MDA का प्लॉट आवंटन में खेल, 29 साल पुराने रेट पर कर दिया 2700 वर्ग मीटर प्लॉट का आवंटन
Moradabad Development Authority News मुरादाबाद विकास प्राधिकरण (एमडीए) में करोड़ों के प्लाट का आवंटन सुर्खियों में है। आरोप है कि आवंटन में खेल कर 29 ...और पढ़ें
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। Moradabad Development Authority News : मुरादाबाद विकास प्राधिकरण (एमडीए) में करोड़ों के प्लाट का आवंटन सुर्खियों में है। आरोप है कि आवंटन में खेल कर 29 वर्ष पहले की कीमत पर प्लाट दे दिया गया है। इसे लेकर अफसरों में रार पैदा हो गई है। पूर्व में तैनात रहे एक अधिकारी की घेराबंदी की जा रही है और मामला शासन स्तर तक ले जाने की तैयारी है।
एमडीए सचिव ने फिलहाल आवंटन को रोक दिया है। महानगर के एक ठेकेदार ने वर्ष 1993 में नीलामी के माध्यम से 2700 वर्ग मीटर का प्लाट एमडीए से खरीदा था। यह प्लाट कांठ रोड पर हरथला पुलिस चौकी के पास है। प्लाट की मौजूदा कीमत कई करोड़ बताई जा रही है। बताया जाता है कि पूर्व में इस प्लाट को लेकर मामला कोर्ट तक गया था।
वहां से आवंटन खारिज कर दिया गया। आरोप है कि एमडीए में तैनात रहे एक अधिकारी ने नियमों को दरकिनार कर प्लाट का आवंटन पुराने रेट पर ही कर दिया। शिकायत होने पर आवंटन को लेकर एक जांच कमेटी पूर्व सचिव सर्वेश कुमार गुप्ता के नेतृत्व में बना दी। कमेटी में सीए पवन कुमार और एसडीएम प्रबुद्ध सिंह भी थे।
कमेटी ने आवंटन के विरोध में रिपोर्ट दी है। एमडीए सचिव राजीव पांडेय ने इस प्रक्रिया को रोक दिया। उन्होंने बताया कि यह मामला मेरे कार्यभार ग्रहण करने से एक महीने पहले का है। इस मामले में पूर्व वीसी ने कमेटी गठित की थी। इस मामले में कानूनी राय भी ली जा रही है।
कोर्ट की शरण में गया ठेकेदार
ठेकेदार के पक्ष में यह नीलामी छूटी थी। लेकिन, उसने पंजीकरण राशि ही जमा की थी। प्राधिकरण के नियमों के मुताबिक नीलामी के मामले में यदि निर्धारित अवधि में बोली लगाने वाला धनराशि जमा नहीं करता है तो उसे डिफाल्टर घोषित कर दिया जाता था। इस मामले में भी ऐसा ही हुआ था। संबंधित भूखंड या संपत्ति का आवंटन नीलामी से होना चाहिए था। लेकिन, ठेकेदार इस मामले को लेकर न्यायालय की शरण में चला गया था। वहां से भी ठेकेदार को राहत नहीं मिली थी।
एक बाबू के खिलाफ हो चुकी है कार्रवाई
इस भूमि के चक्कर में एमडीए के एक बाबू के खिलाफ भी कार्रवाई हो चुकी है। बताते हैं कि बाबू को ठेकेदार ने इस भूमि के 65 हजार रुपये जमा करने के लिए दिये थे। लेकिन, बाबू ने सिर्फ पांच हजार रुपये ही जमा किये। साठ हजार की धनराशि उसने हड़प ली थी।
आवंटन तो पहले से ही था
एमडीए के संपत्ति अधिकारी आरआरपी सिंह का कहना है कि सभी आरोप निराधार हैं। ठेकेदार के पक्ष में पहले आवंटन था। प्राधिकरण से ठेकेदार का मुकदमा चल रहा था। नीलामी में ठेकेदार ने भूमि ली थी। मेरी जानकारी में यह है कि अभी इस मामले में कुछ नहीं हुआ है। एमडीए उपाध्यक्ष शैलेश कुमार ने बताया कि कांठ रोड के प्लाट आवंटन मामले की उन्हें जानकारी नहीं है। शुक्रवार को इस पूरे मामले की छानबीन कराएंगे।

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