कभी गांव के सरकारी स्कूल में पढ़ते थे, आज अमेरिकन कंपनी में हैं 'सीनियर आर्किटेक्ट'; यूपी के बेटे की दिलचस्प कहानी
राजन जसूजा, अमेरिका में सीनियर टेक्निकल आर्किटेक्ट, बताते हैं कि उनके लिए अमेरिका में भी होली-दीवाली का अर्थ हस्तिनापुर ही है। वे परिवार संग भारतीय त् ...और पढ़ें

परिवार के साथ हस्तिनापुर निवासी व अमेरिकन कंपनी में सीनियर टेक्निकल आर्किटेक्ट राजन जसूजा। सौ. स्वजन
जागरण संवाददाता, मेरठ। मेरे लिए तो अमेरिका में रहकर भी होली-दीवाली का मतलब हस्तिनापुर ही है। पिछले पंद्रह साल से परिवार के साथ रहने के बावजूद उसी तरह से हम सभी त्योहार मनाते हैं, जैसे हस्तिनापुर में बचपन से लेकर युवा होने तक मनाते रहे हैं। मेरा दिल तो आज भी हस्तिनापुर में ही बसता है।
हमारी भारतीय सांस्कृतिक परंपराएं अनूठी हैं। ऐसी परंपराएं कहीं नहीं। विदेश में रहकर भी हम अपनी परपंराओं से भारतीय एवं भारतीयता की पहचान बनाए हुए हैं। पारिवारिक बंधनों को बांधे हुए हैं। वहीं, इन त्योहारों के माध्यम से एक दूसरे से मजबूत डोर से बंधे हुए हैं।
यह कहना है हस्तिनापुर निवासी व अमेरिकन कंपनी में सीनियर टेक्निकल आर्किटेक्ट के पद पर कार्यरत राजन जसूजा का। राजन पिछले करीब 15 साल से अपने परिवार के साथ अमेरिका में रह रहे हैं। परिवार में पत्नी मीनाक्षी व दो बच्चे पुत्र प्रांजल और पुत्री खुशी है। वे पहले अमेरिका के न्यूजर्सी प्रांत में रहते थे।
वर्तमान में फ्लोरिडा राज्य में रह रहे हैं। राजन ने अपनी स्कूली शिक्षा महाभारतकालीन नगरी हस्तिनापुर के सरकारी विद्यालय राजकीय इंटर कालेज हस्तिनापुर से प्राप्त की। स्नातक एवं स्नातकोत्तर की पढ़ाई एएसपीजी कालेज मवाना से की। इग्नू से एमसीए की डिग्री लेने के बाद कुछ समय तक नोएडा में नौकरी की। इसके पश्चात अमेरिका में चले गए।
पापा व मम्मी को अमेरिका तक के सफर का श्रेय
ग्रामीण पृष्ठभूमि से होने के बावजूद अमेरिका तक के सफर का श्रेय राजन अपने पापा स्व. सोहन लाल व मम्मी स्व. सुरेश बाला को देते हैं।बताते हैं कि मम्मी हस्तिनापुर के गणेशपुर विद्यालय में शिक्षिका रहीं। अपने उत्कृष्ट शिक्षण कार्य के चलते राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित हुई।मुझे भी सरकारी विद्यालय में शिक्षा दिलाई। उसी शिक्षा की बदौलत उच्च पद पर कार्य कर रहे हैं। यही नहीं उनके पढ़ाए कई अन्य विद्यार्थी भी विदेशों व देश में भी विभिन्न उच्च पदों पर कार्यरत हैं।
हस्तिनापुर की तरह मनाते हैं सभी त्योहार
अमेरिका में रहकर भी हम सभी त्योहार हस्तिनापुर की तरह ही मनाते हैं। इनमें मुख्य रूप से गणेश चतुर्थी, नवरात्र, दीपावली, होली व लोहड़ी समेत अन्य त्योहार शामिल हैं। देश के विभिन्न हिस्सों से आए हुए लोगों के साथ यह त्योहार मनाते हैं। भारतीय संस्कृति और परंपरा को बढ़ाने देने के लिए पूरा प्रयास करते हैं। यही नहीं अपने घरों में बच्चों से हिंदी में ही बात करते हैं।
बेटियों के लिए हस्तिनापुर में विद्यालय खोलूं
मुझे जब भी मौका मिलता है मैं भारत आकर हस्तिनापुर की स्वर्णिम यादों में खो जाता हूं। मेरी इच्छा है कि प्राचीन नगरी हस्तिनापुर में बेटियों के लिए एक विद्यालय खोलूं। निश्शुल्क शिक्षा की व्यवस्था करूं ताकि आर्थिक संकट व अन्य कारणों के चलते कोई बेटी शिक्षा से वंचित न रहे।इसके लिए पूरी तरह प्रयासरत हूं।

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