UPSC Result 2021: आइएएस ही बनना है, खुद के लिए तय किया था लक्ष्य, बोले- शामली निवासी अर्पित संगल
UPSC Result 2021 यूपीएससी परीक्षा में 53 वीं रैंक पाने वाले शामली के अर्पित संगल का कहना है कि इस परीक्षा के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा है। पहली या दूसरी बार में ही सफलता मिल जाए यह बहुत मुश्किल है। धैर्य के साथ मंजिल की ओर बढ़ें।

शामली, जागरण संवाददाता। नगर के तालाब रोड निवासी सुशील कुमार संगल के पुत्र अर्पित संगल ने संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा में 53 वीं रैंक हासिल की है। पिछले साल भी अर्पित इसी परीक्षा में चयनित हुए थे और 239वीं रैंक आई थी। इस पर उन्हें आइपीएस मिला था, लेकिन अर्पित ने दोबारा परीक्षा देने का निर्णय लिया। इस बार उन्होंने जीएस में काफी मेहनत की और पिछले साल की तुलना में करीब 43 अंक ज्यादा हासिल किए। उनका कहना है कि मैंने खुद के लिए आइएएस बनने का लक्ष्य निर्धारित किया था और मुझे इस बात की खुशी है कि मैंने अपना लक्ष्य हासिल कर लिया। इस परीक्षा की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए उन्होंने कहा कि धैर्य और विश्वास के साथ तैयारी करें। विफलता से कतई नहीं घबराएं। मुकाबला कड़ा है तो विफलता मिलना भी तय है।
जीएस की कमी दूर की और बन गई बात
दैनिक जागरण के साथ बातचीत में अर्पित ने कहा कि पिछली बार उन्हें 239वीं रैंक मिली। इसलिए आइएएस नहीं बन पाया। परीक्षा परिणाम से मुझे पता चला कि जीएस में मिले कम नंबर की वजह से ही मेरी रैंक गिरी। इसलिए मैंने जीएस पर ज्यादा फोकस किया और इस बार मेरे 43 नंबर अधिक आए। आइएएस ही क्यों, इस सवाल पर उनका कहना है कि नेचर आफ जाब ने ही मुझे आइएएस के लिए प्रेरित किया। आइएएस के पास राजस्व संबंधी मामलों के अधिकार होते हैं। इसके अलावा भविष्य में नीति निर्धारण में भी आइएएस की अहम भूमिका होती है। ये दोनों मेरी सोच से मेल खाते हैं। इसलिए मेरा फोकस सिर्फ आइएएस पर है।
धैर्य के साथ मंजिल की ओर लगातार बढ़ना
अर्पित का कहना है कि परीक्षा की तैयारियां करने वाले युवा अपने लिए तैयारी करें। इस परीक्षा के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा है। इसलिए पहली या दूसरी बार में ही सफलता मिल जाए, यह बहुत मुश्किल है। विफलताएं आपकी राह रोकेंगी, लेकिन आपको धैर्य के साथ मंजिल की ओर लगातार बढ़ना है।
पसंद है युवल नोहा हरारी की पुस्तकें
पुस्तकों पर बात हुई तो उन्होंने बताया कि इजराइली लेखक युवल नोहा हरारी की पुस्तक स्पाइन्स उन्हें बहुत प्रेरित करती है। इस पुस्तक में मानव के विकास की यात्रा है। यह हमें बताती है कि मानव का सफर कहां से शुरू हुआ और कहां तक पहुंचा।
हर व्यक्ति का योगदान अहम
सिविल सेवा परीक्षा में कड़ी प्रतिस्पर्धा है। यदि यहां कोई विफल हो जाता है तो इसका मतलब यह कतई नहीं है कि वह इसके योग्य नहीं है। चूंकि प्रतिभागी ज्यादा हैं और सीटें बेहद कम। इसलिए अगर आप आइएएस नहीं बन पाते हैं तो आप किसी दूसरे क्षेत्र में समाज और राष्ट्र निर्माण में सहयोग दे सकते हैं। हर व्यक्ति का योगदान अहम है।
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