित
आरोपित जब पीड़ित व्यक्ति को फोन करते थे तो बाकायदा उनके इंश्योरेंस का नंबर और नाम के साथ वार्ता करते थे। ऐसे में पीड़ित झांसे में आ जाता था कि उसके द्वारा कराए गए इंश्योरेंस की जानकारी तो सिर्फ कंपनी के पास ही होगी, तो पीड़ित यह समझ लेता था कि फोन करने वाला व्यक्ति कंपनी का ही कर्मचारी है और उसके झांसे में आ जाता था।
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