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    कंज्यूमर फोरम ने बीमा कंपनी को पॉलिसी धारक को पेमेंट न करने पर फटकारा, क्लेम अटकने पर जानें क्या करें

    Updated: Fri, 15 Aug 2025 11:27 AM (IST)

    जिला उपभोक्ता आयोग ने चोलामंडलम बीमा कंपनी को पॉलिसी शर्तों का पालन न करने पर दोषी पाया। बिसरख निवासी अभिषेक बंसल की कार दुर्घटनाग्रस्त होने पर कंपनी ने क्लेम देने से मना कर दिया था। आयोग ने कंपनी को 6% ब्याज के साथ वाहन मरम्मत का खर्च करने का आदेश दिया। आयोग ने पाया कि कंपनी ने समय पर सर्वे नहीं किया और गलत तरीके से दावा खारिज कर दिया।

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    बीमा कंपनी चोला मंडलम पीड़ित को ब्याज समेत भुगतान करेगी रकम

    जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा। जिला उपभोक्ता आयोग ने एक मामले की सुनवाई पूरी होने पर पीड़ित के पक्ष में फैसला सुनाया। कहा बीमा कंपनी चोला मंडल ने पाॅलिसी के समय तय शर्ताें को पूरा नहीं किया। इसलिए कंपनी को पीड़ित को छह प्रतिशत ब्याज समेत वाहन की मरम्मत में खर्च राशि समेत अन्य भुगतान करने होंगे।

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    चोला मंडलम कंपनी से कराया था बीमा

    बिसरख निवासी अभिषेक बंसल ने कार का बीमा चोला मंडलम कंपनी से कराया था। पाॅलिसी 24 जुलाई 2021 से 23 जुलाई 2022 तक वैध थी। पाॅलिसी की शर्तों के मुताबिक वाहन में दुर्घटना होने पर पर्सनल एक्सीडेंट कवर 15 लाख रुपये, वाहन क्षतिपूर्ति 5.15 लाख रुपये थर्ड पार्टी रिस्क कवर के साथ अन्य देनदारी थी।

    वाद उपभोक्ता आयोग में दायर किया

    21 नवंबर 2021 को वह वाहन हादसे का शिकार हो गया। वाहन उनका मित्र दिग्विजय चला रहा था। मित्र को चोट आई। दोनों का इलाज अस्पताल में कराया गया। हादसे में वाहन क्षतिग्रस्त हो गया। सर्वेयर की रिपोर्ट के बाद भी बीमा कंपनी ने क्लेम नहीं दिया। पीड़ित ने वाद उपभोक्ता आयोग में दायर किया।

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    रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई

    आयोग में सुनवाई के दौरान बीमा कंपनी ने अपना पक्ष रखा कि हादसे में घायल दोनों लोगों की मेडिकल रिपोर्ट नहीं दी गई। सर्वेयर ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि हादसे की रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। कार में पाई गई क्षति में जंग लगा था। क्षति दो से तीन माह पुरानी प्रकट होती है।

    दुर्घटनास्थल भी नहीं दिखाया गया

    दोनों पक्षों को सुनने के बाद आयोग ने पाया कि अभिषेक ने हादसा में अस्पताल के बिल लगाए। बीमा कंपनी का कहना है कि सर्वेयर की जांच में समय कार में क्षति में जंग लगा पाया था। जो करीब तीन से चार माह पुरानी है। दुर्घटनास्थल भी नहीं दिखाया गया। हादसा 21 नवंबर 2021 को हुआ। बीमा कंपनी के सर्वेयर ने अपनी रिपोर्ट 30 दिसंबर 2021 को दी।

    दावा निरस्त करके सेवा में कमी की

    सर्वेयर ने कार का निरीक्षण तत्काल नहीं किया। कार मालिक ने समय से सूचना दी थी। इस हालात में क्षति में जंग के आधार पर दुर्घटना का पहले का होना निर्धारित नहीं किया जा सकता है। बीमा कंपनी ने दावा निरस्त करके सेवा में कमी की है।

    अब देना होगा इतना भुगतान

    आयोग ने अभिषेक को 5.15 लाख रुपये 6 फीसदी ब्याज समेत 30 दिन के अंदर बीमा कंपनी द्वारा अदा करने के आदेश दिए है। बीमा कंपनी टोइंग बिल के 13 हजार रुपये, पांच हजार रुपये वाद व्यय के भी देगी।

    चुप न बैठें, पाएं अधिकार

    यह काननी कार्यवाही एक उदाहरण है कि जब पॉलिसी होने के बाद भी क्लेम की धनराशि बीमा कंपनी की ओर से नकार दी जाती है तो हारकर चुप बैठने के बजाए कानून की मदद ले सकते हैं।

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