Road Safety In Meerut: घायलों को पता ही नहीं, वित्तीय मदद का भी है प्रावधान, विभाग में नहीं आते आवेदन
Road Safety In Meerut मेरठ में सड़क सुरक्षा कोष से कभी डिवाइडर की मरम्मत कभी संकेतक का दिखाया जाता है काम। 108 एंबुलेंस को बुलाने तक ही सीमित है पुलिस की मदद सड़क के वाहन भी स्वयं हटवाते हैं लोग।

मेरठ, जागरण संवाददाता। Road Safety In Meerut मेरठ में सड़क दुर्घटना को रोकने की व्यवस्था तो नहीं कर पा रहे लेकिन जब दुर्घटना हो जाती है तब घायलों की वित्तीय मदद भी नहीं की जाती। घायल के साथ-साथ सड़क सुरक्षा कोष भी कराहता है लेकिन जिन्हें इसकी पहल करनी चाहिए उनकी संवेदनाएं मर चुकी हैं। लोगों को पता भी नहीं चलने दिया गया है कि सरकार के स्तर से किसी तरह की मदद की भी व्यवस्था है।
निजी एंबुलेंस से अस्पताल गए
यही कारण है कि वित्तीय मदद की मांग के लिए इस साल एक भी आवेदन नहीं आए। कंकरखेड़ा के मनोज एक साल पहले घायल हुए थे। हाथ और पैर में फ्रैक्चर हुआ था। एंबुलेंस आने में देरी हुई तो वह निजी एंबुलेंस से अस्पताल गए। पुलिस कर्मी भी मौके पर थे, फिर भी उन्हें अस्पताल तक पहुंचने और उस इलाज पर हुए खर्च को स्वयं वहन करना पड़ा। मनोज ने बताया कि उन्हें तो अब से पहले पता ही नहीं था।
व्यय का प्रतिपूर्ति करने का नियम
उनका कहना है कि यदि सरकार मदद देती है तो किसी ने बताया क्यों नहीं। मनोज ही नहीं अन्य भी किसी को ऐसे नियम के बारे में नहीं पता है। दरअसल ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि जिम्मेदारों ने किसी को जागरूक ही नहीं किया। कभी इस तरह का जागरुकता अभियान भी नहीं चला। जबकि सड़क सुरक्षा कोष से सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने में हुए व्यय का प्रतिपूर्ति करने का नियम है। इसके साथ ही क्षतिपूर्ति के लिए वित्तीय सहायता का नियम है। सड़क पर दुर्घटना रोकने के इंतजाम करने के भी नियम हैं। ऐसे मामले प्रतिदिन आते हैं जब किसी पीड़ित को मदद नहीं मिल पाती।
12.50 हजार से 2.50 लाख रुपये तक वित्तीय मदद का है नियम
रोड सेफ्टी क्लब के समन्वयक अमित नागर का कहना है कि सड़क सुरक्षा कोष के तहत वित्तीय मदद का नियम है। यदि कोई सड़क दुर्घटना में घायल हो जाता है तो उसकी स्थिति के अनुसार 12 हजार 500 रुपये से लेकर 50 हजार रुपये तक क्षतिपूर्ति का नियम है। यदि किसी की मौत होती है तो उसे स्वजन को 50 हजार रुपये से 2.50 लाख रुपये की क्षतिपूर्ति का नियम है। सड़क सुरक्षा के उपाय व वित्तीय मदद दिलाने के प्रति जागरुकता का अभाव है।
आरटीओ में नहीं आया कोई आवेदन
एआरटीओ हितेश तिवारी ने बताया कि क्षतिपूर्ति के लिए पीड़ित या स्वजन की ओर से संबंधित तहसीली के एसडीएम के यहां आवेदन करना चाहिए। उसके बाद प्रक्रिया आगे बढ़ती है। उन्होंने बताया कि इस साल एक भी आवेदन प्राप्त नहीं हुए हैं। जब सड़क सुरक्षा की बैठक में नहीं गए, मदद क्या करेंगेहाल ही में तीन नवंबर को जिलाधिकारी की अध्यक्षता में सड़क सुरक्षा समिति की बैठक हुई थी। इस बैठक में एक भी विभागाध्यक्ष नहीं पहुंचे थे। सभी संबंधित विभाग से प्रतिनिधि भेजे गए थे। इस पर जिलाधिकारी ने स्पष्टीकरण मांगा था। यह स्थिति सड़क सुरक्षा समिति की है। जब इस समिति की बैठक के प्रति ही अधिकारी गंभीर नहीं हैं तो वे मदद क्या करेंगे।
सड़क सुरक्षा कोष से इस तरह से मदद का है नियम
- सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाने में हुए व्यय का भुगतान प्रतिपूर्ति करना।
- घायल या मृतक व्यक्ति के लिए क्षतिपूर्ति देना।
- सड़क दुर्घटना में घायल हुए व्यक्ति को तत्काल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिए एंबुलेंस व अन्य उपकरणों को खरीदना, रख-रखाव व एंबुलेंस चालक वेतन आदि पर व्यय।
- क्रेन की खरीदारी करना और उसका रख-रखाव करना। ताकि दुर्घटना होने पर दुर्घटनाग्रस्त वाहन को सड़क से हटाया जा सके।
हिट एंड रन मामले में मिलती है 50 हजार रुपये की क्षतिपूर्ति
पुलिस अधीक्षक यातायात जितेन्द्र श्री वास्तव ने बताया कि हिट एंड रन मामले में पीड़ित की क्षतिपूर्ति की जाती है। यानी जब दुर्घटना करने वाला भाग निकले। इस तरह की दुर्घटना में फार्म 54 भरवाया जाता है।
इनका कहना है
दुर्घटना होने पर पीड़ित को हाईवे पर तैनात एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया जाता है। एनएचएआइ वित्तीय मदद या क्षतिपूर्ति नहीं करता है।
- संतोष बाजपेयी, परियोजना निदेशक, एनएच-58
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