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नोएडा में पांच मंजिला बिल्डिंग के ऊपर के तीन फ्लोर हटाने होंगे, कोर्ट ने खारिज की पीड़ित की याचिका

Published: Sat, 03 Jan 2026 08:42 PM (IST)

जिला न्यायालय ने ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर में एक निर्माणाधीन पांच मंजिला इमारत के ऊपरी तीन फ्लोर हटाने के कार्यपालक ...और पढ़ें

जिला कोर्ट ने ओमप्रकाश चौधरी की याचिका खारिज करते हुए कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश को सही करार दिया है।

जिला कोर्ट ने ओमप्रकाश चौधरी की याचिका खारिज करते हुए कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश को सही करार दिया है।

HighLights

  1. न्यायालय ने असुरक्षित भवन के तीन फ्लोर हटाने का आदेश दिया।

  2. भवन मालिक ओमप्रकाश चौधरी की याचिका खारिज की गई।

  3. आईआईटी रुड़की की रिपोर्ट ने संरचना को असुरक्षित बताया।

जागरण संवाददाता, ग्रेटर नोएडा। सूरजपुर कोतवाली क्षेत्र में निर्माणाधीन पांच मंजिला बिल्डिंग को लेकर चल रहे विवाद में जिला न्यायालय ने भवन मालिक ओमप्रकाश चौधरी की याचिका खारिज करते हुए कार्यपालक मजिस्ट्रेट के आदेश को सही करार दिया है।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि भवन के ऊपर की तीन मंजिल हटाने का आदेश वैध है। अदालत ने माना कि भवन की स्थिति असुरक्षित है। इसके गिरने की आशंका से आसपास रहने वाले लोगों और राहगीरों की जान-माल को खतरा हो सकता है। ऐसे में मामला लोक न्यूसेंस की श्रेणी में आता है और प्रशासन द्वारा पूर्व में की गई कार्रवाई उचित है।

सूरजपुर क्षेत्र में निर्माणाधीन पांच मंजिला भवन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। पड़ोस में रहने वाली प्रियंका सिंह ने प्रशासन से शिकायत की थी कि उनके मकान के पास बन रहा पांच मंजिला भवन अवैध है। इसकी वजह से आसपास के मकानों में दरारें आ रही हैं। आशंका जताई कि भवन की स्थिति कमजोर होने से गिरने की स्थिति में आसपास के लोगों की जान-माल को खतरा हो सकता है।

शिकायत को पुलिस और प्रशासन ने गंभीरता से लिया। सूरजपुर पुलिस की रिपोर्ट के आधार पर कार्यपालक मजिस्ट्रेट व अपर पुलिस उपायुक्त, सेंट्रल नोएडा ने धारा 133 दंड प्रक्रिया संहिता के तहत कार्रवाई शुरू की। इस धारा के तहत ऐसे निर्माण पर कार्रवाई की जाती है, जो लोक सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है।

प्रशासन ने भवन की संरचनात्मक मजबूती की जांच के लिए आइआइटी रुड़की से तकनीकी रिपोर्ट मंगाई। रुड़की की रिपोर्ट में भवन की संरचना पूरी तरह सुरक्षित नहीं होने की पुष्टि की गई है। भवन मालिक की ओर से पेश निजी एजेंसी की रिपोर्ट को कम भरोसेमंद बताया गया। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि भवन का नक्शा किसी सक्षम प्राधिकरण से पास नहीं कराया गया था।

अदालत ने पहले से पारित आदेश को बरकरार रखते हुए भवन मालिक को आदेश का अनुपालन कराने के लिए 60 दिन का अतिरिक्त समय दिया है। यदि इस अवधि में ऊपरी तीन मंजिल नहीं हटाई गईं, तो ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण खुद हटवाने की कार्रवाई करेगा। इसका खर्च भवन मालिक से वसूला जाएगा।