Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck

    विकसित भारत के लिए करने होंगे नए सुधार, GST-इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव के बाद अब नए रिफॉर्म की जरूरत

    Updated: Tue, 06 Jan 2026 12:45 AM (IST)

    अर्थशास्त्री प्रो. विकास सिंह ने 'विकसित भारत 2047' के लक्ष्य हेतु अर्थव्यवस्था में नए सुधारों पर जोर दिया। उन्होंने आयकर व जीएसटी दरों में बदलाव के ब ...और पढ़ें

    News Article Hero Image

    रवि पाल, नोएडा। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए देश को अर्थव्यवस्था को मजबूती और रफ्तार के साथ आगे लेकर जाना होगा। आय कर में 12 लाख रुपये तक आय को टैक्स फ्री और जीएसटी दरों को कम करने के बाद अब नए रिफॉर्म की जरूरत है।

    अगले पांच वर्षों में देश के आम आदमी को स्वास्थ्य व शिक्षा के क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देना होगा। देश के करीब 70 प्रतिशत कर्मचारियों समेत गिग वर्कर्स का करीब 95 प्रतिशत खर्च रोजमर्रा की जरूरतों पर हो रहा है। ये वक्तव्य अर्थव्यवस्था के मुद्दे पर चर्चा के दौरान दैनिक जागरण के राष्ट्रीय विमर्श कार्यक्रम में आमंत्रित भारतीय लोक प्रशासन संस्थान (आइआइपीए) के प्रोफेसर व अर्थशास्त्री विकास सिंह ने कही।

    2035 तक अर्थव्यवस्था में अच्छा योगदान देंगे युवा 

    इसमें उन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था की मजबूती, टैरिफ और विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने जैसे विषयों पर अपने विचार रखें। उन्होंने कहा कि देश की डेमोग्राफी यानी भारत में युवाशक्ति की कमी नहीं है। वर्ष 2035 तक देश के युवा अर्थव्यवस्था में अच्छा योगदान करेंगे। फिलहाल, देश की इकोनमी लोअर इनकम इकोनमी है, इसे मिडिल इनकम इकोनमी तक ले जाने के लिए सरकार द्वारा प्रयास तेजी से किए जा रहे हैं।

    भारत के पास अगले 10 वर्षों तक सुनहरा अवसर

    चाइना, ब्राजील जैसे देश मिडिल इनकम इकोनमी तक ही पहुंच पाए हैं। वर्ष 2025 से चाइना की डेमोग्राफी में कमी होने के साथ ही उसकी जीडीपी ग्रोथ रेट में भी कमी आई है, लेकिन भारत के पास अगले 10 वर्षों तक सुनहरा अवसर है। हाई इनकम इकोनमी भी भारत बन सकता है। विकास सिंह ने विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए इकोनॉमी में रिफॉर्म पर जोर दिया।

    लैंड रिफॉर्म से बढ़ सकती है जीडीपी प्रो. विकास सिंह ने बताया कि देश में लैंड रिफॉर्म के जरिये किसानों की इकोनमी को बढ़ावा दिया जा सकता है। मौजूदा वक्त में किसानों का इकोनमी में योगदान 16 प्रतिशत है। रिफॉर्म के जरिये इसे बढ़ाकर 22 से 23 प्रतिशत तक किया जा सकता है। इससे भारत की जीडीपी ग्रोथ सात प्रतिशत से बढ़कर नौ प्रतिशत तक हो सकती है।

    टैरिफ दरें कम हुई तो और बढ़ेगा भारत का एक्सपोर्ट 

    नए कृषि कानूनों से किसानों को फायदा मिल सकता था, उसे समझने की जरूरत है। फरवरी में पेश होने वाले बजट पर सरकार इस मुद्दे पर जरूर ध्यान देगी। ट्रंप टैरिफ से देश की इकोनमी पर असर नहीं प्रो. सिंह ने बताया कि देश में लगाए गए ट्रंप टैरिफ से देश की इकोनमी पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ा है। देश का निर्यात यूएस में 2.5 प्रतिशत है, लेकिन बढ़ी टैरिफ की दरों को देशहित में कम करने के लिए अमेरिका से बातचीत जारी रखनी होगी।

    टैरिफ दरें कम होने से भारत का एक्सपोर्ट और बढ़ेगा। देश की करीब 60 फीसदी इकोनमी डोमेस्टिक है। ट्रंप के टैरिफ का चीन और पश्चिमी देशों पर ज्यादा प्रभाव है। एमएसएमई को और बढ़ावा देना होगा देश में करीब सात करोड़ एमएसएमई उद्यमी हैं। करीब 99 प्रतिशत छोटे उद्यमों में एक यो दो कर्मी की काम कर रहे हैं। जीडीपी में एमएसएमई का योगदान 29 से 30 प्रतिशत है, जबकि एक्सपोर्ट में 25 से 30 प्रतिशत योगदान है।

    प्रो. सिंह ने इसे बढ़ाने पर जोर देते हुए कहा कि एमएसएमई और देश की बड़ी कंपनियों के बीच बड़ा खालीपन है। एमएसएमई को बढ़ावा देकर इस खालीपन को भरकर बड़ी कंपनियों से प्रतियोगिता करानी होगी। जिससे एमएसएमई क्षेत्र में 70 प्रतिशत नौकरियों को बढ़ाकर 90 प्रतिशत तक किया जा सके।नए क्षेत्रों को आगे लाना होगा प्रो. सिंह ने बताया कि देश में मैन्यूफैक्चरिंग से अब ज्यादा नौकरी नहीं मिल रही है।

    पहले एक करोड़ रुपये के निवेश से सात नौकरी मिल रही थी, अब ये घटकर चार रह गई हैं। इसलिए नए क्षेत्रों को आगे लाना होगा। देश में कंस्ट्रकशन कंपनी, टूरिज्म और ट्रेवल इंडस्ट्री तेजी से बढ़ रही है, लेकिन एक भी बड़ी इंडस्ट्री निफ्टी में लिस्टेड नहीं है। इन क्षेत्रों को संगठित तौर पर आगे लाना होगा।

    रेयर अर्थ मटीरियल पर निवेश का समय अच्छा रेयर अर्थ पर चर्चा करते हुए प्रो. सिंह ने बताया कि देश ने रेयर अर्थ पर निर्भरता को कम करने के लिए सही समय पर कदम उठाए हैं। ट्रंप टैरिफ और चाइना से फिलहाल किसी भी मोर्चे पर उलझने की बजाय सरकार इसमें निवेश पर फोकस कर रही है। इसका असर अगले चार से पांच वर्षों में देखने को मिलेगा।