चौदह साल में MDA नहीं बेच पाया एक भी आवास, प्राधिकरण ने 20 करोड़ में बनाए थे 150 मकान
MDA Housing Scheme चौदह साल पहले शहर के नियोजित विकास के लिए मुरादाबाद विकास प्राधिकरण ने सोनकपुर योजना पर करीब 20 करोड़ रुपये खर्च करके 150 आवास बना ...और पढ़ें
जागरण संवाददाता, मुरादाबाद। MDA Housing Scheme : चौदह साल पहले शहर के नियोजित विकास के लिए मुरादाबाद विकास प्राधिकरण ने सोनकपुर योजना पर करीब 20 करोड़ रुपये खर्च करके 150 आवास बनाए थे। कानूनी अड़चन लगने के कारण अभी तक इसमें से एक भी आवास नहीं बिक सका।
आवासों के खिड़की दरवाजे तक चोर उखाड़कर ले गए। लगभग 50 आवासों में कब्जा करके बेसहारा लोग रह रहे हैं। लेकिन, एमडीए को भूत बंगले बने इन आवासों की जरा भी चिंता नहीं है। मुरादाबाद विकास प्राधिकरण वर्ष 2008 में सोनकपुर योजना को विकसित करने का काम शुरू किया था।
सोनकपुर योजना के तहत बने थे आवास
जागरण की टीम योजना का सच परखने के लिए पहुंची। सोनकपुर योजना में बने एमआइजी आवासों की हालत बहुत खस्ता थी। आवासों के चारों तरह झाड़ियां हैं। पेयजल टैंक के आसपास से कई आवासों पर अवैध कब्जा करके लोगों ने रहना शुरू कर दिया है।इन्हीं मकानों के पीछे की तरफ वाली सड़क पर हम पहुंचे।
मकानों के खिड़की दरवाजे गायब
वहां देखा तो कई मकानों की खिड़की दरवाजे ही नहीं थे। इसी योजना में प्रधानमंत्री आवासों के पास भोला सिंह की मिलक उर्फ सोनकपुर देहात सटाकर प्राधिकरण ने ट्रिपल स्टोरी, ड्यूप्लेक्स आवासों का भी निर्माण कराया था। इन आवासों की हालत बेहद खराब हो चुकी है। इनके भी खिड़की दरवाजे गायब हैं।
आवासों पर अवैध कब्जा
इन आवासों में भी तमाम लोगों ने कब्जा रखे हैं। रास्तों का हाल बुरा है। एमआइजी आवासों की तरफ से ट्रिपल स्टोरी और ड्यूप्लेक्स आवासों की तरफ जाने वाला रास्ता कच्चा है। इस योजना में प्राधिकरण ने करोड़ों रुपये खर्च कर दिए। लेकिन, नतीजा अभी तक कुछ नहीं निकला है। सोनकपुर रेलवे ओवरब्रिज बनने के कारण शहर के लोगों को इस योजना के खुलने का इंतजार है।प्राधिकरण इस पर अभी तक कोई फैसला नहीं ले पा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा जमीन का विवाद
सोनकपुर योजना को विकसित करने की शुरूआत करते समय ही भूमि अधिग्रहण को लेकर विवाद हो गया था, जिसमें सीलिंग भूमि 21.31 हेक्टेयर को लेकर कुछ किसानों ने दावा ठोकते हुए एमडीए से मुआवजा देने की मांग की थी। प्राधिकरण अफसरों ने किसानों को यह कहते हुए मुआवजा देने से इन्कार कर दिया था कि जिस भूमि में उन्होंने योजना को विकसित किया है। वह सीलिंग भूमि है, लिहाजा कोई भी किसान मुआवजे का पात्र नहीं है।
किसानों ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की थी विशेष अनुज्ञा याचिका
इसके बाद साल 2013 में किसानों ने पहले हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गयी। पांच साल तक हाईकोर्ट में चली मुआवजे की लड़ाई में किसान हार गए। उन्होंने साल 2017 में सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर विशेष अनुज्ञा याचिका दाखिल की गयी। लगभग ढाई वर्ष बाद इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने एमडीए के पक्ष में फैसला सुनाते हुए मामले का निस्तारण कर दिया था।
एमडीए को स्रपीम कोर्ट में मिली जीत
सुप्रीम कोर्ट में जीत मिलने के साथ ही प्राधिकरण ने पांच सौ आवासों को आवंटित करने की योजना तैयार कर ली थी। लेकिन, फिर से विवाद अदालत में दायर हो गए।इसके बाद फिर से योजना लटक गयी है। कोर्ट का स्टे होने के कारण आवास आवंटित नहीं हो पा रहे हैं।
क्या कहते हैं अधिकारी
मुरादाबाद विकास प्राधिकरण के सचिव राजीव पाण्डेय ने बताया कि प्राधिकरण का लीगल सेल कानूनी अड़चन दूर कराने के प्रयास में लगा है। जल्द ही विवादों को निपटाकर सोनकपुर योजना के आवासों की मरम्मत कराकर लोगों को आवास मुहैया कराए जाएंगे।

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