World Junior Athletics Championship: जिद और जुनून ने दिलाया मेरठ की रूपल को कांस्य पदक, पिता बोले-बेस्ट प्रदर्शन
Rupal won bronze medal जूनियर वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में पहुंचने वाली मेरठ की पहली एथलीट बनी रूपल। पहली ही प्रतियोगिता में जीता कांस्य पदक। 2022 के टॉप 10 सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन में छठे स्थान पर हैं काबिज़। उन्हें बधाइयां मिल रही हैं।

अमित तिवारी, मेरठ। Rupal won bronze medal जिद को जुनून बनाकर जीत की पटकथा मेरठ की रूपल ने लिख दी है। जूनियर वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में पहुंचने वाली मेरठ की पहली महिला एथलीट बन कर उभरी रूपल ने 400 मीटर दौड़ में कांस्य पदक देश की झोली में डाल दिया है। इतना ही नहीं 2022 में अपने देश से बाहर 10 सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले एथलीट्स में रूपल चौधरी छठे स्थान पर हैं।
मेरठ की माटी का गौरव
देश के साथ ही रूपल ने मेरठ की माटी का गौरव भी बढ़ा दिया है। छोटी उम्र में खेल में आगे बढ़ने की जिद करते हुए रूपल ने तीन दिन तक भूख हड़ताल कर दी थी। बेटी को अकेले दूर छोड़ने में संकोच कर रहे किसान पिता ओमवीर सिंह का दिल पिघला तो उन्होंने बेटी का हाथ पकड़ खुद प्रतियोगिताओं में आगे बढ़ाया। जिद को जुनून, जुनून को अब जीत में बदलते देख ओमवीर सिंह का सीना गर्व से चौड़ा हो गया है।
हर बार बेस्ट दे रही हैं रूपल
मेरठ जिले के रोहटा रोड स्थित जैनपुर गांव के रहने वाले ओमवीर सिंह बेटी रूपल की सफलता पर बधाइयां सुनते नहीं थक रहे। उन्होंने कहा कि बेटी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का झंडा बुलंद कर दिया है। इससे बड़े गौरव की बात उनके लिए कुछ और नहीं हो सकती। उन्होंने बताया कि रूपल हर बार अपना बेस्ट प्रदर्शन कर रही हैं। कोलंबिया के काली में चल रही अंडर-20 जूनियर वर्ल्ड एथलेटिक्स चैंपियनशिप में भी रूपल पांच दौड़ में हिस्सा ले चुकी हैं और हर बार उनका प्रदर्शन अपने पिछले प्रदर्शन से बेहतर रहा है।
ज्यादा गौरव की बात
उन्होंने कहा कि ऐसा देखा जाता है कि लगातार कई दौड़ में हिस्सा लेने से खिलाड़ी का मनोबल टूटने लगता है लेकिन रूपल हर बार नए मनोबल के साथ और नए आत्मविश्वास के साथ दौड़ती नजर आ रही हैं। यह एक एथलीट के तौर पर उनके लिए बहुत अच्छी बात है और एक पिता के लिए यह देखना और भी ज्यादा गौरव की बात है।
बेटी की जिद के आगे झुकने का फल मिल रहा
ओमवीर बताते हैं कि रूपल खेल को लेकर शुरू से ही जिद्दी रही हैं। बताया कि किसानी के साथ-साथ बेटी को लेकर यहां वहां घूमना फिरना पड़ता, इसलिए वह नहीं चाहते थे कि बेटी खेल में आगे बढ़े। बेटी को अकेले छोड़ना नहीं चाहते थे और साथ ले जाने के बंधन से भी बचना चाह रहे थे। रूपल अपनी जिद पर अड़ी रही।
तीन दिन की भूख हड़ताल
उसी दौरान रूपल तीन दिन की भूख हड़ताल पर भी रही। तभी एक रिश्तेदार ने आकर कहा कि हर मां बाप चाहते हैं कि उनके बच्चे कुछ करें और उनका नाम रोशन करें। रूपल खुद कुछ करना चाहती हैं तो क्यों नहीं करने देते। बात समझ में आ गई और बेटी को खेल में आगे बढ़ने की अनुमति देने के साथ ओमवीर हमेशा रूपल का आत्मविश्वास बनकर पीछे खड़े रहे।
जहां भी लेकर गया, खाली हाथ नहीं लौटा
बेटी की जीत के आगे झुकने और खेलने की अनुमति देने का निर्णय सही होने का एहसास ओमवीर को शुरुआती दिनों में ही होने लगा था। उन्होंने बताया कि रूपल ने जब खेल की शुरुआत की तो जिला स्तर, प्रदेश स्तर, राष्ट्रीय स्तर और फिर अब पहला अंतरराष्ट्रीय मौका ही क्यों न रहा हो, वह ग्राउंड से बिना कोई पदक लिए वापस नहीं लौटी।
अकेले विदेश में प्रतियोगिता खेलने गई
ओमवीर सिंह बताते हैं कि वह देश में आयोजित हर प्रतियोगिता में रूपल के साथ गए हैं और कभी भी बिना पदक के खाली हाथ वापस नहीं लौटना पड़ा। यह पहला मौका है जब रूपल अकेले विदेश में प्रतियोगिता खेलने गई हैं लेकिन वहां भी उन्होंने पदक जीत लिया। एथलेटिक्स का प्रशिक्षण लेना शुरू करने के सात महीने के भीतर ही रूपल रांची में हुई पहली जूनियर नेशनल एथलेटिक्स चैंपियनशिप में हिस्सा लेने गई थी और वहां भी रजत पदक जीत कर आई थी। अब जब इस प्रतियोगिता में वह साथ नहीं थे तब भी सुबह शाम फोन कर मनोबल बढ़ाते रहे।
जैनपुर से लेकर पीलीभीत तक मिल रही बधाइयां
रुपल के पिता ओमवीर और परिवार के अन्य सदस्यों को जैनपुर गांव में बधाइयां मिल रही हैं। वहीं उनके बेटे वीर सिंह को पीलीभीत में लोग बधाइयां दे रहे हैं। रूपल के बड़े भाई वीर सिंह उत्तर प्रदेश पुलिस में कार्यरत हैं और पीलीभीत में पोस्टेड हैं। वर्तमान में रूपल मेरठ कॉलेज से बीए प्रथम वर्ष की पढ़ाई भी कर रही हैं। मेरठ कॉलेज के प्राचार्य से लेकर स्पोर्ट्स इंचार्ज तक सब रूपल, उनके कोच विशाल सक्सेना व अमिता सक्सेना, पिता उमेद सिंह सहित जिला एथलेटिक संघ के सचिव अनु कुमार व अन्य पदाधिकारियों को भी बधाई दे रहे हैं।
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