नोएडा में श्रमिकों से हिंसा करवाया बिगुल दस्ता ने, क्रांतिकारी कम्युनिस्ट ग्रुप का NCR से बंगाल तक नेटवर्क
क्रांतिकारी कम्युनिस्ट ग्रुप 'बिगुल दस्ता' पर नोएडा में हिंसा भड़काने और देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप है। ...और पढ़ें

बिगुल अपने नेटवर्क का गोरखपुर से पानीपत तक और बंगाल से एनसीआर तक स्लीपर सेल के तौर पर संचालन कर रहा है। फाइल फोटो

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मुनीश शर्मा, नोएडा। क्रान्तिकारी कम्युनिस्ट ग्रुपों को एकजुट करने और नये सिरे से इन्क़लाबी पार्टी बनाने की कोशिशों को तेज़ करने के लिए अप्रैल 1996 में ‘बिगुल’ की शुरुआत हुई थी। मजदूर बिगूल दस्ता मार्क्स के वर्ग संघर्ष के सिद्धांत के पदचिन्हों पर चल रहा है। एंगेल्स-लेनिन और माओ के विचार को समाहित करते हुए सरकार की नीति और कार्य पर सवाल खड़े कर रहा है। बिगुल अपने नेटवर्क का गोरखपुर से पानीपत तक और बंगाल से एनसीआर तक स्लीपर सेल के तौर पर संचालन कर रहा है।
हिंसा में सहयोग के साक्ष्य मिले
श्रमिकों की आवाज बनने के नाम पर विश्व के श्रमिक आंदोलन, हड़ताल, युद्धों को सहयोग कर देश विरोधी गतिविधियों को करने से भी नहीं चूक रहा है। नोएडा हिंसा भड़काने में भी बिगुल के सहयोग करने के साक्ष्य मिले हैं। इससे जुड़े सत्यम वर्मा, रूपेश राय, हिमांशु ठाकुर, समेत सात लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी है। दिसंबर 2025 में गिग वर्कर्स को सहयोग करना सामने आया है। पुलिस की जांच जारी है।
पूरे देश में हर हड़ताल में नाम
बिगुल देश में चाहे हरियाणा पानीपत में ‘इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन’ की रिफाइनरी में प्रदर्शन हो, गोरखपुर के अंकुर उद्योग लिमिटेड परिसर में मजदूर हड़ताल हो या कोलकाता के आनन्दपुर इलाके में वाउ मोमो और पुष्पांजलि डेकोरेटर्स के गोदामों में आग लगना हो, साथ ही विश्व के किसी कोने में कोई आंदोलन, हड़ताल और प्रदर्शन हो।
ग्रुपों में हिंसा भड़काने का संदेश भेजा
बिगुल श्रमिक को जागरूक करने के नाम पर देश विरोधी गतिविधियों को भी संचालित कर रहा था। उसका नेपाल से भी जुड़ाव है। नोएडा पुलिस की जांच में इस तरह की बात उजागर हो रही है। बिगुल और इससे जुड़े संगठन के कार्यकर्ता स्लीपर सेल की तर्ज पर काम करते हुए मजदूरों को जोड़ रहे हैं। नोएडा हिंसा में भी 800-800 लोगों के क्यूआर कोड से बनाये ग्रुप में हिंसा भड़काने के मैसेज मिले हैं। यह देश विरोधी गतिविधियों के संगठित होने की ओर इशारा कर रहे हैं। जांच चल रही है।
गुप्त ढंग से रची पूरी साजिश
स्लीपर सेल की तरह विशेष गुप्त ढांचा खड़ा करना प्राथमिकता: बिगुल दस्ता कम्युनिस्ट पार्टी की तरह पहले से तय की गयी कोड-व्यवस्था के द्वारा, सावधानी से बांटे गये पर्चों और अखबारों में लिखे जाने वाले पत्रों के जरिये गुप्त डाक व्यवस्था तथा यातायात-संचार व्यवस्था स्थापित करता है। इससे स्लीपर तहत से संपूर्ण क्रांति करने को प्रयासरत है
सुप्रीम कोर्ट पर सवाल, बजट के खिलाफ आंदोलन
घरेलू कामगारों के लिए न्यूनतम वेतन की मांग को लेकर 29 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकान्त और जायमाल्या बागची वाली न्यायपीठ ने ख़ारिज कर दिया था। इस पर बिगुल ने सवाल खड़े किए थे।
इसको लेकर एक बार फिर मजदूर विरोधी चेहरा बेनकाब होने की बात कही थी। उधर, बिगुल ने 2026 के बजट को मज़दूर-विरोधी और जनविरोधी बताया था।
इसे मोदी सरकार की फ़ासीवादी नीतियों की ही निरन्तरता और पूरे पूँजीपति वर्ग और विशेष रूप से बड़ी पूँजी के हित में है। इस हमले का प्रतिरोध करने के लिए मज़दूर वर्ग के नेतृत्व में व्यापक जनआन्दोलन खड़ा करना की चेतावनी दी थी।
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