Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck

    मुजफ्फरनगर में जालसाजों पर कसा शिकंजा, सरगना समेत नौ लोग गैंग्स्टर में नामजद

    Updated: Mon, 05 Jan 2026 12:42 PM (IST)

    मुजफ्फरनगर नगर कोतवाली पुलिस ने फर्जी फाइनेंस और वाहन रजिस्ट्रेशन ठगी के एक संगठित गिरोह पर कार्रवाई की है। सरगना समेत नौ लोगों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट ...और पढ़ें

    News Article Hero Image

    मुजफ्फरनगर में वाहन ठगी गिरोह पर शिकंजा, सरगना समेत नौ पर गैंगस्टर एक्ट

    जागरण संवाददाता, मुजफ्फरनगर। फर्जी फाइनेंस और वाहन रजिस्ट्रेशन से जुड़ी संगठित ठगी के गिरोह पर शिकंजा कसा गया है। नगर कोतवाली पुलिस ने सरगना समेत नौ लोगों के खिलाफ गैंग्स्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया है।

    आरोप है कि यह गिरोह भोले-भाले लोगों को झांसे में लेकर उनके आधार कार्ड व अन्य जरूरी दस्तावेज हासिल करता था और उनके नाम पर फाइनेंस से वाहन निकलवाकर न तो उनका पंजीकरण कराता था और न ही वैध प्रक्रिया अपनाता था। इसके बाद वाहनों के इंजन नंबर और चेसिस नंबर में कूट रचना कराकर दूसरे राज्यों में उनका फर्जी रजिस्ट्रेशन कराया जाता था।

    नगर कोतवाली प्रभारी निरीक्षक बबलू सिंह वर्मा ने दाखिल गैंग चार्ट के आधार पर धारा 2/3 गैंगस्टर एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कराया। बताया कि इस गिरोह का सरगना गुलबहार निवासी मोहम्मपुर मोहनपुरा थाना सिविल लाइन रुड़की उत्तराखण्ड है।

    उसके साथ सुनील कुमार कुशवाहा निवासी बर्रा-8 थाना गुजैनी कानपुर नगर, आशू अग्रवाल निवासी हनुमान नगर सहारनपुर, शाह आलम निवासी बलेलपुर मजरा पनियाला रुड़की, कादिर निवासी मोहम्मदपुर थाना सिविल लाइन हरिद्वार, प्रदीप निवासी ग्राम नावला थाना मंसूरपुर, मुशर्रफ हुसैन उर्फ मूसा निवासी ग्राम बसेड़ी थाना नई मंडी, दीपक त्यागी निवासी ग्राम नावला थाना मंसूरपुर (हाल निवासी रामपुरी थाना कोतवाली नगर) और दीपक कुमार वाल्मीकि निवासी अलमासपुर थाना नई मंडी मुजफ्फरनगर शामिल हैं। उन्होंने बताया कि आरोपित दीपक कुमार वाल्मीकि के विरुद्ध पूर्व में भी धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़े कई आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं।

    लोगों को फंसाकर ऐसे करते थे जालसाजी

    इंस्पेक्टर बबलू कुमार ने बताया कि आरोपितों को तीन अक्टूबर 2024 में गिरफ्तार किया गया था। इन्होंने पूछताछ में बताया था कि धोखाधडी से ऊंची कीमत की गाड़ियों का ऋण कराते थे, जबकि इसकी एवज में कम कीमत की गाड़ी को ऋण पर निकलवाते थे। जिसके चेचिस नंबर बदलकर दूसरे राज्यों में फर्जी पंजीकरण कराकर बेच देते थे। इसमें कंपनी के सेल्स मैनेजर की मिलीभगत होती थी।