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    दिल्ली-NCR के लाखों लोगों के लिए अहम खबर, सिगरेट पीते हैं तो तुरंत छोड़ दें

    By JP YadavEdited By:
    Updated: Thu, 12 Nov 2020 11:46 AM (IST)

    Smoking and Lung Cancer विश्व में प्रतिवर्ष लगभग 21 लाख नए मामले सामने आते हैं और 18 लाख की मौत हो जाती है। फेफड़ों के कैंसर का पहला सबसे बड़ा मुख्य कारण धूमपान जोकि 80 फीसद मरीजों में पाया जाता है और दूसरा वायु प्रदूषण है।

    फेफड़ों के कैंसर का पहला सबसे बड़ा मुख्य कारण धूमपान है।

    नई दिल्ली/नोएडा [आशीष धामा]। बहुत से लोगों को इस बात की जानकारी नहीं है कि फेफड़ों का कैंसर (लंग कैंसर) दुनिया में सबसे सामान्य प्रकार का कैंसर है, लेकिन विश्व में प्रतिवर्ष लगभग 21 लाख नए मामले सामने आते हैं और 18 लाख की मौत हो जाती है। फेफड़ों के कैंसर का पहला सबसे बड़ा मुख्य कारण धूमपान, जोकि 80 फीसद मरीजों में पाया जाता है और दूसरा वायु प्रदूषण है। सड़क पर धूल में मौजूद 75 माइक्रोन ग्राम/मीटर स्कावयर से कम डस्ट पार्टिकल्स, जिन्हें ऐरो डायनेमिक भी कहा जाता है, वातावरण में पहुंचकर नाक और मुंह के जरिए मनुष्य के शरीर में प्रवेश कर फेफड़ों को काला करते हैं। दिल्ली-एनसीआर में वायु प्रदूषण ज्यादा है, ऐसे में लोगों अपनी जान प्यारी है तो तत्काल सिगरेट या अन्य प्रकार का धूमपान छोड़ देना चाहिए।

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    वायु प्रदूषण बन गया है जानलेवा

    फेफड़ों का कैंसर मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं। एक नॉन स्माल सैल लंग कैंसर और दूसरा स्मॉल सेल लंग कैंसर। स्माल सैल लंग कैंसर धूमपान करने वाले लोगों में ज्यादा पाया जाता है। इसका उपचार भी मुश्किल है। बीडी, सिगरेट, हुक्का आदि के रूप में यह कैंसर मनुष्य के शरीर में पहुंचता हैं और धीरे-धीरे मनुष्य को मौत के मुंह में ले जाता है। धूमपान का प्रभाव काफी गंभीर होता है, यह न सिर्फ धूमपान करने वालों को बल्कि उसके आसपास के लोगों को भी प्रभावित करता है। इसे पैसिव स्मोकिंग या परेक्ष धूमपान कहते हैं और नॉन स्मोकर्स में भी इससे कैंसर हाेना का 20 फीसद खतरा होता है। इसके अलावा नॉन स्मॉल सैल लंग कैंसर भी दो प्रकार के होते हैं। इनमें एक एडिनोकार्सिनोमा और स्क्वैमस सैल कार्सिनोमा होता है। स्क्वैमस उन लोगों में पाया जाता है जो धूमपान करते हैं और एडिनोकार्सिनोमा धूमपान न करने वालों में पाया जाता है, इनमें कैंसर का कारण वायु प्रदूषण समेत अन्य कारण है।

    20 सिगरेट पीने के बराकर वर्तमान का एक्यूआइ

    फेफड़ों के कैंसर का दूसरा बड़ा कारण वायु प्रदूषण है। वायु प्रदूषण की माप एयर क्वालिटी इंडेक्स से की जाती है और धूल में मौजूदकण कैंसरकारी होते हैं। क्योंकि ये कण फिल्टर नहीं हो पाते और फेफड़ों में जमा होकर कैंसर का रूप धारण कर लेते हैं। पीएम-2.5 की तुलना सिगरेट से की जाए तो कहा जा सकता है कि इनकी 22.5 माइक्रोग्राम मात्रा हर रोज एक सिगरेट पीने के बराबर होती है। इसलिए यदि पीएम-2.5 की मात्रा 400 माइक्रोग्राम या इससे अधिक है। जोकि इन दिनों नोएडा व ग्रेटर नोएडा का है। तो यह हर रोज लगभग 20 सिगरेट पीने के बराबर है।

    फेफड़े के कैंसर के कारण

    •  सीमेंट, जिसे एस्बैस्टस भी कहा जाता है
    •   रैडॉन गैस
    •   धूल-मिट्टी मेें रहना
    •  वायु प्रदूषण

    फेफड़ों के कैंसर से बचाव

    •  मास्क का प्रयोग करना
    •  अनावश्यक घर से बाहर न निकलना
    •   बीडी, सिटरेट का सेवन न करना
    •   साज-सज्जा के लिए प्लास्टिक की चीजों का इस्तेमाल करने से बचना

    डॉ. शुभम गर्ग (सीनियर कंसल्टेंट- सर्जिकल ओंकोलाजी, फोर्टिस अस्पताल, सेक्टर-62, नोएडा) का कहना है कि यदि स्टेज 1 में कैंसर की पहचान हो जाए तो इसके ठीक होने की 90 फीसद संभावना है, लेकिन स्टेज 5 में पहुंचने के बाद पांच फीसद ही लोगों की जिंदा बच पाते हैं, इसलिए फेफड़ों के कैंसर से बचने के लिए धूमपान आज ही छोड़ दें। 

     

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